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नई इनोवा में 16 को ही निकलते हैं प्रभु जगन्नाथ, साथ होते हैं बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र

Dainik Bhaskar

Dec 14, 2017, 06:06 AM IST

रथयात्रा के माध्यम से शहरवासियों को धन्य करने से पहले इस्कॉन मंदिर, साउथ सिटी में एक दिन विराजते हैं प्रभु लीलाधर

Prabhu Jagannath is the only 16 in New Innova
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लुधियाना. अपने भक्तों की करुण पुकार सुनकर भगवान श्री जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और बड़े भैया बलभद्र जी के साथ इस्कॉन टेंपल, कैलाश चौक से 16 दिसंबर को ही निकल पड़ते हैं। प्रभु लीलाधर को बहन और भाई के साथ तीन अलग-अलग नई इनोवा में बिठाकर पूरे विधि-विधान के साथ नवनिर्मित साउथ सिटी के इस्कॉन मंदिर लाया जाता है।


यहां गोपाल कृष्ण जी महाराज की देखरेख में पूजा-अर्चना होती है। मंदिर के पुजारी और भक्तगण पूरे दिन रात भजन-कीर्तन के माध्यम से भगवान जगन्नाथ का गुणगान कर पुण्य कमाते हैं। 13 वर्षों से भगवान जगन्नाथ की सेवा कर रहे इस्कॉन टेंपल के हेड पुजारी बलभद्र प्रभु बताते हैं कि फूलों से सुसज्जित रथ पर विराजमान होकर लुधियानावासियों को अपने आशीष से धन्य करने से पहले 17 दिसंबर को सुबह भगवान जगन्नाथ जी को पूरे आदर-सत्कार के साथ महाराजा रिजेंसी लाया जाएगा। यहां भाई और बहन के साथ प्रभु जगन्नाथ की पूजा-अर्चना की जाती है और देश-विदेशों से आए भक्तगण प्रभु के चरणों में नमन करते हैं। कुछ देर विश्राम के बाद भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के पावन स्वरूप रथयात्रा के शुभारंभ स्थल जगराओं पुल स्थित श्री दुर्गा माता मंदिर के लिए प्रस्थान करते हैं। यहां पहले शृंगार किया जाता है, फिर महाआरती और 56 भोग लगाकर भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और बलभद्र जी को रथ पर विराजमान कराया जाता है। मुख्यअतिथि रथ के आगे झाड़ू लगाते हैं, और दर्शन को लालायित भक्तजनों की पुकार पर भगवान का रथ रवाना हो पड़ता है। लाखों की संख्या में उमड़े भक्त अपने हाथों से रथ खींचकर जगत के नाथ की कृपा बटोरते हैं। देर रात सराभा नगर दुर्गा मंदिर पर रथयात्रा खत्म होने के बाद भगवान जगन्नाथ को रात्रि विश्राम के लिए कोठारी रिजोर्ट पहुंचाया जाता है।


18 दिसंबर सोमवार को यहां दिनभर प्रभु की महिमा में भजन-कीर्तन होता है। अगले दिन मंगलवार को भगवान, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ यहां से विदा होते हैं और इस्कॉन टेंपल में तीनों पावन स्वरूपों को पूरे विधि-विधान के साथ फिर से स्थापित कर दिया जाता है। अपने भक्तों की अथक पुकार पर उनके कष्ट हरने भगवान जगन्नाथ हर साल ऐसे ही यात्रा पर निकलते हैं।

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