लुधियाना सीट / बिट्‌टू-बैंस में सीधी टक्कर, ग्रेवाल को मोदी का सहारा; आप के वोट तय करेंगे हार-जीत



Ground Report from Ludhiana Lok Sabha seat
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Ground Report from Ludhiana Lok Sabha seat

  • शिअद कैंडिडेट ग्रेवाल को प्रभावित कर सकता टकसालियों को जाना
  • 9 विधानसभा सीटों में 5 पर कांग्रेस, 2 पर बैंस और 2 पर आप

Dainik Bhaskar

May 17, 2019, 04:54 AM IST

मुकेश मिश्र, लुधियाना. पांच साल के अंतराल में सूबे की बड़ी लोकसभा सीटों में से एक लुधियाना के सियासी समीकरण काफी हद तक बदल चुके हैं। 2014 में मोदी लहर के बावजूद जीत हासिल करने वाले कांग्रेस के रवनीत सिंह बिट्‌टू को पिछली बार चौथे नंबर पर रहे सिमरजीत सिंह बैंस की चुनौती है। वहीं, दूसरे नंबर पर रही आप इस बार दूसरों का खेल बनाने, बिगाड़ने का काम करेगी। पीडीए-लिप के संयुक्त उम्मीदवार बैंस को आप से नाराज वोटर्स का फायदा मिल सकता है। खासकर तीन ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों जगराओं, गिल और दाखा में। पिछली बार आप कैंडिडेट ने 26.56% वोट हासिल किए थे। 

 


शिअद-भाजपा प्रत्याशी महेश इंदर सिंह ग्रेवाल को ब्रांड मोदी का सहारा है। वह मोदी के नाम पर चुनाव लड़ रहे हैं। वजह भी है। 69 साल के ग्रेवाल 12 साल बाद चुनाव लड़ रहे हैं। बेअदबी, पंजाब में 10 साल के शासन की खास उपलब्धि न होना, टकसालियाें का पार्टी छोड़ना अब भी शिअद के खिलाफ जा रहा है। चूंकि ग्रेवाल खुद टकसाली नेता हैं, इसलिए काडर वोटों का लाभ मिल सकता है। पिछली बार दूसरे नंबर पर आकर चौंकाने वाली आम आदमी पार्टी को सबसे बड़ा नुकसान हो रहा है। हवा तो कब की थम गई, जिला प्रधान, पार्टी प्रवक्ता समेत दर्जनभर बड़े नेता भी झाड़ू से किनारा कर गए। उम्मीदवार प्रो. तेजपाल गिल की इस चुनावी समर में ‘एकला चलो रे’ जैसी स्थिति है। ऐसे में आप का वोट बैंक शिफ्ट होना चौंका सकता है। इसका बड़ा हिस्सा जिस भी तरफ जाएगा, उसी के हक में फैसला आएगा।

 

विधानसभा क्षेत्र- 9 हलके, छह शहरी और तीन हलके ग्रामीण। शहरी हलकों की 4 सीटों पर कांग्रेस और 2 पर बैंस बंधुओं का कब्जा। गिल में कांग्रेस, जगराओं-दाखा में आप विधायक हैं। हालांकि दाखा से एचएस फूलका इस्तीफा दे चुके हैं।

 

चुनावी ट्रेंड- अब तक 17 चुनाव, 12 सांसद। कोई भी दल लुधियाना से लगातार 3 बार नहीं जीत पाया। 2009-2014 में कांग्रेस कामयाब रही। इस बार सांसद रवनीत बिट्‌टू फिर मैदान में हैं। अब कांग्रेस हैट्रिक मार ट्रेंड बदल पाएगी या नहीं, 23 मई को पता चलेगा।

 

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रवनीत सिंह बिट्‌टू (कांग्रेस) :

 

प्लस- खुद का सरल स्वभाव और दादा स्व. बेअंत सिंह की सियासी विरासत। शहरी क्षेत्रों में मजबूत कैडर। 9 में 5 विधायक कांग्रेस हैं। आप के कई लीडर भी कांग्रेस संग आ चुके हैंै।
माइनस- 5 साल की एंटी इंकमबेंसी। गिनाने को कोई बड़ा काम नहीं। ग्रामीण इलाकों में पकड़ कमजोर। हलका गिल में पार्टी विधायक से लोग निराश हैं। पार्टी में अंदरूनी कलह-मतभेद। मंत्री का बड़बोलापन भारी पड़ सकता है।

 

सिमरजीत बैंस (पीडीए-लिप) :

 

प्लस- लोगों के साथ मजबूती से खड़े होने की फितरत। भ्रष्टाचार, अफसरशाही के खिलाफ खामियां उजागर करना। ग्रामीण इलाकों में रुझान बढ़ा, आप के वोट बैंक से फायदा होने की उम्मीद।
माइनस- कई बड़े व करीबी नेता कांग्रेस व शिअद में जा चुके हैं। अपने विधानसभा हलकाें आत्मनगर और दक्षिणी में अपेक्षित विकास का न होना। हलकों उत्तरी, पूर्वी, सेंट्रल, पश्चिमी में कमजोर स्थिति।

 

महेशइंद्र सिंह ग्रेवाल (शिअद+) :


प्लस- बतौर टकसाली नेता साफ छवि के हैं। शिअद-बीजेपी कैडर के अलावा आप से टूटे वोट भी मिलेंगे। सांसद बिट्‌टू का औसत काम और कैप्टन सरकार की एंटी इंकमबेंसी का फायदा मिल सकता है।
माइनस-  बड़े-पुराने टकसाली नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। 12 साल बाद चुनाव लड़ रहे हैं, खुद का या शिअद सरकार का किया कुछ खास नहीं गिनाने को। दूसरे बेअदबी कांड को लेकर लोगाें में नाराजगी है।

 

प्रो. तेजपाल गिल (आप) :

 

प्लस- साफ छवि है। 32 साल की उम्र में चुनाव लड़ रहे हैं। सबसे युवा चेहरा व ज्यादा पढ़े-लिखे। बढ़ती बेराेजगारी जैसे जनहित के मुद्दों पर फोकस।
माइनस- पार्टी बिखर चुकी है। जिला प्रधान-प्रवक्ता समेत कई बड़े नेता जा चुके हैं। हलका दाखा से विधायक हरविंदर सिंह फूलका के त्यागपत्र देने से लोगों में नाराजगी। बाकी कैंडिडेट के मुकाबले प्रचार-प्रसार भी कमजोर।

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