लुधियाना

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कर्ज नहीं चुका पाए तो सीज हुआ था हॉस्पिटल, बच्चों ने पढ़-लिखकर उसी में खोला आश्रम

वहां अपने दादा-दादी की याद में जेडी ओल्ड एज होम खोल दिया है।

Dainik Bhaskar

Dec 04, 2017, 04:04 AM IST
Children read and write in the same ashram

माहिलपुर(होशियारपुर). बैंक लोन दे पाने पर सीज हुए माहिलपुर के जेडी अस्पताल को डॉक्टर दंपति के बेटा-बेटी पढ़-लिखकर डॉक्टर बने तो आर्थिक हालात सुधरने पर लोन चुकाकर अस्पताल की इमारत को छुड़ा लिया। अब वहां अपने दादा-दादी की याद में जेडी ओल्ड एज होम खोल दिया है।

40 बेड के खोले इस होम में फिलहाल 5 बुजुर्ग हैं। माहिलपुर से गढ़शंकर जाते रोड पर किंग एडवर्ड पब्लिक स्कूल के पास खुले ओल्ड एज होम की कहानी बड़ी इमोशनल है। डॉ.वरिंदर गर्ग और उनकी डॉ.पत्नी स्नेह गर्ग ने बताया कि 2005 में नवांशहर से आकर टूटोमाजारा में जगह खरीद कर पिता स्वर्गीय जगदीश गर्ग और माता दयावती गर्ग की याद में जेडी अस्पताल की स्थापना की।

मन में पेंडू इलाके के लोगों को बड़े शहरों के बड़े अस्पतालों जैसी सेहत सुविधाएं उपलब्ध करवाने की इच्छा थी। मुख्य मार्ग पर बिजली कनेक्शन मिलने से उन्होंने बिजली विभाग से अस्थायी कनेक्शन, जो एक साल के लिए दिया जाता था, लेकर 2009 तक अस्पताल को चलाते रहे। 2009 में पंजाब बिजली विभाग को पंजाब पावर कारपोरेशन में बदल गया तो अस्पताल का बिजली कनेक्शन काट दिया गया। इसके बाद अस्पताल को जेनरेटरों से चलाकर लोगों को सेहत सेवाएं उपलब्ध कराते रहे। 2009 से 2011 तक जेनरेटरों से अस्पताल की बिजली सप्लाई चलाने से वह कर्ज के बोझ तले दब गए।

2011 में शार्ट सर्किट से मशीनें जल गईं तो कमर टूट गई : डॉ. गर्ग
डॉ. वरिंदर गर्ग ने बताया कि साल 2011 में ही शार्ट सर्किट से अस्पताल की सभी मशीनें जल गईं। इससे सारा काम रुक गया। ऊपर से बैंक से लिए कर्ज के कारण आर्थिक हालात काफी कमजोर हो गए। बैंक से चले केस के कारण परिवार को काफी बुरे हालातों का सामना करना पड़ा। बिजली कनेक्शन कटने से बच्चों को मेडिकल की पढ़ाई मोमबत्ती की रोशनी में करनी पड़ी। हालात यहां तक गए कि बैंक की ओर से अस्पताल को सीज कर दिया गया। डॉ. वरिंदर गर्ग ने बताया कि उसके बाद माहिलपुर में किराए की जगह लेकर घर में ही अस्पताल खोला और काम चलाया। बच्चों को पढ़ाने लगे। कड़ी मेहनत कर बेटी प्रियंका गर्ग ने देश मे 27वां रैंंक लेकर राजिंदरा मेडिकल कालेज में नौकरी प्राप्त कर ली। इससे घर के हालात सुधरने लगे। 2017 में बेटे मोहित गर्ग को अमेरिका में डॉक्टरी शिक्षा के लिए दाखिला मिल गया।

बेटा भी विदेश से आर्थिक मदद कर रहा है।

ग्राहक ने अस्पताल की इमारत का सवा करोड़ रेट डाला, डॉक्टर के बच्चे बोले-नहीं.. यहां बुजुर्गों की सेवा करेंगे
डॉ. वरिंदर ने बताया कि आर्थिक हालात सुधरे तो 2017 में उन्होंने बैंक के साथ केस को समाप्त कर जेडी अस्पताल को खुलवा लिया। बिजली का कनेक्शन लगवाकर मरम्मत करवाई तो एक ग्राहक ने अस्पताल सवा करोड़ रुपए में खरीदने की पेशकश की। उन्होंने बच्चों से सलाह की तो उन्होंने कहा कि इस जगह से उनकी खट्टी-मीठी यादें जुड़ी हैं, इसलिए आप यहां दादा दादी जी की याद में ओल्ड एज होम खोलकर बेसहारा लोगों की सेवा करें। बच्चों का यह प्रस्ताव उन्हें भी अच्छा लगा और यहीं से जेडी ओल्ड एज होम की नींव पड़ गई।

बुजुर्गों की सेवा के लिए 11 मेंबरी जेडी वेलफेयर सोसायटी बनाई
डॉ.गर्ग ने बताया कि उन्होंने 11 मेंबरी टीम को साथ लेकर जेडी वेलफेयर सोसायटी की स्थापना की। 30 नवंबर को एडीसी अनुपमा कलेर ने उद्घाटन कर जेडी ओल्ड एज को बेसहारा लोगों के लिए खोल दिया। ओल्ड एज होम में बेसहारा को दाखिल करवाने के लिए कोई भी व्यक्ति अपने आधार कार्ड के साथ ओल्ड एज होम में छोड़ सकता है। इसकी कोई भी फीस नहीं ली जाएगी, बल्कि बुजुर्ग को कपड़ों से लेकर दवा तक मुफ्त में उपलब्ध करवाई जाएगी।

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