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कैमरे लगे होने के बावजूद टेस्ट देते समय नहीं आती आवेदक की फोटो, एजेंट उठा रहे फायदा

Ludhiana News - चंडीगढ़ रोड सेक्टर-32 और सिविल लाइंस आरटीए के तहत आते ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर पर लर्निंग और पक्के लाइसेंस...

Feb 15, 2020, 08:06 AM IST
Ludhiana News - despite having cameras the applicant39s photo does not come while giving the test the agent is taking advantage

चंडीगढ़ रोड सेक्टर-32 और सिविल लाइंस आरटीए के तहत आते ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर पर लर्निंग और पक्के लाइसेंस बनाए जाते हैं। लर्निंग लाइसेंस के लिए टैब टेस्ट देना पड़ता है, जबकि पक्का लाइसेंस बनवाने के लिए टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर चलाकर दिखाना पड़ता है। इसके लिए बाकायदा टेस्ट ट्रैक पर कैमरे लगे हैं, जो बताते हैं कि आवेदक ने टेस्ट सही दिया या नहीं। मगर इस सिस्टम की सबसे बड़ी खामी ये हैं कि इसमें यह तक पता नहीं चल पाया कि टेस्ट दे कौन रहा है। टेस्ट देते समय कंप्यूटर स्क्रीन पर सिर्फ येलो रंग की लाइन ही नजर आती है। कोई भी आवेदक आसानी से अपनी जगह किसी दूसरे को टेस्ट देने के लिए कह सकता है। यह काम मुलाजिमों की मिलीभगत से संभव है।

नहीं सामने आई कोई गड़बड़ी : एआरटीओ



इधर, ट्रैक इंचार्ज से जवाब तलब, एजेंट किसकी शह पर बनवा रहे लाइसेंस


वहीं, चंडीगढ़ रोड स्थित सेक्टर-32 के ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर आवेदक की जगह एजेंट की ओर से 3 बार बिना सीट बेल्ट पहने गाड़ी चलाने के मामले में एसडीएम अमरजीत सिंह बैंस ने ट्रैक इंचार्ज नीलम को बुलाकर इस बारे में जवाब तलब किया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने इंचार्ज से पूछा कि आखिर एजेंट ट्रैक पर किसकी शह पर धड़ल्ले से लाइसेंस बनवा रहे हैं और यह किसकी मदद से संभव है। उन्होंने बताया कि फिलहाल इस मामले में जांच जारी है। उन्होंने बताया कि वीडियो को देखकर ही साफ हो पाएगा कि इसमें कौन लोग शामिल हैं। इसके बाद बनती कार्रवाई की जाएगी।

सिस्टम में खामी

इंचार्ज की गैर-मौजूदगी में होती है धांधलेबाजी

टेस्ट देने के बाद कुछ इस तरह बन जाता है ग्राफ।

मिली जानकारी के मुताबिक अक्सर ट्रैक पर एजेंटों के लाइसेंस बनवाने के लिए धांधलेबाजी उसी समय होती है, जब ट्रैक पर इंचार्ज न हो। उस समय ट्रैक पर अंदर मुलाजिमों और खाकी वर्दी में तैनात मुलाजिम की शह पर ही काम शुरू होता है। ट्रैक पर ड्राइविंग टेस्ट देने के बाद टेस्ट रूम में फोटो होती है। फोटो तभी होती है, जब आप टेस्ट पास करेंगे। जब ट्रैक इंचार्ज या अफसर ट्रैक पर नहीं होता तो मुख्य आवेदक सिर्फ ड्राइविंग सेंटर पर फोटो ही करवाता है। जबकि टेस्ट कोई और दे रहा होता है।

कोड वर्ड हो रहे इस्तेमाल: एजेंट्स ने ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए कोड वर्ड रखे हैं। वह पूछते हैं कि किस तरह का लाइसेंस बनवाना है। साधारण या वीआईपी कोटे का। वीआईपी कोटे में मतलब आपको सिर्फ फोटो करवाने के लिए ही आना होगा और लाइसेंस आपके घर पहुंच जाएगा वो भी 10 दिन में।

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