Hindi News »Punjab »Ludhiana» Two Brothers Missed Studies Due To Tightness

तंगी के चलते दो भाइयों की पढ़ाई छूटी, बीमार माता-पिता का इलाज बंद, खाने को मोहताज

सूफियां चौक फैक्टरी हादसे को एक महीना।

Rajdeep Saini | Last Modified - Dec 20, 2017, 06:20 AM IST

  • तंगी के चलते दो भाइयों की पढ़ाई छूटी, बीमार माता-पिता का इलाज बंद, खाने को मोहताज
    +1और स्लाइड देखें
    बाईं टांग का फिर होना है ऑपरेशन, हादसे में रोहित की फैक्टरी ढही थी।

    लुधियाना. सूफियां चौक के पास भीषण अग्निकांड में प्लास्टिक फैक्टरी जमींदोज हुए एक महीना बीत गया है। इस हादसे में फायरकर्मियों समेत 13 लोगों की मौत हुई, जबकि तीन की लाशें तक नहीं मिलीं। प्रशासन ने जांच कर कार्रवाई और पीड़ितों की मदद के दावे किए थे, पर अब तक ठोस कुछ भी नहीं हुआ। मलबे से सिर्फ दो युवक ही बचाए जा सके थे। सीएमसी में भर्ती रोहित-सुनील व उनके परिजनों का भास्कर ने दर्द जाना। पढ़िए रिपोर्ट...

    असीं सब बेच के चलाई सी फैक्टरी, हादसे च ओह वी ढह गई। हुण घर आटा वी नईं, गुरुद्वारे दे लंगर भरोसे ही हां। ये दर्द है एक तड़पती मां सुमन कपूर का, जिनका 22 साल का बेटा रोहित इस हादसे में मलबे में दब गया था। पास वाली रिक्शा फैक्टरी के मालिक सुरिंदर कपूर का बेटा रोहित भी राहत-बचाव में जुटा था। दोनों टांगें, एक बाजू टूट गई व कई जगह अंदरुनी चोटें आईं। बाईं टांग का एक माह बाद फिर ऑपरेशन होना है। रोहित को अब वॉर्ड में शिफ्ट किया जा चुका है। प्रशासन ने इलाज का खर्च उठाने की घोषणा की, लेकिन उससे पहले परिवार काफी पैसा खर्च कर चुका था। मंगलवार को जब भास्कर संवाददाता हॉस्पिटल पहुंचा तो रोहित को लगा शायद कोई मदद के लिए आया है। कराहते हुए बोला- मम्मी-डैडी को शूगर है। प्लीज हमारी मदद करा दें। इतने में आंखों से आंसू बह निकले। मां, छोटा भाई सोनू उसे हौसला बंधाने लगे। मां ने बताया कि घर के गहने बेच बेटों के लिए फैक्टरी लगाई थी।

    पैसे न खत्म होने के चलते हम पति-पत्नी ने अपना इलाज बंद कर दिया। 12वीं में पढ़ रहे दोनों छोटे बेटों की पढ़ाई छूट गई। 50 वर्षीय पति बेटे के इलाज व घर के राशन के जुगाड़ में भटकते फिरते हैं। इंतजाम न होने पर लंगर लाने लगे। छोटे बेटे भी काम तलाश रहे हैं। 15 दिनों तक कर्ज लेकर बेटे का इलाज कराना पड़ा। दो बार पुलिस मुलाजिम आए और हाल जानकर चले गए।

  • तंगी के चलते दो भाइयों की पढ़ाई छूटी, बीमार माता-पिता का इलाज बंद, खाने को मोहताज
    +1और स्लाइड देखें
    ्लास्टिक फैक्टरी का कर्मी है सुनील, अब भी सही से बोल नहीं पा रहा।

    जिंदा निकाले गए प्लास्टिक फैक्टरी में ड्राइवरी करने वाले सुनील की अब भी हालात गंभीर बनी हुई है। सीएमसी अस्पताल के प्राइवेट वॉर्ड में दाखिल सुनील की एक किडनी खराब हो चुकी है। वह चलने-फिरने से लाचार है ही, केमिकल मुंह में जाने से छाती से लेकर गले तक जख्म हो गए। उस पर हादसे की दहशत अभी तक हावी है। बेड पर लेटा सुनील कई बार अचानक जोर-जोर चीखने लगता है तो उसकी मां राजरानी आंचल में छिपाकर चुप कराती है। घर पर गर्भवती पत्नी अलग तड़पती रहती है।

    सुनील ज्यादातर वक्त नीम-बेहोशी में रहता है। बेटे के जल्द ठीक होने की उम्मीद में बैठी मां खुद पल्लू में मुंह दबाकर चुपके-चुपके रोती है, ताकि जीने की चाहत लिए बेटे का हौसला न टूट जाए। उसके परिवार की आर्थिक हालत भी खराब हो चुकी है। राजरानी रोते हुए बताती हैं कि फैक्टरी मालिक और सरकार से खास मदद नहीं मिली। सुनील की 12 बार डायलसिस हो चुकी है। हादसे के वक्त जब वह मलबे में दबा था तो उसके मुंह में केमिकल और धुंआ जाने से छाती और गले में जख्म हो चुके हैं। जिस वजह से वह इतने दिन बाद भी सही से बोल भी नहीं पाता है। मुंह पर लगातार सूजन बढ़ रही है। दोनों टांगों में फ्रैक्चर हैं, जिनके एक-एक ऑपरेशन हो चुके हैं।

आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Ludhiana News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: Two Brothers Missed Studies Due To Tightness
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Ludhiana

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×