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इनविटेशन देने पर भी मंत्री और तीनों कांग्रेसी MLA नहीं आए, बिन बुलाए पहुंचे ‘आप’ विधायक

लाला जी के जन्म दिवस पर जनवरी में और बलिदान दिवस पर नवंबर में यहां जरूर आते रहे हैं।

BhaskarNews | Last Modified - Nov 18, 2017, 04:12 AM IST

  • इनविटेशन देने पर भी मंत्री और तीनों कांग्रेसी MLA नहीं आए, बिन बुलाए पहुंचे ‘आप’ विधायक

    मोगा.आजादी के बाद कांग्रेस नेतृत्व की सभी सरकारों के प्रतिनिधी मोगा जिले के ऐतिहासिक गांव ढूडीके में पंजाब केसरी लाला लाजपत राय के ननिहाल में बने उनके जन्म स्थल पर वर्ष में दो बार आना अपना कर्त्तव्य समझते रहे हैं। चाहे केंद्र सरकार के प्रतिनिधी रहे हो या राज्य सरकार के, वह लाला जी के जन्म दिवस पर जनवरी में और बलिदान दिवस पर नवंबर में यहां जरूर आते रहे हैं।

    इस बार शुक्रवार को अमर शहीद लाला लाजपत राय के 89वें बलिदान दिवस पर विडंबना यह रही कि मुख्यमंत्री के प्रतिनिधी के तौर पर खजाना मंत्री को आना था, वह तो नहीं आए परंतु मोगा जिले की4 विधान सभा सीटों से 3 में जीते कांग्रेसी विधायक भी नहीं पहुंचे। उनकी अनुपस्थिति में प्रशासनिक अधिकारियों ने आना भी गवारा नहीं समझा। निमंत्रण कार्ड में कैबिनेट मंत्री मनप्रीत बादल, मोगा से विधायक डाॅ. हरजोत कमल, बाघापुराना से विधायक दर्शन सिंह बराड़, धर्मकोट के विधायक सुखजीत सिंह काका लोहगढ़, पूर्व विधायक हलका इंचार्ज बीबी राजविंदर कौर भागीके के नाम अंकित थे परंतु इनमें कोई नहीं पहुंचा था। इस दौरान इस गांव निवासी तथा कांग्रेस के स्टेट बाडी सचिव सतनाम सिंह संदेशी गांव निवासी 1 घंटा इंतजार करते रहे। इसके बाद पूर्व राज्य मंत्री कांग्रेस नेत्री डाॅ. मालती थापर डाॅ. पवन थापर वहां पहुंचे। इस दौरान हलका निहाल सिंह वाला के आम आदमी पार्टी के विधायक मनजीत सिंह बिलासपुर वहां पहुंचे और लाला जी को श्रद्धा सुमन भेंट किए।

    यह भी रहे उपस्थित
    इससमय जिला शिक्षा अधिकारी गुदर्शन सिंह बराड़, एसएमओ ढूडीके डाॅ. शिंगारा सिंह, मैनेजर बलदेव सिंह, केवल सिंह, प्रमजीत सिंह घाली, गुरदीप सिंह, जगमोहण सिंह गिल, प्यारा सिंह गिल, रुप सिंह ढूडीके आदि उपस्थित थे।

    गांव ढूडी के में है लाला जी का ननिहाल
    लाला लाजपत राय का मोगा जिला के गांव ढूडीके में ननिहाल होने के चलते आजादी के बाद कांग्रेस की ओर से यहां पर उनकी याद में जन्म स्थल कमेटी का गठन किया गया। इसके बाद 25 से 28 जनवरी तक प्रत्येक वर्ष उनके जन्म दिवस पर गांव में खेल मेले का आयोजन किया जाता है। 17 नवंबर को उनका बलिदान दिवस मनाया जाता है और साल में दो बार उनकी याद में होने वाले समागम में कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री आते रहे हैं। 1950 में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जनवरी में होने वाले समागम में उपस्थित हुए थे, जबकि आजादी के बाद प्रधानमंत्री बनने से पहले 1948 में लाल बहादुर शास्त्री यहां आए थे।

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