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जरखड़ अकेडमी ने 2-0 से जीता हॉकी मुकाबला

2 वर्ष पहले
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स्पोर्ट्स रिपोर्टर। लुधियाना| पंजाब सरकार के खेल विभाग की आेर से मिशन तंदरुस्त के तहत जिला स्तरीय खेल मुकाबले अंडर-18 वर्ग में कराए गए। जिसके तहत एथलेटिक्स, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, खो-खो, जूडो, जिमनास्टिक, कुश्ती, वॉलीबाल, फुटबॉल, बॉक्सिंग, रोलर स्केटिंग, हैंडबॉल व वेटलिफ्टिंग के मुकाबले हुए।

बॉक्सिंग के मुकाबले में 45-48 किग्रा वर्ग लड़कियों में कमलजोत कौर पहले, हरमिंदर दूसरा स्थान हासिल किया। जबकि 48-51 किग्रा वर्ग में पहला स्थान कुसुम ने और दूसरा स्थान जसप्रीत कौर चकर ने प्राप्त किया। इसी तरह 51-54 किग्रा वर्ग में नवदीप कौर चकर ने पहला, सपना रानी ने दूसरा व हरमनप्रीत कौर ने तीसरा स्थान हासिल किया। वहीं 54-57 किग्रा वर्ग में मनप्रीत कौर ने पहला स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा 57-60 किग्रा वर्ग में कोमलजीत कौर ने पहला, अमनप्रीत कौर ने दूसरा व अनीसा ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। इसी तरह 60-64 किग्रा वर्ग में रचना ने पहला, दलजीत कौर ने दूसरा व गगनदीप कौर ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। इसी कड़ी में 64-69 किग्रा वर्ग में रश्मी ने पहला, सुमनप्रीत ने दूसरा स्थान हासिल किया। वहीं 69-75 किग्रा वर्ग में हरिसीता मोदी ने पहला, कोमलप्रीत कौर ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। टेबिल टेनिस के फाइनल मुकाबलों में लड़कों में गुरु नानक स्टेडियम की टीम ने पहिला, साई कोचिंग सेंटर ने दूसरा, ग्रीन लैंड स्कूल सुभाष नगर व बाल भारती स्कूल दुगरी ने तीसरा स्थान हासिल किया। वहीं लड़कियों के मुकाबलों में गुरु नानक स्टेडियम की टीम ने पहला, हिंदू पुत्री पाठशाला खन्ना ने दूसरा व बाल भारती पब्लिक स्कूल दुगरी व ग्रीन लैंड स्कूल सुभाष नगर ने तीसरा स्थान हासिल किया। एथलेटिक्स लड़कों के लंबी छलांग मुकाबलों में जसकरन सिंह जीएचजी खालसा कॉलेज गुरसर सुधार ने 6.55 मीटर के साथ पहला स्थान, साहिल 6.4 मीटर के साथ दूसरा व लवप्रीत सिंह रायकोट ने 5.90 मीटर के साथ तीसरा स्थान हासिल किया।

लड़कियों के मुकाबलों में रेणु खालसा कालेज फार वूमेन ने 5.35 मीटर के साथ पहला, अर्शदीप कौर खालसा कालेज फार वूमेन ने 5.27 मीटर के साथ दूसरा व हरमनदीप कौर ने 5.15 ने तीसरा स्थान हासिल किया। इसके अलावा जैवलिन लड़कों के मुकाबलों में जसप्रीत सिंह ने 51.69 मीटर के साथ पहला, मोहवीर सिंह ने 44.22 मीटर के साथ दूसरा व हरीश सिंह रावत ने 42.34 मीटर के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। वही लड़कियों के मुकाबलों में अनमोल प्रीत कौर ने 25.60 मीटर के साथ पहला, कमलदीप कौर ने 19.48 मीटर के साथ दूसरा व गुरप्रीत कौर ने 17.79 मीटर के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया। जबकि डिस्कस थ्रो में लड़कों के मुकाबलों में लवप्रीत सिंह ने 25.30 मीटर के साथ पहला, विवेक ने 23.95 मीटर के साथ दूसरा व अमरीक सिंह ने 22.2 मीटर के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। लड़कियों के मुकाबलों में गुरबानी कौर ने 29.17 मीटर के साथ पहला, गुरप्रीत कौर ने 24.67 मीटर के साथ दूसरा व अनमोल प्रीत कौर ने 23.31 मीटर के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। जबकि वालीबॉल लड़कों के मुकाबलों में गुरु नानक स्टेडियम की टीम-ए ने पहला, गुरु नानक स्टेडियम बी टीम ने दूसरा व नरेश चंद स्टेडियम खन्ना की टीम ने तीसरा स्थान हासिल किया।

कुश्ती में लड़कियों में 50 किग्रा वर्ग में रितिका शर्मा ने पहला, मानसी ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। इसी तरह 53 किग्रा वर्ग में किरन ने पहला, प्रीति ने दूसरा, सिमरन शाह ने तीसरा स्थान हासिल किया। जबकि 55 किग्रा वर्ग में महक ने पहला स्थान प्राप्त किया। वहीं 65 किग्रा वर्ग में सिमरन ने पहला स्थान हासिल किया। इसके अलावा 72 किग्रा में मीनू ने पहला, 76 में पूजा रानी ने पहला स्थान हासिल किया। बास्केटबॉल लड़कों के मुकाबलों में जिमखाना क्लब ने पहला, जिमखाना कालेज ने दूसरा व जिम्मी ज्वाय एकेडमी ने तीसरा स्थान हासिल किया। हैंडबाल लड़कियों के सेमीफाइनल मुकाबलों में अमृत इंडो कैनेडियन स्कूल की टीम ने पीएयू को 18-18 के अंतर से तो पीएयू ने सीसै स्कूल सिमेट्री रोड को 14-6 के अंतर से हराया। हाॅकी लड़कों के सेमीफाइनल मुकाबलों में जरखड़ अकादमी ने गांव घवद्दी की टीम को 2-0 और मालवा एकेडमी ने किला रायपुर की टीम को 2-0 के अंतर से हराया।

लड़कियों के मुकाबलों में खालसा कालेज फार वूमेन की टीम ने खालसा सीसै स्कूल की टीम को 3-0 और सरकारी कालेज लड़कियों की टीम ने पीएयू की टीम को 5-0 के अंतर से हराया। फुटबाल लड़कियों के फाइनल मुकाबलों में जीएचजी खालसा कालेज गुरसर सुधार की टीम ने पहला, सराभा की टीम ने दूसरा व पक्खोवाल की टीम ने तीसरा स्थान हासिल किया।

लुधियाना सहोदया स्कूल कॉम्प्लेक्स स्वीमिंग कंपीटिशन

बाल भारती स्कूल ने जीती ओवरअॉल ट्रॉफी

लुधियाना|बाल भारती पब्लिक स्कूल ने 6 और 7 अगस्त को लुधियाना सहोदय स्कूल कॉम्प्लेक्स स्वीमिंग कंपीटिशन की मेजबानी की। लुधियाना में 21 स्कूलों के 231 स्विमर एक साथ प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आए, विभिन्न शैलियों में अपने स्विमिंग टैलेंट का प्रदर्शन किया। बाल भारती पब्लिक स्कूल के स्विमर्स ने ओवरऑल चैंपियनशिप ट्रॉफी जीती। जीसस सेक्रेड हार्ट स्कूल और सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल ने क्रमशः फर्स्ट रनर अप और सेकंड रनर अप ट्रॉफी हासिल की।

ननकाना साहिब पब्लिक स्कूल के स्टूडेंट्स का शानदार प्रदर्शन

कुश्ती में तरनवीर सिंह ने लिया पहला स्थान

लुधियाना|ननकाना साहिब पब्लिक स्कूल, गिल पार्क के स्टूडेंट्स गुरु नानक स्टेडियम में आयोजित जिला स्तरीय कुश्ती टूर्नामेंट में विजेता बने। अंडर 14 में तरनवीर सिंह ने पहला और गुरशरण सिंह ने तीसरा स्थान लिया। अंडर 18 वर्ग में कमलप्रीत सिंह को तीसरा स्थान मिला। एथलेटिक्स में, अंडर -19 लड़कियों में, लीखत सिंह ने 1500 मीटर में तीसरा और 3000 मीटर में चौथा स्थान हासिल किया। अंडर -19 ब्वॉयज में मनवीर सिंह 400 मीटर में तीसरे और 800 मीटर रेस मंे भी तीसरे स्थान पर रहे। मनवीर को राज्य रिले टीम के लिए चुना गया।

 

गहन ज्ञान में दिलों को जीतने की ताकत होती है!

26 दिसंबर 2012 का दिन था। वे लाल रंग की पोलका डॉट वाली रेशमी साड़ी में डायस पर खड़ी थीं। उन्होंने साड़ी के रंग की बड़ी सी बिंदी लगाई थीं, लेकिन वह उनके मस्तक की तुलना में थोड़ी बड़ी थी। उस दिन वे साउथ इंडियन एजूकेशन सोसायटी (एसआईएईएस) द्वारा प्रदान किए जाने वाले श्री चंद्रशेखरानंद सरस्वती नेशनल एमिनेन्स अवॉर्ड लेने पहुंची थीं। उस दिन मुंबई के मशहूर शणमुखानंद ऑडिटोरियम में कांची पीठ के स्व. शंकराचार्य श्रीजयेंद्र सरस्वती की गरिमामय उपस्थिति में उनके साथ अभिनेता अमिताभ बच्चन, टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञ सैम पित्रोदा और चिन्मय मिशन के स्वामी तेजोमयानंद को भी यह सम्मान दिया जा रहा था। यह सम्मान उन्हें उनकी जनसेवा और नेतृत्व के लिए दिया जा रहा था, जिसमें एक प्रशस्ति पत्र, बड़ी-सी दीपमाला और ढाई लाख रुपए का नकद पुरस्कार शामिल था। मंच के एक कोने में मेरे परम श्रद्धेय स्वामी जयेंद्र सरस्वती विराजमान थे। उस दिन वे मेरे पसंदीदा कलाकार अमिताभ बच्चन के ठीक बगल में खड़ी थीं और उनके चेहरे को 90 डिग्री के कोण पर अपनी ठोढ़ी उठाए देख रही थीं। वहां सामने की कतार में बैठा, मैं सोच रहा था कि आज उनका कद इस 6.2 फीट लम्बे महानायक से ऊंचा लग रहा है। ऐसा इसलिए था, क्योंकि मैं इससे पहले कभी ऐसे किसी नेता से नहीं मिला था जो इतनी शुद्ध संस्कृत बोलने की क्षमता रखता है। अपने भाषण में उन्होंने संस्कृत की महत्ता का उल्लेख करते हुए रावण विजय के लिए पहुंचे राम द्वारा की गई भगवान शंकर की स्तुति का उल्लेख किया जो रूद्राष्टकम के रूप में श्रीरामचरितमानस में समाविष्ट की गई है, जो इस प्रकार है-

‘नमामीशमीशान निर्वाण रूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदः स्वरूपम्। निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाश माकाशवासं भजेऽहम्‌’॥

इसके उपरांत कुछ ही क्षणों में उन्होंने अपना स्वर बदला और हमसे कहा, ‘क्या आप जानते हैं उसी समय रावण ने भी राम पर विजय प्राप्ति के लिए भगवान शंकर की अर्चना की थी, जो उसने स्वयं रची थी और ‘शिव तांडवस्रोतम’ में समाविष्ट है। उसके शब्द इस प्रकार हैं-

‘जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्। डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्…’

बिना कोई कागज में देखे वे धाराप्रवाह एक के बाद एक श्लोक बोलतीं गईं, जैसे हर रोज उनका वाचन करती हों। जब वे श्लोक बोल रही थीं, तो दर्शकों में बैठे मुझ जैसे लोग सोच रहे थे कि संस्कृत के इन पदों को भगवान राम ने कैसे उच्चारित किया होगा और कैसे रावण ने शिव अर्चना की होगी! हमारी इस जिज्ञासा को उन्होंने अपने स्वर से शांत किया और समझाया कि तांडवस्रोतम में रावण का घमंड, जबकि रूद्राष्टकम में राम का समर्पण स्पष्ट रूप से नज़र आता है। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में संस्कृत वास्तव में एक ‘जन भाषा’ थी और फिर राजा भोज और एक लकड़हारे की कहानी सुनाते हुए बताया कि कैसे राजा भोज के गलत संस्कृत उच्चारण को जंगल से माथे पर लकड़ियां लेकर जाते एक लकड़हारे ने शुद्ध किया था।

अपने भाषण में उन्होंने बताया कि विश्व में संस्कृत एकमात्र ऐसी भाषा है जो ‘टॉकिंग कम्प्यूटर’ की सभी जरूरतों को पूरा करती है और आने वाले भविष्य में यह वास्तविकता होगी। फिर उन्होंने संस्कृत की उपयोगिता को व्याकरण और उसके उच्चारण के दर्जनभर उदाहरणों से समझाया। चूंकि साउथ इंडियन एजुकेशन सोसायटी ऐसा संस्थान है, जहां बच्चों को संस्कृत और वेदों की शिक्षा दी जाती है और इसीलिए उन्होंने पूरी सम्मान राशि संस्थान को इस विनती के साथ लौटा दी कि आप इसका इस्तेमाल संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए कीजिए। उनके कद की श्रेष्ठता को उनके इस दान से नहीं तौला जा सकता, क्योंकि अमिताभ ने भी अपनी सम्मान राशि एक अन्य नेक कार्य के लिए दे दी थी। उनका कद तो संस्कृत में उनकी निपुणता के कारण था। मुझे लगता है कि उसके बीचे उनका गहन अध्ययन है। उन्होंने अपने भाषण से वहां मौजूद हर एक व्यक्ति के साथ तादाम्य स्थापित किया। उनका शब्द चयन अमिताभ की तरह बेहद कुशल था। पित्रोदा को उन्होंने टेक्नोलॉजी और कम्प्यूटर के माध्यम से छुआ, धर्मगुरु उनकी आस्था से प्रभावित थे और बाकी मौजूद हजारों लोगों के मन को छूने के लिए उनकी मौलिक कहानियां पर्याप्त थीं। अब वक्त है उस शख्सियत का परिचय जानने का- वह और कोई नहीं सुषमा स्वराज थीं, जो सार्वजिनक जीवन में गरिमा, साहस और निष्ठा की प्रतीक थी और मंगलवार की रात 67 वर्ष की आयु में भौतिक शरीर को छोड़कर चली गईं। अब मैं जब भी कभी संस्कृत शब्द से रूबरू होता हूं, तो मुझे उनका स्मरण हो आता है। सुषमा स्वराज ने मेरे अंदर संस्कृत के प्रति ठीक वैसा ही प्रेम जगाया, जैसा मेरी इतिहास की शिक्षक ने मेरे अंदर उस विषय के लिए पैदा किया था।

फंडा यह है कि किसी भी विषय का गहन ज्ञान दिलों को जीतने और कई चुनौतियों का मुकाबला करने की शक्ति प्रदान करता है।

मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए 9190000071 पर मिस्ड कॉल करें

एन. रघुरामन

मैनेजमेंट गुरु

raghu@dbcorp.in

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