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शादी के सालभर बाद पति विदेश भाग गया, ससुराल वालों ने भी साथ छोड़ा तो सतविंदर ने अपनी जैसी महिलाओं को हक दिलाने की ठानी

एक वर्ष पहले
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एनआरआई दूल्हे से छली गईं सतविंदर कौर सत्ती हक के लिए दर-दर भटकीं। विदेश मंत्रालय तक में अर्जी दी, दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया। इंसाफ के लिए उनकी लड़ाई आज भी जारी है। अब वह अपने साथ-साथ एनआरआई पतियों के धोखे की शिकार हुईं लड़कियों के लिए भी लड़ रही हैं। अपनी संस्था ‘अब नहीं’ के जरिए प|ियों को छोड़कर विदेश भागे एनआरआई दूल्हों के खिलाफ मुहिम छेड़ी है। करीब 300 के पासपोर्ट इंपाउंड करा चुकी हैं। पंजाब सहित देशभर की महिलाओं के तकरीबन 500 केसों से जुड़ी हैं। इसमें 25 से लेकर 65 साल तक की उम्र की महिलाएं शामिल हैं। एनआरआई दुल्हनों से पीड़ित युवकों की भी मदद कर रही हैं। लगभग 5% केस ऐसे पतियों के भी आ रहे हैं। वह घरेलु विवाद के लोकल मामलों में दोनों पक्षों से बात करके लड़कियों का घर-परिवार टूटने से भी बचा रहीं, पर यह लड़ाई अासान नहीं। अब तक सिर्फ 3 मामलों में ही न्याय मिल सका है। खुद पीड़ित, फिर अपनी जैसी दूसरी महिलाओं के हक की लड़ाई। अपनी आपबीती और न्याय की कठिन राह, सबकुछ आगे खुद बयां कर रही हैं 39 वर्षीय सतविंदर कौर...।

महिलाओं की सरकारों से ये मांगें

{ससुराल की प्रॉपर्टी में हिस्सा मिले, बच्चों की फ्री शिक्षा की व्यवस्था हो।

{सरकारी नौकरी दी जाए, जिससे ऐसी महिलाएं आत्मसम्मान के साथ जी सकें और बच्चों की परवरिश कर सकें।

{धोखा खा चुकी लड़कियों के लिए शहरों में सरकारी हॉस्टल बनें ताकि वे वहां रहकर रोजी-रोटी कमा सकें।

{ऐसी महिलाओं के पीले कार्ड बनाए जाएं, मेडिकल सुविधाएं और पेंशन मिले, उनके बच्चों काे पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप की व्यवस्था की जाए।

सूबे में ऐसी करीब 32000 महिलाएं, इनका दर्द किसी भी सियासी दल के एजेंडे में नहीं ?

सतविंदर कहती हैं, पंजाब भर में करीब 32,000 महिलाएं ऐसी हैं, जो एनआरआई दूल्हों से पीड़ित हैं। विडंबना है कि इन महिलाओं का दर्द किसी भी सियासी दल के एजेंडे इनका दर्द शामिल नहीं है। हमारी संस्था सरकारों से मांग करती है कि एनआरआई दूल्हों से धोखा खाई महिलाओं व उनके बच्चों के लिए ये सुविधाएं दी जानी चाहिए।


‘पुलिस वाला बोला- कुड़िए! लड़ाई लड़नी है ते दिलेरी दिखाणी पैणी, एेद्दां हिम्मत हार के कुछ नईं मिलणा’, तब से सोच लिया अंतिम सांस तक लड़ूंगी’

भगोड़े एनआरआई दूल्हों से धोखा ‘अब नहीं’...

महिला दिवस पर विशेष


सतविंदर कौर

संस्था में नीतू थापर जनरल सेक्रेटरी, रंजीत वाइस प्रेसिडेंट, सुरिंदर मुख्य सलाहकार, हरविंदर कौर, भगवंत कौर, सरबजीत, सुखराज, निशा कुमारी भी हैं।

\\\'संपन्न परिवार से थी। डबल एमए, बीएड करने के बाद हेड टीचर की सरकारी नौकरी लग गई थी। इस बीच, 2009 में लुधियाना के रड़ी मोहल्ला के अरविंदरपाल सिंह से शादी हुई। ससुरालवालों के कहने पर जॉब छोड़नी पड़ी। एक दिन पति मैकलोडगंज में नौकरी लगने के नाम पर साथ ले गया। हम किराए पर कमरा लेकर रहने लगे। जिंदगी सेट हो ही रही थी कि पति ने विदेश में नौकरी लगने की बात कही। घरवालों के मना करने पर भी मैंने नहीं सुनी, पति पर विश्वास था। हालांकि यह सब सोची समझी साजिश थी। विदेश जाने से पहले ही सास, ससुर ने अपने बेटे को बेदखल कर दिया ताकि वह कानूनी कार्रवाई से बच जाएं। मुझे कभी नहीं लगा कि वह धोखेबाज है और विदेश से नहीं लौटेगा। 2010 में वह चला गया। मेरे पास किराए तक के पैसे नहीं थे। मेरे पिता मुझे मायके ले आए। तब से वहीं रह रही हूं। माता पिता, दो भाई और भाभी अगर सपोर्ट नहीं करते तो कब की टूट जाती। उन्होंने हमेशा हौंसला दिया। इंसाफ के लिए पंचायतों से लेकर कोर्ट के न जाने कितने चक्कर काटे। डिप्रेशन में भी चली गई थी। एक दिन एक एसएचओ बोला, कुड़िए! लड़ाई लड़नी है ते दिलेरी दिखाणी पैणी, एेद्दां हिम्मत हार के कुछ नईं मिलणा। बस, उस दिन सोच लिया कि अपने जैसी तमाम पीड़िताओं के हक की आवाज भी उठाऊंगी। 2016 में अबेन्डेड ब्राइड्स बाय एनआरआई हस्बेंडस इंटरनेशनली (अब नहीं) एनजीओ बनाई और तब से लड़ाई लड़ रही हूं और अंतिम सांस तक लड़ती रहूंगी।\\\'
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