--Advertisement--

रेलवे अंग्रेजों की क्रैकर टेक्निक के है भरोसे, धुंध में पायलटों को करते हैं अलर्ट

आपके शहर में धुंध पड़े न पड़े, रेलवे अपने तरीके से तय करता है फॉग

Danik Bhaskar | Dec 20, 2017, 06:28 AM IST
पटरियों पर डेटोनेटर लगाता रेलवे मुलाजिम। पटरियों पर डेटोनेटर लगाता रेलवे मुलाजिम।

लुधियाना. धुंध में लोको पायलटों को अलर्ट करने के लिए रेलवे आज भी अंग्रेजों के जमाने की फायर क्रैकर टेक्नीक पर निर्भर है। सुरक्षित यात्रा के लिए भले ही छोटे-बड़े स्टेशनों पर फॉग सिग्नल डिवाइस लगा दिए गए हैं, लेकिन स्टेशन आने वाला है और स्टेशन पर ट्रेन कहां रोकनी है, इसके लिए आज भी पटरियों पर डेटोनेटर बांध कर पटाखा फोड़ा जाता है।

सर्दियों में हर साल एक स्टेशन पर लगभग 450 डेटोनेटर लगाए जाते हैं। बाकायदा इन डेटोनेटर्स का रिकाॅर्ड मेनटेन किया जाता है। स्टेशन अधिकारियों को डेली रिपोर्ट दी जाती है।

आपके शहर में धुंध पड़े न पड़े, रेलवे अपने तरीके से तय करता है फॉग

डीओएम (डिविजनल ऑपरेटिंग मैनेजर) अशोक सलारिया ने बताया कि हर रेलवे स्टेशन पर स्टेशन मास्टर अपने दफ्तर के पास पीले रंग का गोल निशान बनाता है और वहां से 180 मीटर की दूरी पर लगे होम सिंग्नल को देखता है। अगर होम सिग्नल दिखाई न दे तो स्टेशन मास्टर फॉग डिक्लेयर कर देता है। तभी से पटरियों पर डेटोनेटर लगाने का काम शुरू हो जाता है। होम सिग्नल से 270 मीटर की दूरी पर अप-डाउन की तरफ से मुलाजिमों के लिए अलग से पोस्ट बनाई जाती है और वहां से पटरियों पर 10-10 मीटर की दूरी पर दो डेटोनेटर लगा दिए जाते हैं, जैसे ही ट्रेन उन पर गुजरती है तो जोर से पटाखा बजता है। इससे ड्राइवर को अलर्ट मिल जाता है कि आगे स्टेशन आ रहा है। वह ट्रेन की रफ्तार को बिल्कुल धीमी कर लेता है। उसे स्टेशन के पास पहुंचते ही आगे का सिग्नल दिया जाता है। जबकि रेलवे मुलाजिम 40 मीटर दूर खड़ा रहता है।

ट्रेन के गुजर जाने पर दूसरा डेटोनेटर लगा देता है। इस काम में लगे मुलाजिमों की ड्यूटी 6-6 घंटे की रहती है। फॉग डिक्लेयर होने के बाद लोको पायलट्स को हिदायत जारी कर दी जाती है कि ट्रेन की स्पीड 60 से ज्यादा नहीं करनी है। इसके अलावा फिरोजपुर डिवीजन की तरफ से हर बड़े स्टेशन से छोटे स्टेशन के बीच एक इंटरमीडियट ब्लॉक सिग्नल बॉक्स (आईबीएस) लगाया गया है, जो स्टेशन से ट्रेन के छूटने के बाद उस ब्लॉक सिस्टम से आगे निकलते ही स्टेशन को सूचना मिल जाती है कि ट्रेन अगले स्टेशन के लिए निकल चुकी है। इसके बाद दूसरी ट्रेन को स्टेशन से छोड़ दिया जाता है। लुधियाना स्टेशन के अधीन आते लाडोवाल से पहले और ढोलेवाल पुल के नीचे आईबीएस सिस्टम लगाया गया है।