गैंगस्टरों ने बदला क्राइम करने का तरीका अब वाॅकी-टाॅकी की ले रहे हैं मदद
{बिना परमिशन के हो रहे इस्तेमाल, फ्रिक्यूएंसी चेक करने का भी सिस्टम नहीं
अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस अलग-अलग तरीके अपना रही है, लेकिन अपराधी है कि पुलिस से भी चार पैर आगे चल रहे है। गैंगस्टरों द्वारा वाॅकी-टाॅकी का इस्तेमाल किया जाना, इसका उदाहरण है। मगर एेसी टेकनीक का गैंगस्टरों द्वारा इस्तेमाल करना, पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती है। लेकिन पुलिस का इस तरफ कोई ध्यान नहीं। यही वजह है कि बड़े मामलों में अपराधियों को ट्रेस कर पाना मुश्किल हो रहा है। क्योंकि गैंगस्टरों ने तरीके के साथ-साथ साजो-सामान को भी अपग्रेड कर लिया है। 30 किलो सोने की लूट के मामले में पकड़े गए गैंगस्टर गगनदीप सिंह जज ने पुलिस को बताया कि इस वारदात में उन्होंने वाॅकी-टाॅकी का इस्तेमाल किया, ताकि उनकी लोकेशन का पता न चल सके। एेसा हुआ भी पुलिस ने 3 हजार से ज्यादा मोबाइल नंबरों का डंप उठाया, लेकिन जयपाल और उसके साथ ट्रेस नहीं हो पाए।
दिल्ली और आॅनलाइन आॅर्डर से हो रहे वॉकी-टॉकी सप्लाई
करीब 10 साल पहले की बात करें तो तब वाॅकी-टाॅकी लेने वाले को अपनी पूरी डिटेल शेयर करनी पड़ती थी और उसके इस्तेमाल के िलए परमीशन लेनी होती थी। लेकिन अब न तो खरीदने के समय डिटेल ली जाती है और न ही इस्तेमाल करते समय। दिल्ली से लोग आर्डर कर हैंडसेट मंगवा रहे है। जब आॅनलाइन शॅापिंग वेबसाइट पर ये खुलेआम बिक रहे हैं। जिसमें 10 का सैट 12 हजार में दिया जा रहा है। जिसमें वो हैडफोन का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर उसे ट्रेस करना हो तो वो काफी मुश्किल होगा। इस वाॅकी-टाॅकी की रेंज 3.2 किलोमीटर है और एक बार चार्ज करने पर 8 घंटे तक इसे चार्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती।
वाॅकी-टाॅकी की मंजूरी और फ्रिक्यूएंसी के बारे में उच्चाधिकारियों से बात की जाएगी। हालांकि, फ्रिक्यूएंसी सरकार ने सैट की हुई है। लेकिन फिर भी इसमें क्या हो सकता है, इसपर चर्चा की जाएगी। राकेश अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर
पुलिस ने कभी नहीं की चेकिंग
शादियों, माॅल्स और मेलों में वाॅकी-टाॅकी सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन पुलिस की तरफ से कभी भी उक्त वाॅकी-टाॅकी की डिटेल नहीं मांगी गई कि वो किसकी परमीशन से चल रहे है, उन्हें कैसे आॅपरेट किया जा रहा है, रेंज क्या है और उसकी फ्रिक्यूएंसी कितनी सैट की गई है। मगर अफसोस, इनमें से किसी चीज को भी फाॅलो नहीं किया जाता। पुलिस द्वारा उक्त दुकानों की भी आज तक कोई चेकिंग नहीं की गई, जोकि वाॅकी-टाॅकी मंगवा कर बेच रहे हंै।