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मशीनों से काम करा हड़पी दिहाड़ी, मजदूरों ने कबूला नहीं किया काम

गांव मंडियाणी में हुए गोलमाल की जांच कर बीडीपीओ ने सरपंच और तीन पंचों को बर्खास्त करने की सिफारिश की

Danik Bhaskar | Jan 17, 2018, 03:41 AM IST
डेमोफोटो डेमोफोटो

लुधियाना. दाखा हलके के गांव मंडियाणी में सरपंच व पंचों ने मिलकर छप्पड़ व अन्य काम जेसीबी व ट्रैक्टर ट्रालियों से कराया, लेकिन कागजों में उनकी जगह फर्जी मनरेगा मजदूरों की हाजिरी लगा लाखों रुपए हड़प लिए। गांव के ही कुछ लोगों ने राज्य के पंचायती राज मंत्री तृप्तइंदर बाजवा को इसकी कंप्लेंट की तो जांच में सारा पर्दाफाश हो गया। मनरेगा के तहत जिनकी जाली दिहाड़ी लगी थी, पूछताछ में उन्होंने खुद ही कबूल लिया कि उन्होंने कभी मनरेगा के अधीन काम किया ही नहीं है। मामले की जांच बीडीपीओ के जरिए की गई तो उन्होंने सरपंच व तीन पंचों को बर्खास्त करने की सिफारिश कर दी।

इन्होंने मजदूरी नहीं की, लेकिन दिहाड़ी बैंक खाते में आई

गांव के बचित्तर सिंह ने नरेगा में काम नहीं किया। फिर भी उसके नाम पर जॉब कार्ड नंबर 12 बना। कागजों में उसे रेनोवेशन का काम करता दिखाया गया है। उनके बैंक अकाउंट में 1,260 रुपए आए। ये काम उसने गुरमुख सिंह पंच व सरपंच प्रकाश कौर के पति गुरबचन सिंह के कहने पर किया और पैसे उन्हें ही दिए गए। इसी तरह हरप्रीत सिंह की रोड कनेक्टिविटी आदि पर काम के बदले 96 दिहाड़ियां लगी व 21, 364 रुपए दिहाड़ी मिली। ये काम उसने पंच हरदयाल कौर के पति जोरा सिंह के कहने पर किया व उसे ही पैसे दिए। कर्मजीत सिंह ने कहा कि सरपंच के पति गुरबचन के कहने पर उसके बेटे लखविंदर की जाली दिहाड़ियां लगी। हालांकि सरपंच व पंचों ने अपने जवाब में आरोपों को नकारते हुए कहा कि राजनीतिक कारणों से ये आरोप लगाए जा रहे हैं। अगर गड़बड़ी थी तो पहले शिकायत क्यों नहीं की?। मनरेगा मजदूरों की दो दिन घर-घर चेकिंग व गांव में इजलास, दीवारों पर नरेगा मजदूरों के नाम लिस्ट लगाने के बावजूद किसी ने कोई एेतराज नहीं किया। यह पंचायत के अक्स को खराब करने की कोशिश है।

परिवार में दो-दो जॉब कार्ड, सरपंच के बेटे भी शामिल

मनरेगा में परिवार में से एक ही मेंबर को सौ दिन का रोजगार देने का नियम है लेकिन मंडियाणी में कई ऐसे परिवार हैं, जिनके कई मेंबरों का एक साथ जॉब कार्ड बना काम देना दर्शाया गया। इसमें सरपंच प्रकाश कौर के दोनों बेटे कुलदीप सिंह व दलवीर सिंह मनरेगा मजदूर बताए गए। इसमें 8 और ऐसे मामले पकड़े गए।

पेमेंट 17.76 लाख की, एमबी में 1.56 लाख दर्ज

बीडीपीओ की पड़ताल के मुताबिक सिधवां बेट में ऑनलाइन रिकॉर्ड के मुताबिक अप्रैल 2013 से जून 2016 तक 17.76 लाख का खर्चा हुआ, लेकिन मिजरमेंट बुक में तत्कालीन टीए ने लगभग 1.56 लाख का ही ब्योरा दर्ज किया। हालांकि सारी पेमेंट्स की नोटिंग टीए रेशम सिंह ने तस्दीक की। टीए ने इससे सरकार को लगभग 16.20 लाख का नुकसान पहुंचाया। इस टीए के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की गई।

रिपोर्ट में लिखा- लोक हित में नहीं इनका बने रहना

बीडीओ ने रिपोर्ट में लिखा कि सरपंच प्रकाश कौर, पंच गुरमुख सिंह, हरदयाल कौर, गुरनाम सिंह, ग्राम पंचायत मंडियाणी ने अपने फर्ज के पालन में कोताही की है। इसलिए उनका लोकहित में ओहदे पर बने रहना ठीक नहीं होगा। इनके खिलाफ पंजाब पंचायती राज एक्ट 1994 की धारा 20(1)(f) के तहत कार्रवाई की सिफारिश की गई। जिसमें डायरेक्टर इन्हें नोटिस जारी करने के साथ उनका पक्ष जानकार बर्खास्त कर सकता है।