लुधियाना

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रेलवे ने बंद की 30 रुपए में चूहे मारने की मुहिम, अब प्राइवेट काम करवाने पर लाखों फूंकेगा

पीएयू ने वर्कशाॅप लगाकर रेलवे मुलाजिमों को चूहे पकड़ने का प्रेक्टिकल फॉर्मूला बताया।

Danik Bhaskar

Dec 17, 2017, 05:44 AM IST

लुधियाना. डीआरएम का तबादला होते ही नौ महीने से रेलवे स्टेशन पर चूहे से निपटने की मुहिम ठप हो गई है। चूहों की वजह से रेलवे स्टेशनों पर रेलवे बोर्ड को करोड़ों का नुकसान हो रहा है। नुकसान को देखकर डीआरएम ने अपने मुलाजिमों को चूहे पकड़ने के लिए पीएयू से बाकायदा जून 2016 में ट्रेनिंग भी दिलवाई। पीएयू ने वर्कशाॅप लगाकर रेलवे मुलाजिमों को चूहे पकड़ने का प्रेक्टिकल फॉर्मूला बताया।

ट्रेनिंग लेने वाले मुलाजिमों ने इस पर काम भी शुरू किया, लेकिन जैसे ही डीआरएम का तबादला हुआ, ट्रेनिंग लेने वाले इंप्लाइज ने चूहे पकड़ने का काम ठप कर दिया। बता दें कि अरसे से रेलवे स्टेशन पर चूहों के “आतंक’ से मुसाफिर ही नहीं, महकमा भी परेशान है। डीआरएम अनुज प्रकाश ने चूहों पर काबू पाने की ट्रेनिंग दिलाई थी। पीएयू ने रेलवे इंप्लाइज को चूहों से कैसे निपटा जाए, इसके बारे में बताया। इसमें मात्र 30 रुपए के खर्चे से 1000 हजार चूहों से निपटा रहा था। लेकिन अब यह काम 9 महीनों से बंद हैं। वहीं, अब रेलवे के मैकेनिकल डिपार्टमेंट द्वारा मात्र 30 रुपए खर्च के बदले यह काम प्राइवेट तौर पर कांट्रेक्ट के जरिए करवाने का सोचा जा रहा है। इससे रेलवे को अलग से लाखों का बोझ पड़ेगा।

प्राइवेट कंपनी के माहिरों से कराएंगे काम
मैं फाइल निकलवाऊंगा कि किसी-किसी मुलाजिम ने पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों से चूहों पर काबू पाने वाले फार्मूले की ट्रेनिंग ली है और वो इस पर काम करने से क्यों मना कर रहे हैं। -अभिनवसिंगला, स्टेशन डायरेक्टर

चूहों पर काबू पाने के लिए इस्तेमाल होने वाला जिंक फॉस्फेट खतरनाक हैं। उसको इस्तेमाल करने की जानकारी मुलाजिमों को नहीं है। ऐसे में किसी प्राइवेट कंपनी के माहिरों की सेवाएं लेंगे। -अनुजकुमार, चीफ हेल्थ इंस्पेक्टर, मैकेनिकल डिपार्टमेंट

इसे लेकर रेलवे के कॉमर्शियल डिपार्टमेंट ने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए मैकेनिकल डिपार्टमेंट के पाले में गेंद डाल दी। वहीं मैकेनिकल डिपार्टमेंट के अफसर अपने मुलाजिम ट्रेंड होने की दलील दे हाथ खड़े कर गए। अब प्राइवेट तौर पर इस मुहिम को चलाने का प्रपोजल फिरोजपुर डिवीजन को भेजने की तैयारी है। आशंका है कि इसका बजट ज्यादा होने की स्थिति में प्रपोजल रद्द भी हो सकता है।

जीव विज्ञान विभाग के डॉ. एसएस हुंदल, डॉ. नीना सिंगला, डॉ. गुरविंदर कौर, डॉ. नवदीप कौर डॉ. वीके बब्बर ने रेलवे स्टेशन पर डेमो दिया था। इससे बचाव को बिलों में दवाई की पुड़िया डाल उनमें मिट्टी भर देनी चाहिए। अगर बिलों से मिट्टी बाहर निकलती है तो इसका मतलब दूसरे चूहे इस बिल में गए हैं। पीएयू ने चूहों पर काबू पाने को सस्ता टिकाऊ मिश्रण बनाने की ट्रेनिंग भी दी थी। इसमें गेहूं 1 किलो, सब्जी तेल 20 ग्राम, पाऊडर शूगर 20 ग्राम जिंक फॉस्फेट 25 ग्राम का मिश्रण कर 1000 बिलों के लिए पुड़ियां तैयार होती हैं। इस पर महज 30 रुपए लागत आती है। वहीं, 10 रुपए की एल्युमिनियम फास्फेट की एक टैबलेट से सिर्फ एक चूहा मरता है।

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