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सूफियां चौक फैक्टरी हादसा- 13 मौतों के बाद अब फैक्टरी का पोस्टमार्टम

डिवीजनल कमिश्नर ने इस फैक्टरी को बनाने और इसके बाद चलाने की मंजूरी संबंधी पूरी रिपोर्ट सभी महकमों से मांगी है।

Danik Bhaskar | Nov 23, 2017, 06:35 AM IST

लुधियाना. सूफियां चौक के नजदीक इंडस्ट्री एरिया-ए में जमींदोज हुई पांच मंजिला बिल्डिंग के नीचे दबकर गई कीमती जानों पर सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के संज्ञान लेते ही डिवीजनल कमिश्नर पटियाला वीके मीना ने जांच का पूरा जिम्मा संभाल लिया है। बुधवार को इंडस्ट्रियल साइट का जायजा लेने के बाद मीना ने विभागीय अफसरों से मीटिंग कर वीरवार तक मामले की रिपोर्ट पेश करने को कहा है। डिवीजनल कमिश्नर ने इस फैक्टरी को बनाने और इसके बाद चलाने की मंजूरी संबंधी पूरी रिपोर्ट सभी महकमों से मांगी है। महकमों के अफसरों को ये साफ कर दिया है, जब से उक्त यूनिट का ब्यौरा उनके पास है, वो पूरी डिटेल सबमिट की जाए। उन्होंने कहा कि इसमें जिस भी महकमे की लापरवाहियां सामने आएंगे, उनकी रिपोर्ट सीएम को सौंपी जाएगी।

इस रिपोर्ट का पूरा खाका तैयार करने को चार अफसरों को जिम्मा सौंपा गया है। जिनमें एडीसी जनरल सुरभि मलिक, एडिशनल कमिश्नर विशेष सारंगल, पीपीसीबी के चीफ इंजीनियर प्रदीप कुमार और पुलिस से एडीसीपी रत्न सिंह बराड़ को जिम्मा सौंपा गया है। वहीं घटना के 60 घंटे बाद तक करीब आधा मलबा ही हटाया जा सका था। अभी भी मलबे में दबे तीन फायर मुलाजिमों का कोई पता नहीं चल सका है।

एक्सप्लोसिव लाइसेंस का अभी भी कोई जिक्र नहीं
अमरसन पॉलिमर्स में रखे हजारों लीटर कैमिकल की वजह से 60 घंटे बाद भी आग पूरी तरह से नहीं बुझी है। इसके बावजूद फैक्टरी के पास एक्सप्लोसिव लाइसेंेंस का अभी तक कोई जिक्र नहीं हो रहा है। इस बारे में डिप्टी कमिश्नर प्रदीप अग्रवाल ने कहा कि उक्त इंडस्ट्री में कौन-कौन सा कैमिकल इस्तेमाल में लाया जा रहा था, इसके लिए टीमें बनाकर अमरसन पॉलीमर्स से मिलती जुलती इंडस्ट्री का मुआयना करवाया जाएगा।

इंडस्ट्रियलएरिया में प्लाट नंबर 161 पर बनी प्लास्टिक फैक्टरी के दो फ्लोर 1974-75 में गारे की चिनाई से बने थे। 2005 के बाद निगम अफसरों की मेहरबानी से एक के ऊपर एक तीन फ्लोर और खड़े कर दिए गए। धमाके के साथ ढही बिल्डिंग में हादसे का यह भी एक अहम कारण माना जा रहा है। एक्सपर्ट के मुताबिक आग से इतनी हीट पैदा हुई कि गारे की नींव बैठ गई। यही नहीं, निगम के हाउस टैक्स रिकार्ड में ये 2007-08 में यूनिवर्सल डाइंग कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड है। दो फ्लोर में कच्चे शैड दिखा कर हाउसटैक्स का बिल बनाया गया था। विभागीय अफसरों ने कोताही बरती। बिना विजिट ऑिफस में बैठकर साइट रिपोर्ट बनती रहीं और एनओसी मिलती रहीं।

बिल्डिंग बॉयलाज के तहत नहीं पास हो सकता था नक्शा
इंडस्ट्री एरिया का हिस्सा नगर निगम बी जोन में आता है। ऐसे में इस बिल्डिंग की साइट विजिट, कंस्ट्रक्शन और स्ट्रक्चर रिपोर्ट का पूरा जिम्मा बी जोन की बिल्डिंग ब्रांच का था। 2005 से लेकर अब तक इस जोन में एटीपी का चार्ज मोनिका आनंद, तेजप्रीत सिंह, कमलजीत कौर, हरप्रीत घई, निर्मल सिंह भूपिंदर सिंह और मौजूदा एटीपी हरविंदर सिंह हनी के पास रहा है।

बिल्डिंग बॉयलाज में गारे की चिनाई वाले स्ट्रक्चर पर बिल्डिंग बनाने का नक्शा मंजूर नहीं हो सकता। मंजूरी के लिए पुराने स्ट्रक्चर को गिराना चाहिए था। असुरक्षित स्ट्रक्चर पर जब मंजिलें खड़ी होने लगीं तो निगम आंखें बंद किए रहा, जबकि लोगों ने शिकायत की थी। तीन मंजिलें 2006 के बाद तैयार की गईं और अब निगम इसका कोई रिकार्ड नहीं जुटा पा रहा है।

एनओसी के लिए छिपाई गई सही जानकारी
डायरेक्टर आफ फैक्ट्रीज के पैनल आर्किटेक्ट रजनीश कुमार सिंगला ने ही जनवरी, 2016 में बिल्डिंग मालिक इंद्रजीत सिंह गोला की ओर से इस पांच मंजिला बिल्डिंग को दो मंजिला प्लान बनाकर पीपीसीबी में एन�ओसी के लिए आवेदन किया था। साफ है कि ऊपर की तीन मंजिलों की जानकारी छिपाई गई। इन मंजिलों में कौन-कौन सा काम हो रहा था, कितने कर्मचारी काम कर रहे थे। बिजली का लोड कितना था, इन सब की भी सही जानकारी नहीं दी गई।