फर्जी नीले कार्ड बनाने का मामला

Ludhiana News - सरकार की ओर से गरीबों के लिए चलाई गई आटा दाल स्कीम के तहत बनाए जा रहे स्मार्ट कार्ड के जमा किए एक-एक फॉर्मों की जांच...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:50 AM IST
Jagraon News - case for making fake blue cards
सरकार की ओर से गरीबों के लिए चलाई गई आटा दाल स्कीम के तहत बनाए जा रहे स्मार्ट कार्ड के जमा किए एक-एक फॉर्मों की जांच होगी। अब अधिकारी दफ्तरों में बैठ कर फार्मों की जांच नहीं करें। वह एक एक गली में जाकर घर घर की जांच करेंगे। ताकि सरकार की स्कीम का फायदा उन लोगों को ही मिले, जो इसके हकदार हैं। जानकारी के अनुसार सरकार की आटा दाल स्कीम का फायदा गरीबों को कम और अमीर व नेताओं के चहेते जरूर उठा रहे हैं। जिनके घर में दो-दो एसी और कार फिर भी गरीब बनकर सरकार की स्कीम का फायदा उठा रहे हैं। इसका खुलासा दैनिक भास्कर में होने के बाद हरकत में आए अफसरों ने अब एक एक फार्म चेक करने के आॅर्डर किए हैं। इसके बाद गरीबी का लिवाज पहने अमीरों पर शिकांजा कसने के तैयारी कर ली है। गरीब बने लोगों पर सरकार के साथ धोखाधड़ी का केस दर्ज होगा।

इस संबंध में फूड सप्लाई विभाग के एएफएसओ बेअंत सिंह ने बताया कि उनका विभाग भी नए बनने वाले स्मार्ट कार्ड की जांच करेगा। और यदि उसमें किसी भी व्यक्ति ने फर्जी फार्म भरा होगा। उसके खिलाफ पुलिस को शिकायत देकर सरकार के साथ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया जाएगा। वहीं, दूसरी ओर एसडीएम बलजिंदर सिंह ढिल्लों ने भी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह एक-एक घर जाकर कार्ड धारक की जांच करें। इतना ही नहीं कार्ड धारक क्या काम करता है। और उसके परिवार में कितने लोग काम करते हैं। इसकी पूरी जानकारी हासिल की जाएगी। इसके बावजूद भी किसी व्यक्ति ने अगर गलत जानकारी देकर कार्ड बनाया तो उस पर कारवाई होगी। गौरतलतब है कि घर में दो-दो एसी और कार होने के बावजूद भी कुछ लोगों ने आपने नेताओं के दम पर नीले कार्ड बना रखे थे। इससे सरकार को हर साल करोड़ों का चूना लगता था।

अब एक-एक फार्मों की होगी जांच, फर्जी स्मार्ट कार्ड बनवाने वालों पर दर्ज होगा पर्चा

कौन है इसका जिम्मेदार

हजारों लोग मर चुके हैं। लेकिन नीले कार्डों में वह जीवित हैं। और डिपू होल्डर उनके नाम पर फूड सप्लाई विभाग से गेहूं आदि लेकर जाते हैं। इसके बारे में अधिकारियों को कोई जानकारी नहीं थी। अधिकारी कार्ड के हिसाब से डिपू होल्डरों को गेहूं देते रहे और डिपू होल्डर भी चुपचाप विभाग से गेहूं लेकर जाते हैं। जिससे सरकार को करोड़ाें का चूना लगा। लेकिन अब इसका जिम्मेदार कौन है? इसको लेकर कोई भी कुछ भी बताने को तैयार नहीं, जबकि किसी कार्ड धारक के एक सदस्य की मौत हो जाए तो उसे डिपू होल्डर और डिपू होल्डर को विभाग को बताना होता है, लेकिन कोई भी बताता नहीं।

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