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जिले में 2788 जगह जली पराली, पर्चा एक पर भी नहीं, नतीजा सांस लेना भी मुश्किल

अगर खेतों में पराली जलाते हैं तो उनका चालान ही काटा जाए, उन पर एफआईआर दर्ज नहीं होगी।

bhaskar news | Last Modified - Nov 11, 2017, 05:18 AM IST

  • जिले में 2788 जगह जली पराली, पर्चा एक पर भी नहीं, नतीजा सांस लेना भी मुश्किल
    लुधियाना. धान की कटाई के बाद खेतों में पराली जलाने का सिलसिला जारी है। पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने जिले में किसानों द्वारा 2788 खेतों में आग लगाए जाने की घटनाएं पाई हैं। पीपीसीबी ने 170 किसानों का चालान काट कर 4.80 लाख रुपए जुर्माना किया है, लेकिन अभी तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। ये इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि मुख्यमंत्री की तरफ से कुछ दिन पहले बयान जारी किया गया था कि किसान अगर खेतों में पराली जलाते हैं तो उनका चालान ही काटा जाए, उन पर एफआईआर दर्ज नहीं होगी।
    इसकी वजह से जहां सुबह और शाम को धुंध में पराली का धुआं मिक्स होने से विजिबिलिटी 200 मीटर रह गई है।
    एयर क्वालिटी इंडेक्स 100 की जगह 335 पहुंचने से लोगों में स्वास्थ संबंधी प्रॉब्लम बढ़ी हैं। जिसके चलते अस्पतालों में अस्थमा के 20 से 25 और आंखों के करीब 15 मरीज रोजाना रहे हैं। पीएयू मौसम विशेषज्ञ केके गिल के मुताबिक 13 नवंबर के बाद बारिश हो सकती है और तभी मौसम पूरी तरह साफ हो पाएगा। फिलहाल आगामी 24 घंटों के दौरान सुबह और शाम धुंध पड़ेगी।
    नासा की ओर से 9 नवंबर को सेटेलाइट के जरिए जारी फोटो में चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, यूपी और राजस्थान के लगते कुछ हिस्सों में पराली जलाने से पैदा हुए प्रदूषण से बनी स्मॉग की लेयर साफ दिखाई गई है। इसके साथ ही जहां-जहां पराली में आग लगाई है उसको भी दर्शाया गया है। अगर पूरे पंजाब की बात करें तो 40139 खेतों में आग लगाई गई है, इनमें से पीपीसीबी की तरफ से 2351 किसानों के चालान काटे गए हैं और 58 लाख से ज्यादा का जुर्माना किया गया है। जबकि 2016 में पराली जलाने की घटना 66969 खेतों में हुई थी। उधर, एडीसी इकबाल सिंह संधू पराली जाने के मुद्दे पर कहते हैं कि किसानों का सिर्फ चालान काटा गया है। चालान की रिपोर्ट पीपीसीबी को सौंप दी जाती है, उन्होंने ही आगे की कार्रवाई करवानी होती है। वहीं पीपीसीबी के चेयरमैन काहन सिंह पन्नू ने कहा कि हमारा काम सिर्फ चालान काटना है, एफआईआर के लिए डीसी ऑफिस ने देखना होता है।
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