- Hindi News
- Local
- Punjab
- Ludhiana
- Ludhiana News If You Do Not Separate Wet And Dry Waste From Today The Houses Will Be Charged 250 Rupees 5000 Will Be Fined On The Commercial
गीला-सूखा कूड़ा अलग नहीं किया तो आज से घरों पर 250 रु., कॉमर्शियल पर 5000 जुर्माना लगेगा
डोर टू डोर कलेक्शन. सिर्फ 35% एरिया ही कवर कर पाई एटूजेड
सूखा और गीला कूड़ा अलग-अलग नहीं रखने पर वीरवार से नगर निगम शहरवासियों से जुर्माना वसूलेगा। इसके तहत रेजिडेंशियल से लेकर कॉमर्शियल और हर केटेगरी के लिए वॉयलेशन पाए जाने पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एंड क्लीननेस एंड सेनिटेशन बायलॉज के तहत कार्रवाई होगी। रेजिडेंशियल के लिए 250 और कॉमर्शियल को 5 हजार रुपए का चालान हाेगा। अब लोगों को अपने कूड़ा कलेक्टर कोे कचरा अलग-अलग करके ही देना होगा।
संबंधित प्रस्ताव निगम की हाउस मीटिंग में मंजूर किया जा चुका है, लेकिन लोकल बॉडीज डिपार्टमेंट से हरी झंडी नहीं मिली है। यहां तक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर निगम का खुद का प्रबंधन आधा-अधूरा है। शहर में सार्वजनिक स्थानों, पार्कों, बाजारों, ईटिंग पॉइंट्स पर हर जगह सूखे-गीले कूड़े के अलग अगल डस्टबिन नहीं दिखते हैं। ज्यादातर सेकंडरी डंप पर हर तरह का कचरा मिक्स होकर फैला रहता है। वहीं, निगम की जॉइंट कमिश्नर और हेल्थ ब्रांच की इंचार्ज स्वाति टीवाना का कहना है कि हाउस में मंजूरी के बाद सरकार 8-9 माह तक नोटिफिकेशन जारी नहीं करती तो उस प्रस्ताव को मंजूर माना जाता है। सरकार बाद में जब चाहे नोटिफिकेशन जारी कर सकती है।
33 तरह के चालान
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर निगम ने 33 प्रकार के चालान का प्रावधान किया है। इसमें से प्रमुख रूप से ये हैं।
रोजाना शहर में निकलता है 1100 टन कूड़ा, निजी कंपनी को ठेका, फिर भी गंदगी
शहर से रोजाना 1100 टन के करीब कूड़ा निकलता है। कई वॉर्डों में ये भी समस्याएं हैं कि निगम के खुद के कूड़ा कलेक्टर भी गीले व सूखे कूड़े को अलग-अलग लेकर नहीं जाते हैं।
कचरा अलग नहीं किया तो ऐसे होगी शिकायत
दरअसल, निगम की तरफ से चालान काटने की योजना कुछ इस तरह से बनाई है कि जब लोगों के घरों या कॉमर्शियल साइट्स पर कूड़ा कलेक्शन के लिए निजी या सरकारी कर्मी जाएगा तो वो ही उस जगह की सूचना निगम के एरिया सुपरवाइजर को देगा कि किसने गीला-सूखा कूड़ा अलग करके नहीं दिया है। इसके बाद हेल्थ ब्रांच की टीम मौके पर जाकर रेजिडेंशियल है तो 250 रुपए का चालान और कॉमर्शियल है तो सीधे 5 हजार रुपए का चालान मौके पर ही एक बार का काटते हुए नोटिस दिया जाएगा। जबकि फिर से चेकिंग होने पर लापरवाही पाई तो दोबारा चालान होगा।
कूड़ा कलेक्ट करने वाले देंगे हेल्थ ब्रांच को सूचना, फिर अफसर काटेंगे चालान
पार्कों, बाजारों, सार्वजनिक स्थानों पर न तो सौ फीसदी डस्टबिन रखा पाए, न ही डोर टू डोर कलेक्शन लागू, सेकेंडरी पॉइंट्स पर भी सेग्रीगेशन फेल, निगम की खुद का कचरा प्रबंधन आधा-अधूरा, बस पब्लिक पर सख्ती की तैयारी
कूड़ा प्रबंधन को लेकर निगम की नीयत में कचरा
{ओडीएफ के तहत के बनवाए गए शौचालयों की हालत कब की खस्ताहाल हो चुकी है। कहीं दरवाजे तो कहीं पानी नहीं है।
{शहर में गीला-सूखा कूड़ा अलग-अलग करने को पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं किया गया। लोगों को जागरूक करने के लिए सेमिनार, रैलियां या वर्कशॉप के नाम पर केवल खानापूर्ति ही हुई है।
{रेजिडेंशियल में 250, जबकि मैरिज-पार्टी हॉल व लॉन, क्लब, एग्जीबिशन सेंटर, मेला ग्राउंड, सिनेमा, कम्युनिटी हॉल, मल्टीप्लेक्स और अन्य बड़े स्तर पर कूड़ा जनरेट करने वालों पर कॉमर्शियल संस्थानों पर ~5000।
{दुकानों, फैक्ट्रियों और अन्य नॉन रेजिडेंशियल यूनिटों पर ~1000।
{सार्वजनिक स्थानों पर पशुओं का गोबर डंप करने पर 5 हजार रु.। पालतू जानवरों की गंद पब्लिक प्लेस या सड़कों पर फेंकने पर 1000 रुपए।
{नदी-नालों में कूड़ा फूंकने पर 5 हजार, वहीं सड़कों पर गंदगी फैलाने पर 1500 रुपए जुर्माना।
{फल-सब्जी विक्रेता द्वारा कूड़ेदान का प्रबंध न करने पर 750 रुपए।
{सैलून वालों द्वारा काटे गए बाल सड़कों पर फेंकने पर ~1000, वहीं, ओपन में शौचालय जाने पर 500 रुपए जबकि पब्लिक प्लेस पर थूकने पर 250 रुपए।
{कंस्ट्रक्शन के दौरान निकला मलबा सार्वजनिक स्थानों पर फेंकने पर 2000 रुपए।
एनजीटी की सख्ती का भी असर
निगम ने एटूजेड कंपनी को कूड़ा प्रबंधन का ठेका दे रखा है। डोर-टू-डोर कलेक्शन की जिम्मेदारी इसी की है। लेकिन यह कंपनी शहर में सिर्फ 35 फीसदी एरिया ही कवर कर पा रही है। बाकी 65 फीसदी एरिया में अभी तक निजी और निगम के कर्मी ही कूड़ा उठा रहे हैं।
वातावरण प्रदूषित न हो इसके लिए एनजीटी ने पीपीसीबी और लोकल बॉडीज डिपार्टमेंट पर सख्त है। कूड़ा के निस्तारण को लेकर अभी तक निगम फेल साबित हुआ है। कोताही को लेकर लाखों रुपए का जुर्माना भी निगम पर लग चुका है। उसी का असर है कि निगम ऐसा कदम उठाने जा रहा है।
{सेकेंडरी कूड़ा डंपों से लिफ्टिंग को सही नहीं है। दोपहर तक भी डंप ओवरफ्लो होते रहते हैं, ऐसे में जो गीला-सूखा कूड़ा अलग-अलग होकर आता भी है, वो कमजोर लिफ्टिंग के चलते डंप पर आकर मिक्स हो जाता है।
{पार्कों, बाजारों, ईटिंग पाॅइंट्स व अन्य पब्लिक प्लेस पर हर जगह सूखे-गीले कूड़े के लिए डस्टबिन नहीं रखे गए हैं। कम ही जगहों पर टूटे-फूटे डस्टबिन दिखते हैं।
{ओडीएफ के तहत के बनवाए गए शौचालयों की हालत कब की खस्ताहाल हो चुकी है। कहीं दरवाजे तो कहीं पानी नहीं है।
निगम का खुद का प्रबंधन आधा-अधूरा ऐसे...