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ब्रेस्ट फीडिंग से बच्चे के विकास के साथ ही मां का ब्रेस्ट, ओवेरियन, बच्चेदानी कैंसर से होता है बचाव

2 वर्ष पहले
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पंजाब में सिर्फ 54 फीसदी महिलाएं ही बच्चे को अपना दूध पिलाती हैं। जबकि साउथ में 80 फीसदी महिलाएं बच्चे को अपना दूध पिलाती हैं। इसी संबंध में महिलाओं को जागरूक किया जा रहा है। इसमें उन्हें मां के दूध पिलाने से बच्चों के साथ ही उन्हें खुद होने वाले फायदों के बारे में भी बताया जा रहा है। डॉक्टर्स ने कहा कि मां को प्रेग्नेंसी की शुरुआत से ही मानसिक और शारीरिक तौर पर तैयार करना जरूरी है। शुरुआत के 6 महीने बच्चे के मानसिक विकास के लिए बहुत अहम हैं। एेसे में बच्चे को सिर्फ मां का ही दूध दिया जाए तो बहुत लाभदायक रहता है। बॉटल का दूध पिलाने से बच्चे के विकास पर तो असर पड़ता ही है। वहीं, मां के स्वास्थ्य पर भी इसके प्रभाव अच्छे नहीं हैं। ब्रेस्ट फीडिंग कराने से मां को ब्रेस्ट कैंसर, ओवेरियन कैंसर और बच्चेदानी के कैंसर का खतरा कम हो जाता है।

प्रीमेच्योर बच्चे के लिए भी फायदेमंद है मां का दूध

‘प्रीमेच्योर बच्चे के लिए भी मां का दूध फायदेमंद रहता है। प्रेग्नेंसी के दौरान ही मां को दूध पिलाने के लिए मानसिक रूप से तैयार करने की जरूरत है। इसके लिए पति और परिवार का साथ भी बेहद जरुरी है। वहीं, मां को हेल्दी डाइट का पूरा ध्यान रखना चाहिए। हेल्दी डाइट में प्रोटिन, विटामिन, काब्रोहाइड्रेट्स, फाइबर का होना जरुरी है। दालें, अंडा, हरी सब्जियां, फल, दूध लेना चाहिए। घी थोड़ा कम लें तो बेहतर रहता है। अगर किसी तरह का भ्रम है तो उसे डॉक्टर से ज़रुर पूछें।’- डॉ.गुरमीत कौर, पीडियाट्रिशियन, सीएमसीएच

प्रेग्नेंट मदर्स को अवेयर तो किया जा रहा है। महिलाओं में ये भ्रम रहता है कि ब्रेस्ट फीडिंग से फिगर खराब होती है। लेकिन असल में कैलोरी बर्न होने से शरीर का वेट कम होता है। वहीं, कैंसर से भी बचाव रहता है। वहीं, बच्चे को एलर्जी, डायरिया जैसी बीमारियां भी नहीं होती और बीमारियों से लड़ने की क्षमता का विकास होता है।’- डॉ.हरप्रीत सिंह, पिडियाट्रिशियन, सिविल हॉस्पिटल लुधियाना

6 महीने तक के बच्चे को अगर डायरिया या उल्टियां हैं तो भी उसे सिर्फ मां का दूध ही देना सबसे सही है। ये बच्चे के लिए दवाई की तरह है। मां को ये ज़रुर याद रखना चाहिए कि कोई भी दवाई लेने से पहले डॉक्टर को पूछ लें कि बच्चे को दूध पिला सकती हैं या नहीं। मां के वर्किंग होने की सूरत में मां अपने समय को इस तरह से मैनेज करे कि बच्चे को दूध अपना ही पिलाए।’- डॉ. राजिंदर गुलाटी, एसएमओ

सीएमसी में मनाया ब्रेस्ट फीडिंग सप्ताह

पोस्टर मेकिंग में आकांक्षा फर्स्ट, अनु रही सेकेंड

हेल्थ रिपोर्टर | लुधियाना

क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज में 1 से 7 अगस्त 2019 तक वर्ल्ड ब्रेस्ट फीडिंग सप्ताह मनाया गया। पीडियाट्रिक मेडिसिन और कॉलेज ऑफ नर्सिंग में इंपावर पेरेंट्स, इनेबल ब्रेस्ट फीडिंग विषय पर पोस्टर मेकिंग, स्लोगन राइटिंग प्रतियोगिता और रोल प्ले का आयोजन किया गया। पोस्टर मेकिंग और स्लोगन राइटिंग कंपीटिशन में डॉ.वर्गिस पीवी, सीमा बरनाबास,डॉ. मर्लिन ग्रेस और डॉ. प्रेम लता प्रकाश ने जज की भूमिका निभाई। आकांक्षा ने पहला, अनु राजन ने दूसरा और ब्लैसी ने तीसरा स्थान लिया। स्लोगन राइटिंग कंपीटिशन में महिमा विलियम ने पहली, अमनदीप ने दूसरी और आशीष ने तीसरी पोजीशन ली। पीडियाट्रिक मेडिसिन डिपार्टमेंट की यूनिट हेड डॉ. गुरमीत कौर ने कहा कि छह महीने तक बच्चे को सिर्फ मां का दूध ही पिलाया जाना चाहिए। ऑब्सटेट्रिक और गाइनीकोलॉजी डिपार्टमेंट की हेड डॉ. कविता भट्टी ने ब्रेस्ट फीडिंग के महत्व के बारे में जानकारी दी। एसोसिएट प्रो. प्रेमलता प्रकाश ने ब्रेस्ट फीडिंग से जुड़ें भ्रमों को दूर किया।

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