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हर साल 7-8 लोगों की होती है मौत, लेकिन न नगर निगम न ही स्वास्थ्य विभाग संजीदा, इलाके के कौंसलर आते ही नहीं

Ludhiana News - वॉर्ड नं. 30 ग्यासपुरा के शांति नगर में पिछले दस सालों से डेंगू की समस्या हर साल लोगों को सताती है। लेकिन न ही नगर...

Oct 22, 2019, 08:10 AM IST
वॉर्ड नं. 30 ग्यासपुरा के शांति नगर में पिछले दस सालों से डेंगू की समस्या हर साल लोगों को सताती है। लेकिन न ही नगर निगम न ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा संजीदगी से कोई कदम उठाए जाते हैं। इसके कारण हर साल 7-8 लोग बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं दम तोड़ देते हैं। वहीं, 50-60 लोग डेंगू के चलते बीमार रहते हैं। वहीं, इस बार स्थिति और भी ज्यादा गंभीर है। जहां पर एक ही दिन में चार लोगों की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार भी सबसे ज्यादा डेंगू के केस भी इसी इलाके से आते हैं। बावजूद इसके एक्शन के नाम पर कुछ भी नहीं होता। शांति नगर में 5 गलियां हैं जहां पर 10-15 हजार लोग रहते हैं। भास्कर टीम ने ग्राउंड रियलिटी चेक की तो यहां के लोगों ने गंभीर आरोप लगाए। लोगों का आरोप है कि इलाके के कौंसलर जसपाल सिंह अपने इलाके का न ही दौरा करते हैं। न ही यहां के लोगों की समस्या को हल करने के लिए कोई कदम उठाते हैं। निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने चार मौतों के बाद इलाके का दौरा किया। उसी के बाद कुछ सफाई हुई, छिड़काव भी हुआ और फॉगिंग भी की गई।

शांति नगर के ऐसे हैं हालात।

पानी भी नहीं आता साफ

गली नंबर 2 की मिथिलेश देवी और गली नं. 3 की गुड़िया ने बताया कि इलाके में साफ पानी नहीं आता। शुरुआत के 10-15 मिनट गंदा पीला पानी आता है। वो पानी बहाने के बाद कुछ साफ पानी आता है।


डेंगू से ग्यासपुरा के शांति नगर में 4 मौतों के बाद भास्कर ने चेक की ग्राउंड रियलिटी, आबादी करीब 15 हजार, इलाके के लोगों के मुताबिक हर घर का एक व्यक्ति बीमार

हर घर में एक व्यक्ति है बीमार

मुकेश, मोनू, अमरनाथ ने बताया कि शिकायत के बाद भी एक्शन नहीं लिया जाता। हर घर में एक व्यक्ति बीमार है। 13 साल का रितिक भी 15 दिनों से बीमार चल रहा है। जांच में टाइफाइड और डेंगू दोनों बताया गया है।

डेंगू से चार लोगों की मौत के बाद जागे, शुरू हुई फॉगिंग

इलाके के प्रमोद चौबे ने बताया कि निगम के एक्सईएन को डेंगू के मौसम की शुरुआत से पहले ही फोन कर फॉगिंग कराने के बारे में कहना शुरू कर दिया था। लेकिन कोई नहीं पहुंचा। चार मौतों के बाद निगम के अधिकारी हरकत में आए फॉगिंग भी हुई, दवाई भी छिड़की गई और स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची। अगर विभाग के मुलाजिम पहले ही पहुंच कर कदम उठाते तो तीन मासूम बच्चे और एक औरत अपनी जान न खोते।

एक माह से दिलवा रहे दवाई

श्रीकांत ने बताया कि उनकी प|ी अनीता एक महीने से बीमार है। एक माह से दवाई चल रही है। खून टेस्ट में डेंगू की बात कही गई है। इलाके में न ही कोई फॉगिंग के लिए आता है। न किसी तरह का छिड़काव होता है।


इतने बीमार कि गिनती करना मुश्किल

लोगों ने कहा कि इलाके के बेहिसाब लोग बीमार चल रहे हैं। बीमारों में पीयूष, अमन, रीतिक, पिंकी, पूजा सहित सूची काफी लंबी है। वहीं, कुछ घरों में बीमार लोगों को वापस घर भेजा जा रहा है। ताकि उनकी तबीयत में कुछ सुधार हो सके। अपने बेटे को एडमिट करवाए कर आए पप्पू शर्मा ने कहा कि डेंगू यहां पर वायरल की तरह फैल रहा है। लेकिन इसकी रोकथाम के लिए कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

एक घर मेंे मां, बेटी के सेल कम

बबीता ने बताया कि उन्हें ईएसआई में लंबी कतारों में लगना पड़ता है। पिछले 5-6 दिनों से उनकी चौथी में पढ़ने वाली बेटी निशा भी बीमार चल रही है। जिसके टेस्ट में सैल की कमी बताई गई है।


आरोप गलत हैं

‘ये आरोप गलत हैं। मैंने स्थिति का पूरा जायजा लिया है। लोकल बॉडी मिनिस्टर, सीएम, मेयर, कमिश्नर को भी समस्याओं को लेकर 7 बार लेटर लिख चुका हूं। निगम द्वारा फॉगिंग हाथों की मशीनों से की जा रही है। जबकि यहां गाड़ी वाली फॉगिंग होनी चाहिए। इलाके में सीवरेज, गंदे पानी की समस्या है। -जसपाल सिंह, शिअद कौंसलर, वॉर्ड-30

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