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जेटली के करीबी श्वेत मलिक पंजाब भाजपा के नए प्रधान

भास्कर न्यूज | चंडीगढ़/अमृतसर/जालंधर/ नई दिल्ली केंद्रीय मंत्री और पंजाब भाजपा के प्रधान विजय सांपला को तीन साल...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 04:05 AM IST

जेटली के करीबी श्वेत मलिक पंजाब भाजपा के नए प्रधान
भास्कर न्यूज | चंडीगढ़/अमृतसर/जालंधर/ नई दिल्ली

केंद्रीय मंत्री और पंजाब भाजपा के प्रधान विजय सांपला को तीन साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही ओहदे से हटा दिया गया है। हाईकमान ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के करीबी राज्यसभा सांसद श्वेत मलिक को सूबे का नया प्रधान बनाया है। वह आरएसएस के भरोसेमंद माने जाते हैं। पद की दौड़ में राष्ट्रीय सचिव तरुण चुघ और पूर्व मंत्री मनोरंजन कालिया का नाम भी शामिल था। खत्री समुदाय से संबंध रखने वाले मलिक 2007 से 2012 तक अमृतसर के मेयर भी रहे हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी कैंडिडेट रहे जेटली से नजदीकी बढ़ी थी। मलिक को प्रधान बनाने की घोषणा शनिवार को भाजपा प्रधान अमित शाह ने दिल्ली में की।

तीन माह पहले ही हो गई थी हटाने की तैयारी पढ़ें | पेज 7

आरएसएस से जुड़ा रहा है मलिक का परिवार

श्वेत मलिक

वक्त से पहले पद से हटाने की वजहें...

सांपला के प्रधान बनने के बाद विस चुनाव में भाजपा ने शिअद के साथ मिलकर 23 सीटों पर चुनाव लड़ा था, सिर्फ 3 उम्मीदवार ही जीते थे।

भास्कर ने 27 मार्च को बताया था

श्वेत मलिक के पिता दिवंगत रजिंदर मलिक आरएसएस के प्रचारक रहे हैं। मलिक 1994-1999 तक जिला भाजपा युवा मोर्चा के प्रधान, 1999 से 2002 तक राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे। इसके बाद 2016 में उन्हें प्रदेश भाजपा प्रवक्ता, लुधियाना जिला प्रभारी और प्रेसिडेंशियल इलेक्शन आॅफ इंडिया फाॅर पंजाब की भी जिम्मेदारी दी गई थी। 2012 के निगम चुनाव में वह मेयर रहते हुए पार्षद का चुनाव हार गए थे।

सांपला पार्टी में गुटबाजी को भी नहीं रोक पाए। पार्टी सूत्र बताते हैं कि उनके खिलाफ बदले की भावना से काम करने की शिकायतें भी मिल रही थीं।

मेरे पास काफी जिम्मेदारियां थीं, जिन्हें साथ-साथ निभाना मुश्किल था। मुझे एक साल के लिए प्रधान बनाने की बात हुई थी। पद छोड़ने के लिए मैं पहले ही कह चुका था। अब पूरी तरह अपने हलके पर फोकस करूंगा। -विजय सांपला, सांसद

सांपला को एक साल पहले हटाया

सांपला के आने के बाद भी उम्मीद मुताबिक दलितों में पार्टी का आधार नहीं बढ़ पाया। दलितों को लेकर स्थिति जस की तस है।

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