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11 दिन की जुड़वां बेटियों को घर छोड़ काम संभाला, अब लोग जानते हैं लिज्ज़त पापड़ नाम से

लुधियाना की अरुणा की कोशिशों से हजारों महिलाएं घर बैठे कमाई कर रही हैं।

Dainik Bhaskar

Jan 22, 2018, 04:39 AM IST
सराभा नगर स्थित श्री महिला गृह उद्योग में पापड़ बनातीं महिलाएं। सराभा नगर स्थित श्री महिला गृह उद्योग में पापड़ बनातीं महिलाएं।

लुधियाना. पंजाब में आतंकवाद के दौर में अपने पिता मंगत पाठक को खोने के बाद अरुणा उनके गम को नहीं भुला पा रही थीं। उसी दौरान अखबार में श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ की ओर से दिए गए एड देखने के बाद अरुणा ने संस्था के साथ जुड़ने का निर्णय लिया। बेटा आशीष भी तब एक ही साल का था।

‘श्री महिला गृह उद्योग के संस्थापक पुरुषोत्तम दामोदर दत्ताणी ने लुधियाना आकर इस व्यवसाय के साथ जुड़ने वाली महिलाओं को खुद आटा तैयार करने से लेकर पापड़ बेलने को कहा।

शुरुआत में हम सभी के हाथों में छाले पड़ गए। उस समय हमें दत्तानी बापू ने कहा कि जब तक तुम्हें खुद काम सीखना और करना नहीं आएगा तुम दूसरों के दर्द और मेहनत को नहीं समझ पाओगी। हम सब की ट्रेनिंग के बाद 23 जनवरी 1988 को लुधियाना में श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ की शुरुआत हुई।

ऐसे सीखा था काम
- अरूणा ने आगे बताया कि मैंने पापड़ बेलने से लेकर पैकिंग, स्टोर कीपर का काम भी किया 1 साल बाद दत्ताणी बापू ने मुझे लुधियाना की संचालिका के तौर पर नियुक्त किया।
- शुरुआत में हमारे साथ 52 महिलाएं थीं। इन महिलाओं को जोड़ने के लिए हमने घर घर जाकर उन्हें संस्था के साथ काम करने के फायदों के बारे में बता कर संस्था के साथ जुड़ने को प्रेरित किया।
- 1991 मैं मेरी जुड़वां बेटियां सरगम और सुरभि पैदा हुई जब वह 11 दिन की थी मैं उन्हें अपनी सास के पास छोड़कर ब्रांच में महिलाओं का साथ देने चली आती थी।
आज हमारे साथ लुधियाना में 700 महिलाएं जुड़ीं हुई हैं इनमें भी 300 महिलाएं शुरुआत से हमारे साथ हैं।
- ये सभी रोजाना 176800 पापड़ तैयार कर रही हैं। लुधियाना में रोजाना 200 ग्राम के 6800 पैकेट्स तैयार होकर रहे हैं।
- शुरुआत में महिलाओं को 3 रूपए प्रति किलो के हिसाब से पेमेंट मिला करती थी जो कि अब बढ़कर 46 रूपए प्रति किलो हो चुकी है।
- एक महिला 3 किलो से लेकर 10 किलो के आटे से पापड़ तैयार कर लेती है। अरुणा ने बताया कि वह सहारनपुर, अंबाला, करनाल, साहनेवाल, जालंधर और जम्मू ब्रांच की संचालिका भी हैं। अरुणा ने बताया कि उनके पति सुनील शर्मा हमेशा उनका सहयोग करते आए हैं।


मुंबई से आता है रॉ मेटेरियल, हर हफ्ते सैंपल लैब में जांच के लिए भेजे जाते हैं

- अरुणा ने बताया कि देशभर में श्री महिला उद्योग के 88 सेंटेंर्स हैं। सभी सेंटर्स के लिए रॉ मटेरियल मुंबई से ही आता है यहां तक की सभी की रेसिपी भी एक ही अपनाई जाती है। इसीलिए लिज्जत का स्वाद इतने सालों में भी वही है।

- लुधियाना ब्रांच से रोजाना 1700 किलोग्राम आटा महिलाओं को दिया जाता है। ब्रांच से महिलाएं रोज सुबह अपने घरों में ले जा कर पापड़ तैयार करके अगली सुबह ब्रांच में दे जाती हैं।

- पापड़ की क्वालिटी की जांच करने के लिए हर हफ्ते पापड़ के सैंपल मुंबई स्थित लैब में भी भेजे जाते हैं।

- लुधियाना सेंटर में 11 तरह के पापड़ तैयार किए जाते हैं इसमें उड़द, गार्लिक, रेड चिली, मूंग, उड़द स्पेशल, मूंग स्पेशल, पंजाबी, जीरा, ग्रीन चिली, प्लेन और सिंधी पापड़ तैयार किए जाते हैं।

शुरू से जुड़ी महिलाओं के आगे की पीढ़ियां भी कर रही काम

- अरुणा शर्मा ने बताया कि इस संस्था के साथ शुरुआत से जुड़ी महिलाओं के आगे की पीढ़ियां भी पापड़ बेलने का काम कर रही है।
- इस संस्था का मकसद ही कम पढ़ी लिखी औरतों को रोजगार दिलवाना है। अरुणा ने बताया कि संत उनके संचालिका का पद संभालने के समय लुधियाना ब्रांच 5 लाख रुपए के नुकसान में चल रही थी उस समय उन्होंने सभी महिलाओं से अपील की थी कि अगर घर से भी पैसे लाकर इस संस्था को आगे बढ़ाना पड़ा तो वह भी हम जरूर करेंगे।
- लेकिन महिलाओं की मेहनत के कारण इस बात की नौबत नहीं आई। कई महिलाओं ने इसी कमाई से अपने बच्चों को उच्च शिक्षा भी दिलवाई है।
- ब्रांच का प्रॉफिट भी महिलाओं को बांटा जाता है साथी दीवाली और दत्तानी बापू जी के जन्मदिन के मौके पर भी बोनस भी महिलाओं को दिया जाता है।

लिज्जत पापड़। लिज्जत पापड़।
फाइल फोटो फाइल फोटो
फाइल फोटो फाइल फोटो
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सराभा नगर स्थित श्री महिला गृह उद्योग में पापड़ बनातीं महिलाएं।सराभा नगर स्थित श्री महिला गृह उद्योग में पापड़ बनातीं महिलाएं।
लिज्जत पापड़।लिज्जत पापड़।
फाइल फोटोफाइल फोटो
फाइल फोटोफाइल फोटो
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