पंजाब / लुधियाना सिटी सेंटर घोटाले में मुख्यमंत्री अमरिंदर और उनके बेटे समेत सभी 29 आरोपी बरी

लुधियाना में कोर्ट की सुनवाई पर पहुंचे मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह। लुधियाना में कोर्ट की सुनवाई पर पहुंचे मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह।
फैसले की सुनवाई के चलते किए गए कड़े सुरक्षा प्रबंध। फैसले की सुनवाई के चलते किए गए कड़े सुरक्षा प्रबंध।
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लुधियाना में कोर्ट की सुनवाई पर पहुंचे मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह।लुधियाना में कोर्ट की सुनवाई पर पहुंचे मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह।
फैसले की सुनवाई के चलते किए गए कड़े सुरक्षा प्रबंध।फैसले की सुनवाई के चलते किए गए कड़े सुरक्षा प्रबंध।

  • मुख्यमंत्री दोपहर में अदालत परिसर पहुंचे, कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु भी थे साथ 
  • 1979 में बनाई गई थी सिटी सेंटर प्रोजेक्ट की योजना, सितंबर 2006 में सामने आई थी घोटाले की बात
  • अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के कार्यकाल में 23 मार्च 2007 को कैप्टन और अन्य के खिलाफ सिटी सेंटर घोटाले में मामला दर्ज हुआ

Dainik Bhaskar

Nov 27, 2019, 05:08 PM IST

लुधियाना. बहुचर्चित सिटी सेंटर घोटाले मामले में जिला अदालत ने बुधवार को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। मामले में मुख्यमंत्री के अलावा उनके बेटे रणइंदर सिंह, दामाद रमिंदर सिंह और अन्य 29 लोग आरोपी थे। फैसले के बाद सीएम ने कहा कि अदालत ने हमारी दलीलों को मान लिया है। हमारे खिलाफ झूठे आरोप लगाकर केस दर्ज किया गया था। कोर्ट का फैसला आने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जश्न का माहौल है।


पंजाब की सियासत गरमाने वाले 1144 करोड़ रुपए के कथित सिटी सेंटर घोटाले के मामले में भ्रष्टाचार की बात 13 साल पहले सितंबर 2006 में तब सामने आई थी, जब कैप्टन की सरकार थी। उसके बाद मामले की जांच शुरू हुई। 2007 में सत्ता परिवर्तन के बाद मामला दर्ज किया गया। इसमें कैप्टन का नाम भी शामिल था। एफआइआर तत्कालीन एसएसपी विजिलेंस कंवलजीत सिंह ने दर्ज करवाई थी। दिसंबर 2007 में 130 पेज की चार्जशीट दाखिल की गई थी। मामले में 36 आरोपियों में चार की मौत हो चुकी है। अन्य 32 के खिलाफ कैप्टन की सरकार बनने के बाद विजिलेंस ब्यूरो ने लुधियाना की अदालत में अगस्त 2017 में क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी। केस दर्ज होने के बाद 12 साल बीत चुके हैं। लुधियाना का सबसे बड़ा सिटी सेंटर अब खंडहर में तब्दील हो चुका है। अदालत ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को बुधवार को तलब किया था। 

नवजोत सिद्धू ने भी खोला था मोर्चा

मुख्यमंत्री के खिलाफ रहने वाले नवजोत सिंह सिद्धू ने भी इस मामले में मोर्चा खोल रखा था। उस वक्त सिद्धू भाजपा के सांसद थे और उन्होंने अविनाश राय खन्ना और अन्य के साथ कैप्टन समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ थाना सराभा नगर में एफआईआर दर्ज करने के लिए शिकायत दी थी। यह अलग बात है कि तब पुलिस ने सुनवाई नहीं की थी। इसका जिक्र विजिलेंस ने अपनी एफआईआर में भी किया था, लेकिन अब स्थिति उलट है। अब सिद्धू कांग्रेस के ही विधायक हैं।

जज ने की यह टिप्पणी

पुलिस कमिश्नर राकेश अग्रवाल की अगुवाई में सीएम को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कोर्ट के अंदर ले जाया गया। कोर्ट में फैसला सुनाते वक्त जज ने कहा कि किसी भी आरोपी के खिलाफ क्रिमिनल केस के सुबूत नहीं मिले, इसलिए केस से सभी की बरी किया किया जाता है। इसी के साथ अदालत ने मामले को बंद करवाने के लिए विजिलेंस ब्यूरो की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया।

यह है सिटी सेंटर प्रोजेक्ट

सिटी सेंटर प्रोजेक्ट की योजना साल 1979 में बनाई गई थी। इसके लिए शहीद भगत सिंह नगर की 475 एकड़ जमीन में 26.44 एकड़ जगह सिटी सेंटर के लिए आरक्षित रखी गई थी। प्रोजेक्ट सालों लटकने के बाद 2005 में प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत इसको तैयार किया गया था। यहां पर मल्टीप्लेक्स, मॉडर्न शॉपिंग मॉल, सुपर मार्केट, ऑफिस, ट्रेड सेंटर, फूड प्लाजा, सिटी म्यूजियम, रीक्रिएशन सेंटर, आईटी सेंटर, हेल्थ सेंटर, बैंक, रिवॉल्विंग रेस्टोंरेंट, एससीओ (शॉप कम ऑफिस) तैयार होने थे। इस साइट का कुल एरिया 10 लाख 70 हजार 553 वर्ग फुट है। यहां पार्किंग समेत 26 लाख 89 हजार 604 वर्ग फुट एरिया में निर्माण होना था। 2300 कारों के लिए कार पार्किंग का निर्माण किया जाना था। इसकी ऊंचाई 100 फुट तक रखी गई थी।

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