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पिता की मौत के बाद दो बहनों ने खुद को कर रखा था घर में कैद, थीं दिमागी परेशान

Legal Services to the Mentally Ill and Mentally Disabled Persons) Scheme के तहत कराया रिहा।

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 06:17 AM IST
दोनों बहनें मनदीप कौर, 34 साल और हरप्रीत कौर उम्र 28 साल दोनों बहनें मनदीप कौर, 34 साल और हरप्रीत कौर उम्र 28 साल

बठिंडा. पिता की मौत के बाद मानसिक तौर पर परेशान दो बहनों ने खुद को घर में ही कैद कर रखा था। जिला सेशन जज परमजीत सिंह की अगुवाई में बनाई गई जिला पुलिस प्रशासन की टीम ने दोनों को घर से आजाद करवा उन्हें एक नई जिंदगी देने का प्रयास किया है। जिला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी ने अब दोनों बहनों की संभाल करने तथा उनके परिवार की संपत्ति की सुरक्षा करने का बीड़ा उठाया है।

गुरतेज ने दी थी कंप्लेंट
28 फरवरी को रिटायर्ड बैंक मैनेजर गुरतेज सिंह निवासी जुझार सिंह नगर, गली नं 3, ने एक शिकायत जिला कानूनी सेवाएं अथार्टी सचिव को दी। इसमें उन्होंने बताया कि निरंजन सिंह जो कि मार्केट कमेटी संगत मंडी से सेवामुक्त थे की मौत के बाद उनकी लड़कियाें मनदीप कौर, 34 साल और हरप्रीत कौर उम्र 28 साल दिमागी तौर पर परेशान/ मरीज हैं। ने खुद को घर में कैद किया हुआ है।

जिला सेशन जज के निर्देश पर गठित हुई विशेष टीम
पंजाब स्टेट कानूनी सेवाएं अथार्टी मोहाली और जिला सेशन जज परमजीत सिंह के निर्देशानुसार एक डॉक्टरी टीम सिविल सर्जन के दफ्तर की तरफ से बनाई गई। इसमें डाॅ. अरुण बांसल और डाॅ. प्रगति कालड़ा, मनोरोगी माहिर शामिल थे। इसी तरह सुरिंदरपाल सिंह, एसपी (एच.) हेड क्वार्टर की एक टीम गठित की गई। एक मार्च को सुबह जिला और सेशन जज परमजीत सिंह, डाॅ. मनदीप मित्तल, सीजेएम /सचिव,जिला कानूनी सेवाएं अथारिटी, बठिंडा और उनके साथ जो टीमें बनाईं गई हैं उक्त लड़कियों के घर पहुंचे। उनमें से छोटी लड़की अफसरों को देखकर घबरा गई और भड़क गई।

जिला और सेशन जज और टीम मेंबरों ने उनको समझाया और विश्वास दिलाया कि वह डरें नहीं, उनका इलाज करवाने के लिए आए हैं। अथारिटी उनका इलाज करवाएगी और उनकी संपत्ति की देखभाल की जाएगी कि कोई संपत्ति का गलत इस्तेमाल न कर सके।

बंधक बनी दो बहनों को रिहा कराया

अथॉर्टी नालसा की अलग अलग स्कीमों के अंतर्गत लोगों की भलाई के लिए काम कर रही है। इनमें से एक स्कीम दिमागी तौर पर परेशान व्यक्तियों के लिए भी बनाई हुई है। जिसको Legal Services to the Mentally Ill and Mentally Disabled Persons) Scheme, 2015 कहा जाता है। इसी योजना के तहत ऐसे लोगों की पहचान कर उनकी मदद की जाती है।