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दंगल मूवी की तरह इस पिता ने अपनी बेटियों को बनाया रेसलर, रिक्शा चलाकर की परवरिश

लगातार 3 बार स्टेट रेस्लिंग चैम्यपियन रहे पिता ने दंगल मूवी के महांवीर से भी ज्यादा स्ट्रगल कर किया अलर्ट।

Dainik Bhaskar

Jan 08, 2018, 02:57 AM IST
बेटियों के जीते मेडल दिखाता संजीत। बेटियों के जीते मेडल दिखाता संजीत।

पठानकोट. मेरी बेटियों के जीते मैडल मुझे अपने कंधों पर लगे स्टार की तरह लगते हैं। उनके जीते सर्टिफिकेट ही मेरी जायदाद है। मेरी बेटियां बेटों से कम हैं क्या। यह कहना है पठानकोट नगर निगम में बतौर आउटसोर्स सफाई सेवक संजीत कुमार का। आर्थिक तौर पर कमजोर संजीत ने दिन रात मेहनत कर तीनों बेटियों को नेशनल और स्टेट चैंपियन बनाया है। खुद लगातार 3 बार स्टेट रेस्लिंग चैंपियन रहे संजीत ने दंगल मूवी के महांवीर से भी ज्यादा स्ट्रगल कर मात्र 1700 की सैलरी में 2 बेटियों को रेस्लिंग में स्टेट चैंपियन और सबसे बड़ी बेटी को ताइक्वांडो की नेशनल लेवल प्लेयर बना दिया है। पंजाब पुलिस की टीम में भी खेली...

- तीनों बेटियां हिना, नेहा और रविका जालंधर के एचएमवी कॉलेज में ग्रेजुएशन कर रही हैं। साथ ही ताइक्वांडो व रेस्लिंग की ट्रेनिंग भी ले रही हैं।

- हिना और नेहा फर्स्ट ईयर और रविका प्लस टू की छात्रा है। नेहा ने 48 किलोग्राम वेट और रविका ने 42 किलोग्राम वेट में इंदौर में हुई वूमेन रेस्लिंग स्टेट चैंपियनशिप जीती है।

- वहीं, सबसे बड़ी हिना बैंगलोर और श्रीनगर के नेशनल इवेंट्स में पंजाब पुलिस की टीम से खेली और ब्रांज जीतकर लौटी है।

- अब वे एक फरवरी से लुधियाना में हो रही इंटर कालेज चैंपियनशिप में हिस्सा लेंगी।

बेटियों के मेडल मेरे कंधों के स्टार, उनके सर्टिफिकेट मेरी जायदाद

- 1974 में जन्मे संजीत का सपना 1990 में पहली बार स्टेट रेस्लिंग चैंपियनशिप जीत पूरा होता दिखा।

- 1991 और 1992 में लगातार गोल्ड जीता और नेशनल में सलेक्शन होते ही पिता की बीमारी की वजह से मौत हो गई। उसके बाद पढ़ाई छूटी और रेस्लिंग में देश के लिए मेडल लाने का सपना भी चूर हो गया।

- 1994 में शादी हुई और 1997 में पहली बेटी हिना का जन्म, उसके बाद 1999 में नेहा और 2001 में रविका ने जन्म लिया। तभी ठान लिया कि बेटियों को बेटों से भी काबिल बनाना है।

- प्रैक्टिस के लिए उन्हें सुबह तड़के उठाना, दौड़ लगवानी, कसरत करवाई। बेटियों की डाइट, कॉस्टयूम, कंपीटिशन के लिए दूर जाने के किराये समेत अन्य खर्चों को पूरा करने के लिए दिन में होटलों में सफाई और रात को रिक्शा चलाया, तब कहीं जाकर गुजारा होता था।

रिश्तेदार और लोगों के तानों की नहीं की परवाह

- संजीत ने बताया कि दोनों बेटियों को जब रेस्लिंग में डाला और बेटियों ने कॉस्टयूम डाली तो लोगों ने भद्दे कमेंट किए। बेटियां प्रैक्टिस करने के लिए जाती थीं, तो रिश्तेदारों ने ताने देने शुरू कर दिए, लेकिन उन्होंने बेटियों को चैंयिपन बनाने के लिए पीछे मुड़कर नहीं देखा।

- आखिर बेटियों ने मेहनत और लग्न से उपलब्धियां हासिल कीं। मुझे अपनी बेटियों पर गर्व है। हिना, नेहा और रविका का कहना है कि पिता के सपनों का साकार करना ही उनका लक्ष्य है।

आगे की स्लाइड्स में देखें फोटोज...

1974 में जन्मे संजीत का सपना 1990 में पहली बार स्टेट रेस्लिंग चैंपियनशिप जीत पूरा होता दिखा। 1974 में जन्मे संजीत का सपना 1990 में पहली बार स्टेट रेस्लिंग चैंपियनशिप जीत पूरा होता दिखा।
संजीत की तीनों बेटियां। संजीत की तीनों बेटियां।
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बेटियों के जीते मेडल दिखाता संजीत।बेटियों के जीते मेडल दिखाता संजीत।
1974 में जन्मे संजीत का सपना 1990 में पहली बार स्टेट रेस्लिंग चैंपियनशिप जीत पूरा होता दिखा।1974 में जन्मे संजीत का सपना 1990 में पहली बार स्टेट रेस्लिंग चैंपियनशिप जीत पूरा होता दिखा।
संजीत की तीनों बेटियां।संजीत की तीनों बेटियां।
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