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सरकारी जमीनों का खसरा नंबर बदल 3 फर्जी लोगों को बनाया मालिक, मिलने थे मुआवजे के 2.36 करोड़ रुपए

Ludhiana News - नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) -5 की तरफ से लुधियाना-खरड़ हाईवे प्रोजेक्ट के तहत सड़क को चौड़ा करने के लिए...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 08:21 AM IST
Ludhiana News - khasra number of government lands changed 3 fake people made owners to get rs 236 crore compensation
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) -5 की तरफ से लुधियाना-खरड़ हाईवे प्रोजेक्ट के तहत सड़क को चौड़ा करने के लिए जमीनों को एक्वायर किया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत जिला प्रशासन के रेवेन्यू डिपार्टमेंट और एनएचएआई के अफसरों ने मिलीभगत करते हुए सरकारी जमीन को प्राइवेट बताया और फर्जी व्यक्तियों के नाम(इंदराज) दर्ज करवा कर करोड़ों रुपए के घोटाले को अंजाम दिया है। इस घोटाले की पर्तें तब खुली जब शिकायत एसडीएम पश्चिमी कम भूमि अधिग्रहण अधिकारी अमरिंदर सिंह मल्ली के पास पहुंची और उन्होंने जांच करते हुए रेवेन्यू रिकाॅर्ड की जांच करवाई। जांच में पता चला कि जिन तीन व्यक्तियों के नाम दर्ज किए गए थे, उनका गांव समराला और घुलाल में मालिकाना रिकाॅर्ड ही नहीं है। एसडीएम मल्ली ने घोटाले को अंजाम देने वालों में दो पटवारियों राकेश कुमार और धर्मिंदर सिंह के अलावा मुआवजे के लिए फर्जी धारक बने तीन व्यक्तियों में अनिल कुमार पुत्र धर्मपाल, विनय कुमार पुत्र नाहर सिंह और राजेश कुमार पुत्र हुकम सिंह पर थाना डिवीजन नंबर-5 में एफआईआर दर्ज करवाते हुए उच्च स्तरीय जांच शुरू की गई है। एसडीएम ने बताया कि रेवेन्यू डिपार्टमेंट और एनएचएआई के अफसरों ने तीन ऐसे फर्जी लोगों को मुआवजे के लिए पेश किया था, जिनका रेवेन्यू डिपार्टमेंट में कोई रिकाॅर्ड ही नहीं है। जबकि इनकी मिलीभगत के साथ पेश किए गए तीनों फर्जी लोगों में से एक व्यक्ति को मुआवजे की 1.23 करोड़ की अदायगी भी हो चुकी है, जबकि दो अन्यों की पेमेंट को घोटाला सामने आते ही रोक दिया गया है। एसडीएम की तरफ से रेवेन्यू डिपार्टमेंट के अफसरों के सस्पेंशन के आॅर्डर जारी कर दिए गए हैं।

थाना डिवीजन पांच में दो पटवारी समेत पांच लोगों पर पर्चा




खुलासा होने पर दो का रोका फंड

एसडीएम ने बताया कि इस संबंधी जो मुआवजे की अदायगी की गई और असली जमाबंदियों को संबंधित पटवारियों के जरिए मंगवा कर चेक किया गया था। उसके तहत अनिल कुमार पुत्र धर्मपाल को 51,74,095 रुपए और 71,96,267 रुपए की अदायगी हो चुकी है। इसी तरह विनय कुमार पुत्र नाहर सिंह को 1,04,50,934 रुपए और राजेश कुमार पुत्र हुकम सिंह को 7,99,585 रुपए की अदायगी की जानी थी, लेकिन घोटाला सामने आते ही यह फंड रुकवा दिया गया है।

एनएचएआई, रेवेन्यू अफसरों ने समराला, घुलाल में की मिलीभगत, एक व्यक्ति को 1.23 करोड़ का फंड जारी

एसडीएम पश्चिम अमरिंदर सिंह मल्ली ने जांच कर पकड़ा घोटाला।

ऐसे दिया घोटाले को अंजाम

तहसील समराला में खसरा नंबर-102 गांव समराला और खसरा नंबर 19/4 गांव घुलाल की मालकी को बदला गया था। गांव समराला का खसरा नंबर-102 यह एक शामलाट की जगह है, जबकि 19/4 फर्द अनुसार गांव घुलाल में इसकी कोई मालकी नहीं है, जो कि एक सरकारी जमीन है। जबकि तीसरे केस में इसी तरह का फर्जी खसरा नंबर तैयार किया गया था। इन सरकारी जगह को प्राइवेट काॅमर्शियल साइटें बताते हुए 2.36 करोड़ का घोटाला किया गया है।

एसडीएम मल्ली ने बताया कि शिकायत के बाद उन्होंने इसकी जांच की तो पता चला कि गांव समराला और घुलाल में नेशनल हाईवे की तरफ से एक्वायर किए गए रकबे के असेसमेंट रजिस्टरों और ए-रोल्ज में तीन व्यक्तियों के गलत नाम दर्ज करके मुआवजा धारक बनाया गया है। इस संबंध में जांच करते हुए पाया कि कागजों पर पटवारी, कानूनगो, तहसीलदार और एनएचएआई के अफसरों के हस्ताक्षर थे। जांच में घोटाला पाए जाने पर पता चला कि इन लोगों ने अनिल कुमार पुत्र धर्मपाल, विनय कुमार पुत्र नाहर सिंह और राजेश कुमार पुत्र हुकम सिंह के फर्जी नाम दर्ज किए थे। जिनका गांव समराला और घुलाल में एक्वायर की हुई जमीन का कोई मालिकाना हक नहीं था।

कार्रवाई पर उठते सवाल





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