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डॉ. बेटी को छोड़कर वापस जा रही थी मां, हुआ एक्सीडेंट तो कार में फंस गई बॉडी

मां थी डॉक्टर तो बेटी थी मेडिकर ऑफिसर।

Danik Bhaskar | Dec 20, 2017, 03:55 AM IST
खड़े ट्रक से टकराई कार। खड़े ट्रक से टकराई कार।

लुधियाना. सुबह करीब नौ बजे लुधियाना से जा रही कार खड़े ट्रक से सीधे जा टकराई। इस हादसे में कार सवार सिविल हॉस्पिटल की SMO डॉ.रश्मि बेदी और उनके ड्राइवर बलविंदर सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाद में लोगों की मदद से पुलिस ने कार में फंसे दोनों शव बड़ी मशक्कत से निकाले। वहीं हादसा होते ही ट्रक ड्राइवर फरार हो गया।

पीछे की सीट पर बैठी थीं डॉक्टर
हादसे की खबर पाते ही तमाम सरकारी व गैर-सरकारी डॉक्टर घटनास्थल व डॉ.रश्मि के शहर में चेत सिंह नगर इलाके पहुंचे। बताते हैं कि शहर के चेत सिंह नगर स्थित निवास से डॉ.रश्मि बेटी डॉ.शगुन के साथ कार से रवाना हुई थीं, जो पायल में मेडिकल अफसर हैं। उन्होंने बेटी को पायल छोड़ा, फिर मोरिंडा के लिए समराला रोड की तरफ जा रही थीं। जैसे ही उनकी कार गांव बुर्ज के पास पहुंचीं तो हादसा हो गया। पिछली सीट पर बैठी डॉ.बेदी के साथ ही कार चला रहे शहर के हैबोवाल निवासी बलविंदर ने भी दम तोड़ दिया।

ऐसे पता चली एक्सीडेंट की बात
इस हादसे को देख रुके वाहन सवारों व आसपास के गांववालों ने फोन पर सूचना दी तो थाना खमाणो की पुलिस भी मौके पर पहुंची। सब इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह ने दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाए। वहीं पुलिस ने ट्रक भी कब्जे में ले लिया। इस मामले में डॉ.रश्मि के पति डॉ.कुलदीप सिंह बेदी के बयान पर फरार ट्रक ड्राइवर के खिलाफ पर्चा दर्ज किया गया।

साथ काम करने वालों की थी दीदी
12 साल तक लुधियाना के सिविल हॉस्पिटल में पीडियाट्रिशियन और पीपी यूनिट की इंचार्ज रहीं डॉ. रश्मि बेदी साथ काम करने वाले डॉक्टरों के लिए दीदी जैसी थीं। छह महीने पहले प्रमोशन होने पर उनकी पोस्टिंग मोरिंडा के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में हो गई थी। उनके पति डॉ. कुलदीप सिंह बेदी चेत सिंह नगर में डेंटल क्लीनिक चलाते हैं। उनकी बेटी शगुन बेदी सीएचसी पायल में बतौर मेडिकल अफसर (एमओ) तैनात है। जबकि बेटा चैतन्य बेदी

डीएमसी से एमबीबीएस कर रहा है।

डॉ. रश्मि ने भी डीएमसी से ही एमडी पीडियाट्रिक्स की थी। वे 12 साल तक उनके कुलीग के तौर पर सिविल हॉस्पिटल में तैनात रहीं हैं। पीसीएमएस एसोसिएशन के प्रधान डॉ. जगजीत सिंह ने कहा कि सड़क हादसे में हुई डॉ. रश्मि बेदी की मौत किसी सदमे से कम नहीं है। एसोसिएशन इस दुख की घड़ी में उनके परिवार के साथ है। इनपुट - राजकुमार साथी

कभी भी मजाक का बुरा नहीं मानती थीं
भले ही डॉ. रश्मि शारीरिक तौर पर अस्वस्थ रहती थीं, लेकिन वे अंदर से बहुत स्ट्रॉन्ग थी। वे कभी भी मजाक का बुरा नहीं मनाती थी। जब उनकी पोस्टिंग मोरिंडा सीएचसी में एसएमओ को तौर पर हुई तो मैंने खुद विदाई पार्टी देकर उन्हें विदा किया था। -डॉ. हरप्रीत सिंह, चाइल्ड स्पेशलिस्ट

साथियों की घरेलू समस्या करती थीं दूर
वे बड़ी बहन की भूमिका में रहती थीं। वैक्सिनेशन को लेकर होने वाली ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने सैकड़ों नर्सिंग स्टाफ को ट्रेंड किया। उनके साथ पारिवारिक समस्या डिसक्स करने पर वे उसके समाधान भी बताया करती थीं। -डॉ. हरजीत सिंह, पीडियाट्रिशियन

बेटी को पायल छोड़कर जा रहीं थी। बेटी को पायल छोड़कर जा रहीं थी।
साथ काम करने वालों की थी दीदी। साथ काम करने वालों की थी दीदी।
डॉ. रश्मि ने भी डीएमसी से ही एमडी पीडियाट्रिक्स की थी। डॉ. रश्मि ने भी डीएमसी से ही एमडी पीडियाट्रिक्स की थी।
बुधवार सुबह 10 बजे धूरी लाइन श्मशानघाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। बुधवार सुबह 10 बजे धूरी लाइन श्मशानघाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
जून में प्रमोट हो मोरिंडा की एसएमओ बननेे पर लुधियाना सिविल अस्पताल में डॉ. रश्मि को विदाई देने की तस्वीर। (फाइल फोटो) जून में प्रमोट हो मोरिंडा की एसएमओ बननेे पर लुधियाना सिविल अस्पताल में डॉ. रश्मि को विदाई देने की तस्वीर। (फाइल फोटो)