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रंगदारी देने से किया इनकार, फिर गैंगस्टर ने घर के बाहर खड़ी इनोवा में लगाई आग

सुखप्रीत बुड्ढा सेवेवाला गैंग का सदस्य है, यह गुरबख्श सेवेवाला के गैंग में था।

Danik Bhaskar | Mar 14, 2018, 07:11 AM IST

मोगा. गैंगस्टर सुखप्रीत सिंह बुड्ढा 10 दिनों से फोन पर निहाल सिंह वाला नगर पंचायत प्रधान इंद्रजीत जौली से रंगदारी मांग रहा था। इंकार करने पर मंगलवार अलसुबह 3 बजे उनके घर के नीचे खड़ी इनोवा को गैंगस्टर ने आग लगा दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने अलर्ट जारी कर दिया है। थाना निहाल सिंह वाला के एसएचओ जसवंत सिंह ने बताया कि जौली की शिकायत पर गैंगस्टर बुड्ढा पर केस दर्ज किया है। दिसंबर 2017 में भी बुड्ढा रौतां में युवक पर गोली चलाई थी, लेकिन वह बाल-बाल बच गया था।

4 माह में 3 बार दो राज्यों की पुलिस से बच निकला गैंगस्टर बुड्ढा, अब चला रहा फिरौती का नेटवर्क


मोगा के गांव कुस्सा का सुखप्रीत बुड्ढा पिछले चार महीने में तीन बार पुलिस के हाथ आते-आते रह गया। यमुनानगर के छछरौली में नवंबर 2017 में जब सिम्मा और गौंडर की फॉरच्यूनर पलटी तो बुड्ढा उनके साथ था और ये लोग गाड़ी छोड़कर मौके से भाग निकले। छछरौली पुलिस ने इन पर केस दर्ज किया। वहां से भागकर सिम्मा और बुड्ढा पंजाब आ गए और मोगा में निजी रंजिश में एक नौजवान पर फायरिंग कर दी। 13 जनवरी 2018 को जब सिम्मा देहरादून से अपने साथियों के साथ पकड़ा गया तो बुड्ढा यहां से भी पहले ही खिसक गया और पुलिस के हाथ नहीं लगा। इसके बाद 26 जनवरी 2018 को जब गौंडर का एनकाउंटर किया गया तो उससे कुछ समय पहले ही बुड्ढा उससे अलग हुआ था। इसीलिए जब गौंडर का एनकाउंटर हुआ तो उसके गौंडर व प्रेमा लाहौरिया के साथ मारे गए तीसरे व्यक्ति को पुलिस एनकाउंटर के 24 घंटे बाद तक बुड्ढा ही समझती रही। यही नहीं पुलिस ने बुड्ढा के परिजनों को राजस्थान के गंगानगर के अस्पताल में ले जाकर तीसरे शख्स की शिनाख्त भी करवाई थी। इसके बाद पता चला कि यह बुड्ढा नहीं बल्कि तरनतारण का नौजवान है।

गौंडर व दविंदर शूटर के लिए गाड़ियां लूटता था बुड्ढा, अब अपना फिरौती का नेटवर्क बनाने में जुटा

सुखप्रीत बुड्ढा सेवेवाला गैंग का सदस्य है, यह गुरबख्श सेवेवाला के गैंग में था। मगर दविंदर शूटर का बठिंडा के रामपुरा में 11 सितंबर 2016 में एनकाउंटर होने के बाद यह गुरबख्श सेवेवाला और सिम्मा बहबल के साथ गौंडर से जा मिला और गौंडर को गाड़ियां मुहैया करवाने के लिए गनप्वाइंट पर गाड़ियां लूटने लगा। इसने लुधियाना से एक फॉरच्यूनर गाड़ी गनप्वाइंट पर लूटी जो छछरौली में पलट गई। इसमें गौंडर, सिम्मा, बुड्ढा और गौरव मिगलानी थे। इसकी लूटी हुई कई गाड़ियां गौंडर के पास थी, जो गौंडर और प्रेमा के एनकाउंटर के बाद एक राज ही बनकर रह गई। उसके गैंग के पुराने साथी गुरबख्श और सिम्मा तो पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। अब बुड्ढा अपने गैंग में नए नौजवानों को जमा कर फिरौती का नेटवर्क चला अपना गैंग खड़ा करने में लगा है।

दविंदर बंबीहा के एनकाउंटर के समय भी था उसके साथ, पुलिस को चकमा देकर भागा

सुखप्रीत बुड्ढा बेहद शातिर किस्म का अपराधी है। 11 सितंबर 2016 को बठिंडा के रामपुरा में जब गैंगस्टर दविंदर बंबीहा का एनकाउंटर किया गया तो दविंदर शूटर अपने दो साथियों तारा दोसांज और सुखप्रीत बुड्ढा के साथ छिपा हुआ था। इस दौरान दविंदर शूटर एनकाउंटर में मारा गया था, तारा घायल अवस्था में पकड़ा गया था, जबकि तीसरा सुखप्रीत बुड्ढा खेतों की आड़ लेकर भागने में कामयाब रहा था। सुखप्रीत बुड्ढा की 2017 में जैतो में हुए रविंदर कौचर हत्याकांड में भी पुलिस को तलाश है। इसके अलावा भगताभाईका में गनप्वाइंट पर गाड़ियां छीनने, गांव सेवेवाला में 2013 में हुए दोहरे हत्याकांड में भी उसकी तलाश है।

बुड्ढा ने 14 दिसबंर 2017 को रौतां के युवक पर चलाई थी गोलियां

गैंगस्टर सुखप्रीत सिंह बुड्ढा की ओर से निहाल सिंह वाला नगर पंचायत प्रधान से फिरौती मांगने पर फिरौती देने से इंकार करने के बाद मंगलवार सुबह तीन बजे प्रधान के घर के नीचे व आढ़त की दुकान के बाहर खड़ी इनोवा को गैंगस्टर ने आग लगा दी। इससे पहले गांव रौतां निवासी 28 साल के हरदीप सिंह ने बताया था कि उसके पिता दर्शन सिंह का गांव के ही मोहन लाल अरोड़ा के साथ जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। उस समय गांव का ही जोगिंदर सिंह मिड्डा जो गैंगस्टर है, वह मोहन लाल का साथ देते हुए उसके साथ रंजिश रखने लगा था। 14 दिसबंर 2017 को वह अपने किसी जरूरी काम से मानूके रोड पर गांव के पंचायत मेंबर से मिलने के लिए शाम को पांच बजे गया था। इतने में सफेद रंग की स्कार्पियों गाड़ी में सवार कुख्यात गैंगस्टर सुखप्रीत सिंह बुड्डा ने अपने तीन साथियों समेत उस पर अंधाधुंध गोलियां चलाई। लेकिन उसने उक्त गैंगस्टरों से भागकर जान बचाई। फरीदकोट जेल में बंद जोगिंदर सिंह मिड्डा ने अपने साथी सुखप्रीत सिंह बुड्ढा निवासी गांव कुस्सा को उसको मारने की सुपारी दी थी।