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आर्थिक तंगी में गुड़ बनाना शुरू किया, अब विदेश में भी डिमांड

शुगर मिलों में गन्ने की पेमेंट जल्द न होने के कारण उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा।

Dainik Bhaskar

Jan 29, 2018, 05:54 AM IST
Started making jaggery in financial crunch

नवांशहर. गांव खानपुर कुल्लापुर के रहने वाले किसान हरमेश सिंह एक समय आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। पांच साल पहले वह अपने खेतों में सिर्फ खेती ही करते थे। शुगर मिलों में गन्ने की पेमेंट जल्द न होने के कारण उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा।


हरमेश सिंह बताते हैं कि फिर उन्हें किसी ने सलाह दी कि वह अपने ही खेतों के गन्नों का गुड़ बनाकर बेचने का कारोबार करें। उन्होंने सलाह पर काम शुरू किया। शुरू-शुरू में पैसे की कमी कारण उन्हें गुड़ तैयार करने में काफी दिक्कतें आई लेकिन उनके दोस्तों ने पैसे इकट्ठे कर उनकी आर्थिक मदद की। खूब मेहनत की, काम चल पड़ा। अब हरमेश सिंह के साथ तीन कारीगर गुड़ बनाने का काम करते है। किसान हरमेश सिंह ने बताया कि उनके गुड़ की डिमांड बढ़ी और दूर-दूर से लोग उसके घर गुड़ खरीदने के लिए पहुंचने लगे। लोगों को गुड़ की क्वालिटी अच्छी लगी। जिन लोगों के रिश्तेदार विदेश में रहते हैं, उन्हें विदेश में गुड़ भेजना शुरू कर दिया। अब उसके गुड़ का टेस्ट विदेशी गोरे भी ले रहे है।

हरमेश सिंह ने बताया कि लोग अब भी अपने रिश्तेदारों को विदेश में गुड़ भेजने के लिए उनके घर आते हैं। इसके अलावा वह लोकल मंडी में भी अपना गुड़ बेचते है। हरमेश सिंह बताते हैं कि अब विदेशी कारोबारी उनसे जुड़ने के लिए और गुड़ का धंधा करने के लिए संपर्क कर रहे हैं। वह गुड़ बनाने के लिए अपने खेतों के गन्ने के अलावा आसपास के किसानों का गन्ना भी खरीदते हैं।
किसान हरमेश सिंह बताते हैं कि उनका गुड़ यूरोप के देश इंग्लैंड, फ्रांस, यूक्रेन, जर्मनी, इटली और अरब में दुबई, सउदी जैसे देशों में रहते अप्रवासी भारतीयों के बीच उनके गुड़ की काफी वैल्यू है। वे यहां पर रहते अपने जानकारों के जरिए उनका गुड़ वहां पर मंगवाते हैं। नवंबर से लेकर अप्रैल तक उनके गुड़ की काफी डिमांड रहती है।

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