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बुद्ध पूर्णिमा 18 मई को, 502 साल बाद मंगल-राहु और शनि-केतु के दुर्लभ योग में मनेगा भगवान बुद्ध का जन्मोत्सव

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 08:11 AM IST

Ludhiana News - सिटी रिपोर्टर/लुधियाना| 18 मई को बुद्ध पूर्णिमा है। हिन्दी पंचांग के अनुसार वैशाख मास की पूर्णिमा पर भगवान गौतम...

Ludhiana News - buddha purnima on may 18 502 years after the birth anniversary of manega lord buddha in the rare yoga of mangal rahu and saturn ketu
सिटी रिपोर्टर/लुधियाना| 18 मई को बुद्ध पूर्णिमा है। हिन्दी पंचांग के अनुसार वैशाख मास की पूर्णिमा पर भगवान गौतम बुद्ध की जयंती मनाई जाती है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार इस साल बुद्ध पूर्णिमा पर मंगल-राहु मिथुन राशि में रहेंगे और उनके ठीक सामने शनि-केतु धनु राशि में स्थित हैं, ये एक दुर्लभ योग है। सूर्य और गुरु भी एक-दूसरे पर दृष्टि रखेंगे। जानिए बुद्ध पूर्णिमा पर कौन-कौन से योग बन रहे हैं...।

502 साल पहले बना था ऐसा दुर्लभ संयोग

बुद्ध पूर्णिमा पर ऐसा दुर्लभ योग 502 साल पहले 16 मई 1517 में बना था। उस समय भी मंगल-राहु की युति मिथुन में थी और शनि-केतु की युति धनु राशि में थी। इस संयोग में ही बुद्ध पूर्णिमा का पर्व मनाया गया था। आगे ऐसा संयोग 205 वर्ष बाद 2 जून 2224 को बनेगा।

इस दिन क्या-क्या कर सकते हैं

पूर्णिमा तिथि का 18 मई की सुबह 4.10 बजे से शुरू हो रही है। ये तिथि रात को 2.41 बजे तक रहेगी। इस पूर्णिमा को वैशाखी पूर्णिमा भी कहा जाता है। प्राचीन समय में भगवान बुद्ध का जन्म इसी तिथि पर हुआ था। इसीलिए इसे बुद्ध पूर्णीमा कहते हैं। इसी दिन भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार धारण किया था। वैशाख मास के स्नान भी इसी दिन से समाप्त हो जाएंगे। पूर्णिमा पर पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद गरीबों को धन का दान करें। व्रत करें। इस तिथि पर भगवान सत्यनारायण की कथा भी करनी चाहिए। शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं, चांदी के लोटे से दूध चढ़ाएं। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें।

विश्व शांति दिवस पर की सरबत के भले की अरदास

खन्ना| तपोवन ढक्की साहिब मकसूदड़ा में 22वां विश्व शांति दिवस संत दर्शन जी की अगुवाई में श्रद्धाभाव से मनाया गया। इस मौके पर अखंड साहिब का भोग डाला गया, इसके बाद गुरमति कीर्तन टकसाल ढक्की साहिब के विद्यार्थियों ने शब्द से समागम की शुरुआत की। विश्व शांति सम्मेलन में अलग अलग धर्मों के महात्माओं ने शिरकत की, जिनमें सनातन धर्म के स्वामी सूरज पुरी, इस्लाम धर्म के सूफी संत गुलाम हैदर कादरी, ईसाई धर्म के पास्टर फ्लिप मसीह, निमल पंथ से बाबा दर्शन सिंह, उदासी पंथ के महंत सुखविंदर दास ने शिरकत की। इस दौरान विश्व शांति की अरदास की गई।

ग्रहों के दुर्लभ संयोग का ऐसा होगा असर

बुद्ध पूर्णिमा पर बन रहे दुर्लभ योगों के असर की वजह से मंहगाई में बढ़ोतरी होगी। पूर्णिमा पर विशाखा नक्षत्र रहेगा, इसका स्वामी गुरु है। नवांश में भी शनि की दृष्टि सूर्य पर होगी, इससे विश्व के किसी हिस्से में भूकंपन के योग भी बन रहे हैं। अन्य प्राकृतिक आपदाएं भी आ सकती हैं।

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