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5 घंटे ‘गैस चैंबर’ बना रहा लुधियाना, शहर में बने दम घुटने जैसे हालात

प्रदूषण को लेकर अफरा-तफरी का ऐसा माहौल पहली बार बना था। दरअसल, सुबह मौसम साफ था।

Dainik Bhaskar

Nov 15, 2017, 05:21 AM IST
Things like suffocation in the city
लुधियाना. शहर में मंगलवार दोपहर बाद दम घुटने (‘गैस चैंबर’) जैसे हालात बन गए। तकरीबन तीन बजे अचानक पूरा लुधियाना जहरीले स्मॉग से ढक गया। एक समय पर तो शहर में पॉल्यूशन का स्तर दिल्ली से भी ज्यादा हो गया था। शाम 6.45 बजे तक इमरजेंसी की स्थिति बनी रही। घबराए लोग बाजारों-दफ्तरों से घर भागने लगे। प्रदूषण को लेकर अफरा-तफरी का ऐसा माहौल पहली बार बना था। दरअसल, सुबह मौसम साफ था।
स्मॉग. सुबह मौसम साफ था, हवा की स्पीड 20 किमी. के करीब थी। धुंध छंट चुकी थी, लेकिन दोपहर बाद अचानक जहरीले धुएं से ढका शहर।
वजह. मौसम के एकाएक यू-टर्न लेने से हवा की दिशा बदली तो नजदीकी गांवों के खेतों में जलाई जा रही पराली का धुआं शहर में फैला।
असर. घुटन, आंखों में जलन, घबराए लोग बाजारों-दफ्तरों से घर भागने लगे, फैक्ट्रियां, ट्यूशन, कोचिंग संस्थान बंद, बच्चे खेलने व लोग सैर को नहीं निकले, हार्ट-अस्थमा-एलर्जी, घबराहट व सांस की परेशानी।
राहत. शुक्र है, रात 10 बजे के बाद बूंदाबांदी, स्मॉग छंटा। आज मौसम साफ रहने के आसार।
20 की स्पीड से हवा चल रही थी। धुंध छंट चुकी थी, लेकिन दोपहर बाद हालात बिगड़ गए। क्योंकि हवा की दिशा बदलने से पराली का धुआं शहर पर छा गया। दोपहर तक हवा साउथ-ईस्ट की आेर बह रही थी। फिर नार्थ-वेस्ट से चलने लगी। जब स्मॉग पूरी तरह छा गया तो हवा भी धीमी हो गई थी, इसलिए लगभग 5 घंटे तक शहर में खतरनाक स्थिति बनी रही। मंगलवार को बारिश होने की संभावनाओं के चलते किसानों ने बड़े पैमाने पर पराली जलाई। पीपीसीबी के एक्सईएन जीएस गिल के मुताबिक पंजाब में किसानों ने मंगलवार शाम चार बजे तक ही 872 जगहों पर पराली जलाई, जबकि जिले में 99 जगहों पर पराली जलीं।
वहीं, रात 8 बजे के बाद हवा ने फिर गति पकड़ी तो स्मॉग छंटने लगा। रात 10 बजे तक मौसम साफ हो गया था। रात 10 बजे तक पॉल्यूशन दोपहर 2 बजे के लेवल पर आ गया था। बुधवार को भी स्मॉग से राहत के आसार हैं। पीएयू मौसम विशेषज्ञ केके गिल ने बताया कि दो दिनों में हल्की बारिश हो सकती है।
पॉल्यूशन बोर्ड फील्ड में चेकिंग करे: डीसी
^हवा से अचानक सारा स्मॉग यहां आ गया। सभी महकमों को अलर्ट किया गया है। नगर निगम और मंडी बोर्ड अपने टैंकरों से पेड़ों-सड़कों पर पानी छिड़काव करें। स्प्रिंकलर चलाएं ताकि स्मॉग का असर कम हो सके। पॉल्यूशन बोर्ड को फील्ड में पराली जलाने की चेकिंग करनी चाहिए। हमने जिले में पराली जलाने से रोकने की कोशिश की है, लेकिन इस बार छोटे जिलों में ज्यादा मामले सामने आए हैं। -प्रदीप अग्रवाल, डीसी
कार्रवाई का जिम्मा डीसी पर: चेयरमैन
^15 दिनों बाद हवा चली, धूप निकलने से किसानों ने पराली जला दी। इस कारण 4 बजे के बाद अचानक जालंधर, लुधियाना और मानसा में भयानक स्थिति बन गई। ‘जब बंदा नहीं रुक दा, ते कुदरत वी अपने हाथ दिखांदी है। पराली जलाने से रोकने के लिए एफआईआर-कार्रवाई का जिम्मा डीसी का है। - काहन सिंह पन्नू, चेयरमैन, पीपीसीबी
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