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अंग्रेजों के जमाने के बने रथ पर विराजेंगे भगवान, मिलिट्री गाड़ीयों के लगे हैं हुए पुर्जे

मरम्मत का काम पूरा, अब होगी फूलों से सजावट; पंजाब-हरियाणा की 18 यात्राओं में इस्तेमाल होता है यही रथ।

Danik Bhaskar | Dec 13, 2017, 04:03 AM IST

लुधियाना. 22वीं जगन्नाथ रथयात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं। शहर की गलियों, नुक्कड़ों, चौक-चौराहों पर भगवान जगन्नाथ के अभिनंदन के फ्लैक्स लगे हैं। धूमधाम और भक्तिभाव से प्रभात फेरियां, संध्या फेरियां निकाली जा रही हैं। इस बीच, जिस रथ पर भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलदेव जी के साथ विराजमान होकर शहरवासियों को दर्शन देंगे, उसकी मरम्मत का काम मंगलवार पूरा हो चुका है। अब इसे फूलों से सजाया जाएगा। यह हफ्तेभर पहले ही कुरुक्षेत्र से लुधियाना लाया गया है।

दरअसल, रथ वर्ष 1945-46 के आसपास अंग्रेजों के जमाने का बना हुआ है। इसका आकार पहले छोटा था, जरूरत के हिसाब से मॉडिफाई करके बड़ा किया गया। कल-पुर्जे मिलिट्री सर्विस में इस्तेमाल होने वाले शक्तिमान ट्रक के लगे हैं। एक्सल, ब्रेक सिस्टम शक्तिमान के ही लगाए गए हैं। करीब 8 टन तक लोहा और 30 के करीब प्लाइवुड की शीट्स लगी हैं। पहले टायर के थे, लेकिन अब पहिए भी लोहे के ही लगवाए गए हैं। यही नहीं, हर साल पंजाब और हरियाणा में भगवान जगन्नाथ जी की 18 शोभायात्राओं में इसी रथ का उपयोग किया जाता है। पंजाब के दो शहरों लुधियाना और जालंधर में जगन्नाथ रथयात्रा निकाली जाती है।

सिख परिवार संभाल रहा है रथ के रिपेयर की जिम्मेदारी

2012 से समराला चौक का सिख भोडे परिवार (धर्मपुरिया परिवार) की वर्कशॉप में ही रथ की रिपेयरिंग की जाती है। रथ के खराब कल-पुर्जे बदलने से लेकर हर प्रकार का सामान यह परिवार खुद लगाता है। रथयात्रा के दौरान परिवार रथ के आसपास ही रहते हैं ताकि कोई रुकावट आए तो मौके पर ही उसका समाधान किया जा सके। रिपेयरिंग का जिम्मा मिलने की कहानी भी दिलचस्प है। दरअसल, 2011 में रथयात्रा के दौरान आरती चौक के पास रथ का एक टायर निकल गया था। रथ को ठीक करने का संकट खड़ा हो गया था। तभी रथयात्रा में शामिल ट्रांसपोर्टर नरेश देवगन ने अपने साथी व मिलिट्री वाहनों में लगने वाले कल-पुर्जों की वर्कशाप चलाने वाले रविंदर सिंह को मौके पर बुलाया। उन्होंने रथ ठीक कर दिया। तभी से रविंदर सिंह परिवार समेत इस सेवा में लगे हैं। अब उनके बेटे दलजीत सिंह भोडे रथ की मरम्मत करते हैं। पंजाब-हरियाणा में सालभर में होने वाली सभी 18 यात्राओं के बाद रिपेयरिंग के लिए यह रथ उनके पास ही आता है। एक बार रिपेयरिंग का खर्च तकरीबन एक लाख रुपए तक बैठता है, लेकिन दलजीत कोई पैसा नहीं लेते हैं।