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माछीवाड़ा में 8वीं के 246 छात्रों ने मोमबत्ती की रोशनी में दी परीक्षा

एक वर्ष पहले
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पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने 8वीं की परीक्षा को लेकर सभी प्रबंध मुकम्मल करने के दावे किए थे। लेकिन माछीवाड़ा के एक सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बच्चों को मोमबत्तियों की रोशनी में परीक्षा देना पड़ा। सुबह 9 बजे माछीवाड़ा के श्री शंकर दास सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में परीक्षा शुरू हुई। जिसमें विभिन्न स्कूलों से परीक्षा देने आए 246 विद्यार्थियों ने भाग लिया। परीक्षा शुरू होने से कुछ समय बाद ही लाइट चली गई। जिस कारण परीक्षा केंद्र में अंधेरा छा गया। परीक्षा लेने वाले अध्यापकों द्वारा बेशक केंद्र की खिड़कियां खोल दीं गई। लेकिन मौसम खराब होने से जब बच्चों को रोशनी पूरी न मिली तो कुछ डेस्कों पर मोमबत्तियां जला दी गईं। परीक्षा केंद्र में ऐसे हालात भी देखने को मिले कि कई विद्यार्थियों को रोशनी नहीं मिल रही थी। 12 बजे परीक्षा खत्म होने तक लाइट नहीं आई।

शिक्षा विभाग के अफसर का बेतुका बयान

इस बारे में जब पंजाब के सरकारी स्कूलों के परीक्षा केंद्रों के कंट्रोलर अफसर जनक राज से बात की गई ताे उन्होंने कहा कि मैंने लालटेन की रोशनी में पढ़ा। यदि बच्चों ने मोमबत्ती की रोशनी में परीक्षा दी तो क्या हुआ। उन्होंने कहा कि कहा वह खुद लालटेन मेें पढ़े हैं और यदि बच्चों ने मोमबत्ती की रोशनी में परीक्षा दी तो क्या हो गया। और सवाल पूछने पर गुस्से में आ गए और फोन काट दिया।

इधर, पंजाब परीक्षा कंट्रोलर ने कहा-मैं खुद लालटेन की रोशनी में पढ़ा, बच्चों ने मोमबत्ती की रोशनी में परीक्षा दी तो क्या हुआ

जेनरेटर नहीं मिला किराए पर : परीक्षा कंट्रोलर लखवीर सिंह ने बताया कि स्कूल का अपना कोई जेनरेटर नहीं है। इसलिए परीक्षा के मद्देनजर उन्होंने शहर में जेनरेटर किराए पर लेने का प्रबंध करने की कोशिश की। लेकिन नहीं मिला। उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षा विभाग द्वारा जो जरनेटर का किराया होता है उसकी भी अदायगी नहीं की जाती। लेकिन फिर भी उन्होंने अपने स्तर पर जरनेटर का प्रबंध करने की कोशिश की थी।  


परीक्षा कंट्रोलर की बनती है जिम्मेदारी : परीक्षा केंद्र के सुपरिंडेंट सरबजीत सिंह ने कहा कि यहां लाइट के प्रबंध करने परीक्षा कंट्रोलर की जिम्मेदारी है। वह तो बाहर के स्कूलों के अध्यापक हैं। लाइट जाने पर जरनेटर का प्रबंध करने को उनकी तरफ से कंट्रोलर को बता दिया गया था। लेकिन जरनेटर का प्रबंध न होने से उनको मजबूरन मोमबत्तियां जला कर विद्यार्थियों को रोशनी का प्रबंध करना पड़ा।

वहीं, विद्यार्थियों ने बताया कि लाइट न होने से वह आज सामाजिक शिक्षा के 70 अंकों में से ज्यादा अंक का प्रश्न पत्र हल न कर सके। कमजाेर नजर वाले बच्चों को और भी ज्यादा परेशानी हुई। बच्चांे ने सरकारी सिस्टम पूरी तरह से कोसा।


कमजोर नजर वाले विद्यार्थी हुए ज्यादा परेशान

अव्यवस्था : श्री शंकर दास सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में परीक्षा शुरू होते ही लाइट हुई गुल, खराब मौसम से कमरे में छाया रहा अंधेरा
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