4 किलोमीटर टीम परस्यूट में लुधियाना के हर्षवीर सेखों ने जीता सिल्वर मेडल

Ludhiana News - साइकिलिस्ट हर्षवीर सिंह सेखों ने दिल्ली के इंिदरा गांधी स्टेडियम में 9 से 11 सितंबर तक ट्रैक साइकिलिंग एशिया कप-2019...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 08:21 AM IST
Ludhiana News - harshvir sekhon of ludhiana won silver medal in 4 km team parasute
साइकिलिस्ट हर्षवीर सिंह सेखों ने दिल्ली के इंिदरा गांधी स्टेडियम में 9 से 11 सितंबर तक ट्रैक साइकिलिंग एशिया कप-2019 में सिल्वर मेडल जीता है। हर्षवीर ने 4 किलोमीटर टीम परस्यूट में मेडल जीता। हर्षवीर ने बताया कि उनकी टीम ने बहुत अच्छा परफॉर्म किया है। अगली प्रतियोगिता के लिए वह दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में इंडिया कैंप में ट्रेनिंग ले रहा है। इस मुकाबले में उनकी सेलेक्शन 28 से 2 फरवरी तक ट्रैक साइकिलिंग नेशनल चैंपियनशिप में चार किलोमीटर टीम परस्यूट में ब्रॉन्ज मेडल और 30 किमी. पॉइंट रेस में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद हुई। जबकि उन्होंने पटियाला में आयोजित ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी मुकाबले में 4 किलोमीटर व्यक्तिगत परस्यूट में गोल्ड मेडल हासिल किया। हर्षवीर ने बताया कि उनकी टीम ने ट्रैक साइकिलिंग एशिया कप में नया रिकॉर्ड भी कायम किया है। उन्होंने प्रतियोगिता में 4:14:864 मिनट का रिकॉर्ड कायम किया है। टीम में उनके साथ पटियाला के नमन कपिल, राजस्थान के पूनम चंद और हरियाणा के अनिल मौजूद रहे। प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले वह लुधियाना से अकेले खिलाड़ी हैं।

स्टेट जूडो चैंपियनशिप ट्रायल के दूसरे दिन 150 लड़कों ने दिखाया दमखम

लुधियाना। लुधियाना डिस्ट्रिक्ट जूडो एसोसिएशन की तरफ से गुरु नानक स्टेडियम में स्टेट जूडो चैंपियनशिप के लिए लुधियाना जूडो टीम के चुनाव संबंधी शुक्रवार को लड़कों के ट्रायल करवाए गए। इसमें जिले के विभिन्न हिस्सों से 150 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। इसमें कोच प्रवीण ठाकुर, नवदीप जिंदल, किशोर कुमार, हरमीत वालिया और रोशन ने खिलाड़ियों के ट्रायल लिए और उनकी परफारमेंस के आधार पर चुनाव किया। मल्टीपर्पस हाल में लिए ट्रायल संबंधी कोच प्रवीण ठाकुर और हरमीत वालिया ने बताया कि लड़कों के ट्रायल में उनकी पुरानी और मौजूदा परफॉरमेंस को परखा गया। उनके मुताबिक चयनित टीम बठिंडा में 14 व 15 सितंबर को आयोजित होने वाली 41वीं सब जूनियर कैडिट(लड़के-लड़कियां) स्टेट जूडो चैंपियनशिप 2019-20 में हिस्सा लेंगे। उनके मुताबिक कैडेट टीम में 2002 से 2004 में जन्मे खिलाड़ी और सब जूनियर में 2005 से 2006 के दौरान जन्मे खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।

एशियन चैंपियनशिप के लिए तैयारियों में जुटा

हर्षवीर ने बताया कि अब उनकी निगाहें अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में साउथ कोरिया में होने वाली एशियन चैंपियनशिप पर हैं, जिसके लिए वह तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसके लिए वह टीम के साथ प्रैक्टिस में जुटे हैं, ताकि मेडल लेकर लौटे।

पिता से विरासत में मिला खेलने का जज्बा : हर्षबीर बताते हैं कि खेलने का जज्बा उन्हें पिता बलजीत सिंह से मिला, जोकि जिला स्तर के कबड्डी खिलाड़ी रह चुके हैं। हर्षवीर स्केटिंग के अलावा साइकिलिंग भी करते हैं। हर्षवीर बताते हैं कि कॉमनवेल्थ में स्केटिंग गेम नहीं है। इस कारण उन्होंने साइकिलिंग भी करनी शुरू की। उन्होंने पीएयू में आयोजित ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी ट्रैक साइकिलिंग रेस में हिस्सा लेकर तीन किलोमीटर पॉइंट रेस में ब्रॉन्ज मेडल, चार किलोमीटर परस्यूट में चौथा स्थान हासिल किया था।

लुधियाना डिस्ट्रिक्ट जूडो एसोसिएशन ने लिए खिलाड़ियों के ट्रायल

बास्केटबॉल में मदन गोपाल चोपड़ा स्कूल का शानदार प्रदर्शन

खन्ना|पंजाब सरकार द्वारा कराए गए जिला स्तर के खेलों में अंडर 17 बास्केटबाल की ज़ोन टीम की तरफ से खेलते हुए मदन गोपाल चोपड़ा एएस माॅडल स्कूल के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। टीम में स्कूल के केशन, रमनदीप सिंह और प्रदीप सिंह ने हिस्सा लिया और तीसरा स्थान हासिल करने में योगदान डाला। मैनेजमेंट के प्रधान राजीव राय मेहता, उप प्रधान सुशील कुमार शीला, महासचिव बीके बत्रा, मैनेजर दिनेश कुमार और प्रिंसीपल रीतू सूद ने विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों को बधाई दी। इस अवसर पर डीपी लवप्रीत सिंह, सरूची शाही, आशूतोष मैनरो, मनदीप सिंह वालिया भी मौजूद रहे।

स्टेट बाॅक्सिंग के लिए खिलाडि़यों का चयन 16 सितंबर को नरेश चंद्र स्टेडियम में होगा

खन्ना| बाक्सिंग एसोसिएसन पंजाब द्वारा 18 से लेकर 22 सितंबर तक जालंधर में करवाई जा रही स्टेट बाक्सिंग चैंपियनशिप के लिए जिला लुधियाना की टीम का चयन 16 सितंबर को दोपहर 3 बजे नरेश चंद्र स्टेडियम खन्ना में होगा। एसोसिएशन पदाधिकारी अजीत और उमेश छाबड़ा ने बताया कि स्टेट बाॅक्सिंग चैंपियनशिप के लिए चयन किए जाने वाले खिलाडियों का ट्रायल के बाद चयन किया जाएगा।

इनका हुआ चयन: इस दौरान सब जूनियर कैटेगरी में 40 किलोग्राम से कम भार वर्ग में राहुल, 45 किलोग्राम में प्रिंस, 50 में हरमनदीप सिंह, राजू, 55 किलोग्राम में मनवीर सिंह, 60 किलोग्राम में विशाल कुमार, 66 किलोग्राम में पर्थ, 66 किलोग्राम से ज्यादा के वर्ग में हरप्रीत सिंह, 40 किलोग्राम में शक्ति, पर्थ और लड़कियों में 36 किलोग्राम में शिा, 40 किलोग्राम में राधिका, 44 किलोग्राम में प्रीती, 52 किलोग्राम में पाय, 57 किलोग्राम से ज्यादा के वर्ग में इशरूप, 40 किलोग्राम में मनप्रीत, 44 किलोग्राम में सीमा, 48 किलोग्राम में जाह्नवी, 52 किलोग्राम में जगबीर, 56 किलोग्राम में मुक्ता, 63 किलोग्राम में गिन्नी, 70 किलोग्राम में संजना, 70 किलोग्राम से ज्यादा के वर्ग में नेहा, कैडेट ब्वॉयज लड़कों में 50 किलोग्राम में वरूण, 55 किलोग्राम में हिमांशू, 60 किलोग्राम में कीर्ति, 66 किलोग्राम में काशिक, 75 किलोग्राम में अर्जुन, 81 किलोग्राम में मुकुल आदि का चयन हुआ है।

 

बिज़नेस में ‘पीपल फर्स्ट’ पॉलिसी हमेशा फायदेमंद होती है

क ई कारण हैं कि आमतौर पर नेताओं के भाषण मुझे आकर्षित नहीं करते। लेकिन, गुरुवार के दिन इस अखबार के द्वारा जयपुर में आयोजित एक कॉन्क्लेव में राजस्थान के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने एक ऐसी घटना सुनाई, जिसके बाद मैं अपनी इस नापसंदगी को लेकर सोचने पर मजबूर हो गया। उस दिन उन्होंने बताया, ‘कुछ महीनों पहले विधानसभा के लिए चुने जाने के बाद मैं राज्य के कैबिनेट मिनिस्टर के रूप में शपथ ले रहा था, तो कई विशेष सुविधाएं अचानक ज़िंदगी का हिस्सा बन गईं।’

उन्होंने बड़ी ही स्पष्टता से कहा, ‘कैबिनेट मंत्री के लिए मेरे नाम की घोषणा होने और शपथ के बाद मेरे इस्तेमाल के लिए मिली सरकारी गाड़ी सबसे पहली और सबसे तेज सुविधा थी।’ दिलचस्प यह था कि जब वे शपथ ले रहे थे, तो गाड़ी उनके इंतजार में बाहर लग चुकी थी - सुविधा मिलने की इस गति को देखकर उन्हें भी बड़ा आश्चर्य हुआ।

जब खाचरियावास शपथ लेकर निकले और प्रशंसकों की शुभकामनाएं स्वीकार करने लगे तो उनकी नज़रें अपने निजी वाहन को खोज रही थी, जिसमें बैठकर वे आए थे। तभी उनके मंत्रालय के अधिकारियों ने आग्रह के साथ जोर देकर कहा कि आप सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल क्यों नहीं कर लेते? हालांकि, एकदम से सरकारी गाड़ी लेने में वे हिचकिचा रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने जोर दिया और उन्हें उसमें बैठना पड़ा। इसके बाद उन्होंने बताया कि कैसे हर नवनियुक्त मंत्री को लेकर ये गाड़ियां एक के बाद एक निकलीं और यह दृश्य बिलकुल बॉलीवुड की फिल्मों जैसा था। राज्यपाल के निवास के थोड़ा आगे सड़क कई दिशाओं में बंटीं तो खाचरियावास ने भी अपने निवास स्थान वाली राह पकड़ी। जब वे अपने घर की ओर बढ़ रहे थे, तो उन्हें बाहर से आती हुई एक धीमी आवाज सुनाई दी। ऐसा लगा जैसे कोई मारवाड़ी लहजे में उन्हें पुकार रहा था।

खाचरियावास ने गाड़ी रुकवाई और कांच नीचे किया तो सामने से एक आदमी पास आकर बोला, ‘भाई साहब, देखो थाने जिता दियो न, थाने (आप) मैं यो पेली ही कियो हो, चिंता मत करो, थे जीतोळा।’

उसकी बात सुनकर खाचरियावास गाड़ी से उतरे और उसे गले लगाते हुए बोले- ‘तू मने जिता दियो, अब बता थारो काई काम है।’ वह बोला, ‘थे जीत ग्या ई में ही म्हारो काम हो ग्यो।’ उनकी आंखें भर आईं और अपने आपको संभालते हुए उन्होंने उसे फिर से गले लगाया। उसने कहा भाई साहब ‘थांके जीतता ही ठेकेदार भी सीधो हो ग्यो।’ तो खाचरियावास ने उससे कहा, ‘अबकी बार तने परमानेंट करा देस्यां।’ उसने कहा, ‘भाई साहब परमानेंट की चिंता कोनी। अब थे जीत ग्या म्हारों दुख मिट ग्यो। थे जद भाषण में बोलता था के मैं अबके हार ग्यो तो म्हारी राजनैतिक हत्या हो जावेळी। मैं थाने मरता कोनी देख सकां।’

जब खाचरियावास वहां जा रहे थे तो वह बोला, ‘भाई साहब ओर काम व्हे तो मने बता दीजो।’ इस अजनबी आदमी का परिचय यह था कि, वह सिविल लाइंस सड़क पर मैले-कुचेले कपड़ों में झाडू लगाने वाला एक अस्थायी कर्मचारी था।

खाचरियावास जब भी वहां से गुजरते थे, तो वह उन्हें देख अभिवादन में रोज हाथ हिलाता था। घटना सुनाते हुए खाचरियावास बोले, ‘उस दिन मुझे उसे देखकर इतनी खुशी हुई कि मैं बता नहीं सकता। सचमुच उस झाडू लगाने वाले अपने दोस्त के मन की मजबूती और हर हाल में खुश रहने के जज्बे को देखकर मुझे भी बहुत खुशी मिली।’

कॉनक्लेव में अपना यह व्यक्तिगत अनुभव सुनाते हुए खाचरियावास ने वहां बैठे उद्यमियों से एक अपील की, ‘आपके साथ काम करने वाले लोग आपकी बहुमूल्य संपत्ति है। ‘स्लो-डॉउन’ के डर में भी आपको उनकी नौकरी बनाए और बचाए रखनी चाहिए। मैं जो कुछ कर सकता हूं, जरूर करूंगा और इसीलिए मैं आपके साथ अपना मोबाइल नंबर शेयर कर रहा हूं ताकि राज्य सरकार से कोई मदद चाहें तो मैं उसे पूरा कर सकूं और मैं सीएम साहब की मदद लेने की कोशिश करूंगा।’ जाने से पहले उन्होंने एक बार फिर जोर देकर कहा, ‘ध्यान रखिए, ये हमारे ही साथी हैं जो हमें बनाते हैं।’

उनकी यह बात सुनकर पूरे माहौल में एक संवेदना भर गई। उस पूरे दिन चले विचार-मंथन के दौरान उन्होंने सकारात्मकता का एक बीज, शायद जानबूझकर इसीलिए बोया ताकि वहां मौजूद हर उद्यमी ‘बिजनेस सॉल्यूशन’ की ओर बढ़े।

फंडा यह है कि हमारे अपने ही लोग हमें बिज़नेस में आगे बढ़ाते हैं और अगर कभी ऐसा ‘धीमी प्रगति’ का दौर आता भी है तो यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उनका खयाल रखें। आखिर में वे ही कम्पनियां दिन दूनी- रात चौगुनी तरक्की करती हैं जो ग्राहकों के पहले अपने कर्मचारियों को भी महत्व देती है।

मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए 9190000071 पर मिस्ड कॉल करें

एन. रघुरामन

मैनेजमेंट गुरु

raghu@dbcorp.in

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