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छह दिन बाद रेस्क्यू लगभग पूरा, तीन फायरकर्मियों के फैमिली की टूटी आस

कुल 13 शव निकाले जा चुके हैं, जबकि तीन लोग जिंदा बचा लिए गए थे।

Dainik Bhaskar

Nov 26, 2017, 04:09 AM IST
Three firearms familys broken assault

लुधियाना. सूफियां चौक फैक्टरी हादसे के 6 दिन बाद शनिवार देर रात रेस्क्यू ऑपरेशन करीब-करीब पूरा कर लिया गया। जिला प्रशासन रविवार को इसकी औपचारिक घोषणा कर सकता है। लापता तीन फायर कर्मियों मनोहर लाल, सुखदेव और मनप्रीत सिंह समेत किसी व्यक्ति का सुराग नहीं लग पाया। इसी के साथ मौके पर रात-दिन डटे इनके परिजनों की उम्मीदें टूट गईं। इस दर्दनाक हादसे में अब तक कुल 13 शव निकाले जा चुके हैं, जबकि तीन लोग जिंदा बचा लिए गए थे।

अमरसन पॉलीमर्स में सोमवार सुबह आग लगी थी, फिर दोपहर में ब्लास्ट होने से फैक्ट्री ढह गई थी। राहत-बचाव में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना व पुलिस के जवान लगाए गए थे। केमिकल की वजह से मलबे में लगातार आग भड़कती रहने से रेस्क्यू ऑपरेशन प्रभावित रहा। गौर हो कि गुड़मंडी की पटाखा मार्केट में आगजनी के घटना के बाद लुधियाना का यह दूसरा बड़ा हादसा था।

निगम कमिश्नर ने फैक्टरी मालिक को सामान उठाने का दिया आदेश

लुधियाना| फैक्टरी हादसे के मामले में निगम कमिश्नर जसकरन सिंह के आदेश ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उनके जारी पत्र में मालिक इंदरजीत सिंह गोला को मलबा हेडओवर करने का ऑर्डर दिया गया है। कहा गया है- सामान गुम होेने पर जिम्मेदारी निगम की नहीं होगी। इस पर गोला का बेटा मलबे में पड़ी करोड़ों की मशीन लदवाकर लेकर गया, जबकि सीएम के आदेश पर डिवीजनल कमिश्नर पटियाला, वीके मीना हादसे की जांच कर रहे हैं। यहीं नहीं, गैर इरादतन हत्या समेत कई सख्त धाराओं में एफआईआर दर्जकर पुलिस गाेला को गिरफ्तार भी कर चुकी है। जांच के साथ ही फॉरेंसिक टीम भी सैंपलिंग कर रही है। मलबे से केमिकल के ड्रम बरामद हो रहे हैं। कानून के मुताबिक मलबे समेत बरामद होने वाला हर सामान केस प्रॉपर्टी माना जाएगा। पहले तो फैक्टरी में अवैध निर्माण नहीं रोका गया, बिना साइट विजिट कई मंजूरियां दे दी गईं और अब बिना रेस्क्यू पूरा हुए मलबा व अन्य सामान सौंपने की इतनी जल्दबाजी? निगम के इस कदम पर लापता फायरमैनों के परिवारों ने भी प्रशासन के खिलाफ रोष जताया।

2013-14 में महिला के नाम से जमा कराया ‌‌~26 हजार प्रॉपर्टी टैक्स

2006-07 में यूनिवर्सल डाइंग के नाम पर अमरसन पॉलीमर्स की दो फ्लोर की बिल्डिंग की असेस्मेंट हाउस टैक्स में कराई गई। वहीं, 2013-14 में इसी प्रॉपर्टी का मंजीत कौर के नाम से 26 हजार टैक्स जमा कराया गया। इसके बाद निगम रिकॉर्ड में इस बिल्डिंग का कोई प्रॉपर्टी टैक्स भी नहीं जमा किया गया।

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