वृक्ष की शोभा मीठे फलों से, ऐसे ही प्रभु की शोभा होती है भक्तों से

Ludhiana News - दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से राहों रोड़ पर चल रही तीन दिवसीय श्री हरि कथा के दूसरे दिन साध्वी वीरेशा भारती...

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 04:26 AM IST
Ludhiana News - from the sweet fruit of the tree the beauty of the lord is likened to the devotees
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से राहों रोड़ पर चल रही तीन दिवसीय श्री हरि कथा के दूसरे दिन साध्वी वीरेशा भारती ने कहा कि जैसे एक वृक्ष की शोभा उसके मीठे फलों से होती है, ऐसे ही भगवान की शोभा उनके भक्तों से होती है। भगवान का नाम आए और भक्तों का नाम ना आए ऐसा तो हो ही नहीं सकता। जब-जब श्री कृष्णजी का नाम आयेगा,तब-तब उनके भक्त सुदामा, अर्जुन, गोपियां, गोवाले, उधव, विधुर का नाम भी आएगा। कलिकाल में प्रभु के प्रिय भक्त नामदेव हुए। उनकी बचपन से ही श्री विठुल भगवान के श्री चरणों से बहुत प्रीति थी। कोई भी समस्या होती वह पल भर की देरी किए बिना विठुल जी के पास पहुंच जाते। उन्हें अपनी समस्या बताते तो भगवान अपने भक्त के प्रेम में बंध जाते हैं। इसी प्रेम के कारण भगवान ने शबरी के जूठे बेर खाए, गोपियों के समक्ष नृत्य किया। नामदेव जी प्रभु से बहुत प्रेम करते थे। हम भी ईश्वर को किसी न किसी रूप में मानते हैं। लेकिन हमें तो कभी दर्शन नहीं होते। इसका कारण है कि ईश्वर को तत्व रूप में मिलने के लिए भीतर सच्ची जिज्ञासा को जन्म देना पड़ेगा। इस दौरान प्रभु की पावन आरती में जसवीर सिंह बाली, भजन सिंह,पंच विजय चौधरी, बलवीर सिंह, जोगिंदर सिंह, राजा राज, मनु,सहंगा सिंह आदि शामिल हुए।

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से राहों रोड पर चल रही श्री हरि कथा मंे मौजूद भक्त।

सिटी रिपोर्टर | लुधियाना

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से राहों रोड़ पर चल रही तीन दिवसीय श्री हरि कथा के दूसरे दिन साध्वी वीरेशा भारती ने कहा कि जैसे एक वृक्ष की शोभा उसके मीठे फलों से होती है, ऐसे ही भगवान की शोभा उनके भक्तों से होती है। भगवान का नाम आए और भक्तों का नाम ना आए ऐसा तो हो ही नहीं सकता। जब-जब श्री कृष्णजी का नाम आयेगा,तब-तब उनके भक्त सुदामा, अर्जुन, गोपियां, गोवाले, उधव, विधुर का नाम भी आएगा। कलिकाल में प्रभु के प्रिय भक्त नामदेव हुए। उनकी बचपन से ही श्री विठुल भगवान के श्री चरणों से बहुत प्रीति थी। कोई भी समस्या होती वह पल भर की देरी किए बिना विठुल जी के पास पहुंच जाते। उन्हें अपनी समस्या बताते तो भगवान अपने भक्त के प्रेम में बंध जाते हैं। इसी प्रेम के कारण भगवान ने शबरी के जूठे बेर खाए, गोपियों के समक्ष नृत्य किया। नामदेव जी प्रभु से बहुत प्रेम करते थे। हम भी ईश्वर को किसी न किसी रूप में मानते हैं। लेकिन हमें तो कभी दर्शन नहीं होते। इसका कारण है कि ईश्वर को तत्व रूप में मिलने के लिए भीतर सच्ची जिज्ञासा को जन्म देना पड़ेगा। इस दौरान प्रभु की पावन आरती में जसवीर सिंह बाली, भजन सिंह,पंच विजय चौधरी, बलवीर सिंह, जोगिंदर सिंह, राजा राज, मनु,सहंगा सिंह आदि शामिल हुए।

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