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महान बनना चाहते हैं तो त्याग करना जरूरी

2 वर्ष पहले
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर शिमलापुरी स्थित माता वैष्णो मंदिर में चल रही शिव कथा के दूसरे दिन विमल जैन, जगमोहन मक्कड़, गुरदीप कोहली, धरमिंदर सिंह, सीपी आचार्य, पं. महेश चंद्र ने ज्योति प्रचंड की। कथा में साध्वी प्रागल्वा भारती ने कहा कि भगवान शिव ने जनकल्याण के लिए विषपान किया। अमृत देवताओं को देकर मानव जाति को संदेश दिया कि यदि आप महान बनना चाहते हो तो तुम्हें त्याग करना पड़ेगा। धर्म एक है, जो आदि काल से चला आ रहा है। वह कहीं बाहर नहीं, अपितु तुम्हारे भीतर है। ईश्वर को अंत:करण में देख लेना ही वास्तविक धर्म है। धर्म का अर्थ अपने मूल परमात्मा से जुड़ना है। हमें मूल ईश्वर से जुड़ने और धर्म को जानने के लिए ब्रह्म निष्ठ गुरु का सानिध्य प्राप्त करना पड़ेगा। जब जीवन में पूर्ण गुरु का पर्दापण होगा तो वे हमें ब्रह्म ज्ञान प्रदान कर ईश्वर के दर्शन करवा कर वास्तविक धर्म से अवगत करवाते हैं। प्रभु पिपासुओं ने शिव कथामृत यज्ञ में पहुंच कर जीवन को कृतार्थ किया। प्रभु की पावन आरती में न्यू अमर नगर ज्वाला मंडली के कुलवंत रानी, प्रेम शर्मा, सुनीता रानी उपस्थित रही।

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