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कॉलोनाइजरों ने किसानों से जमीन लेकर रजिस्ट्री कराई नहीं, पावर ऑफ अटॉर्नी से बेची, रेगुलराइजेशन का सारा भार प्लाट होल्डर्स पर

प्रवीण पर्व / राणा रणधीर | जालंधर/पटियाला प्लाॅट रेगुलर न होने से किसी का होम लोन रुका था तो किसी की रजिस्ट्री या...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:40 AM IST

प्रवीण पर्व / राणा रणधीर | जालंधर/पटियाला

प्लाॅट रेगुलर न होने से किसी का होम लोन रुका था तो किसी की रजिस्ट्री या फिर पैतृक जायदाद का बंटवारा। पिछली सरकार में 5 साल प्लाॅट रेगुलराइजेशन पाॅलिसी में दिक्कतों की वजह से ये परेशानियां रहीं। नई कांग्रेस सरकार ने जो पाॅलिसी रिलीज की है, इनमें भी ये दिक्कतें बरकरार हैं। जिन 6 बातों की वजह से लगातार पाॅलिसियां लेट होती रही हैं, उन्हीं को इस बार भी लागू कर दिया। उल्टे, एक नया नियम लागू कर दिया कि प्लाॅट भी तभी रेगुलर होंगे जब कालोनी रेगुलराइज होगी। हकीकत ये है कि जब काॅलोनी काटकर प्लाॅट बेचे गए थे तो काॅलोनाइजरों ने जमीन पहले अपने नाम पर नहीं की थी। उन्होंने किसानों से प्लाॅट बिक्री की पावर आॅफ एटार्नी लेकर ये प्लाॅट उपभोक्ताओं को बेचे। अब जमीनों का सौदा उपभोक्ता व किसान के बीच हुआ है। किसान या तो जमीन बेचकर विदेश चले गए या फिर उन्हें कालोनी रेगुलर कराने की कोई दिलचस्पी नहीं है, फंस गए हैं तो प्लाॅटों के मालिक। प्रदेश के प्रमुख शहर लुधियाना में करीब 10 हजार, जालंधर में 800, अमृतसर में 1000, मोहाली के आसपास 2500 सहित करीब 30 हजार अवैध कालोनियां प्रदेश में हैं। 4 महीने में सरकार ने सबको प्लाॅट रेगुलर कराने को कहा है लेकिन कालोनाइजरों के गायब होने की वजह से प्लाॅट रेगुलर नहीं हो पा रहे हैं। जालंधर के गदईपुर में मनविंदर सिंह कहते हैं - किसान खेत बेचकर आस्ट्रेलिया चला गया था। प्रापर्टी डीलर ने पावर आफ अटार्नी पर प्लाॅट काटकर बेचे। हमने प्लाॅट खरीदा। अब आखिर किसान क्यों विदेश से आकर फीस देगा? कपूरथला की जसलीन कौर कहती हैं होम लोन लेकर घर बनाना है। बैंक ने मना कर दिया कि प्लाॅट रेगुलर कराएं। नगर कौंसिल के पास गए तो कहा गया पूरी कालोनी मंजूर होनी जरूरी है।

कॉलोनी रेगुलराइजेशन पॉलिसी के बारे में वो सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं

जिन लोगों ने कालोनी के लिए जमीन बेची केस में वही फंसेंगे

कॉलोनाइजर्स न मिले तो क्या प्लॉट होल्डर कॉलोनी रेगुलर करा सकते हैं?

जवाब- हां करा सकते हैं, लेकिन एक कॉलोनी में लगभग 80 से 100 प्लाट हैं। इतने लोगों को एक मंच पर लाकर प्रति प्लाट फीस इकट्ठी करने के लिए मनाना एसोसिएशन के लिए प्रेक्टिकली काफी मुश्किल है।

पॉवर ऑफ अटोर्नी पर जमीन बिकी है, कार्रवाई किस पर होगी।

जवाब- जिन लोगों ने कॉलोनी काटने के लिए अपनी जमीन दी है, वही केस में फंसेंगे। कॉलोनाइजरों को किसी तरह के पर्चे का भी डर नहीं होगा। चूंकि जमीन मालिक भी अब इसे बेच चुके हैं, ताे ऐसे में वो रेगुलराइजेशन के लाखों रुपए भी नहीं भरेंगे तो फिर मार प्लॉट खरीदने वालों पर ही पड़ेगी।

अवैध कॉलोनी पूरी तरह डेवलप है, एनओसी मिली हुई है तो क्या उनको छूट होगी?

जवाब- हां, उनको छूट मिलेगी अौर बाकी प्लॉट या बिल्डिंग मालिकों को इस पॉलिसी में रेगुलराइजेशन कराना जरूरी होगा।

नहीं हैं इन सवालों के जवाब

खरीदारों पर ही कॉलोनाइजर की भी जिम्मेदारी डाल दी गई? अफसर कहते हैं अवैध कॉलोनी में लोगों ने प्लॉट क्यों खरीदे? जबकि इललीगल कॉलोनी बनी तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

प्लॉट होल्डर को कैसे पता चलेगा कि कॉलोनाइजर ने अप्लाई किया या नहीं? 20 अगस्त तक की डेडलाइन खत्म होने बाद ही यह पता चल पाएगा। इस पर खरीदार कॉलोनी रेगुलर कराना चाहें तो उसके लिए आगे मौका दिया ही नहीं गया?

पुरानी पॉलिसी के 6 नियम जो अब भी जारी हैं

1. फीस | 2013 में काॅलोनाइजरों से प्रति एकड़ कंपोजीशन फीस 90 लाख रुपये मांगे थे। नई पाॅलिसी में शहर में ही जहां सरकारी रेट प्रति फीट 2000 रुपये है, वहां तमाम सैसव चार्ज डालकर करीब 48,400 रुपये पड़ेंगे। काॅलोनाइजर नामीनल फीस चाहते हैं।

2. सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट | कालोनी में सीवरेज ट्रीटममेंट प्लांट के लिए जगह होनी चाहिए। ऐसी कालोनियां न के बराबर।

3. रोड्स | दस एकड़ तक की कालोनी की मेन रोड 35 फीट चौड़ी, 50 एकड़ तक में 45 फीट चौड़ाई, 50 एकड़ से ज्यादा होने पर रोड 60 फीट चौड़ी चाहिए। सबमें मेन एंट्री 25-30 फीट और आंतरिक रोड 15-20 फीट ही हैं।

6662 अवैध काॅलोनियाें का पता 5 साल में चला।

3,80,912 एप्लीकेशन रेगुलर प्लाटों के लिए आए।

3,33,634 एप्लीकेशन इनमें से मंजूर हुए।

250 करोड़ से अधिक सरकार ने कमाई की।

4. पावर आफ एटार्नी पर बिक्री | बहुत से मामलों में काॅलोनाइजर छिपी भूमिका में थे। इन्होंने जिन किसानों से जमीन खरीदी, उनकी पावर आफ एटार्नी पर सीधे उपभोक्ताओं को प्लाट बेचे। अब जमीन के सौदे किसान व उपभोक्ता के बीच हैं।

5. ऊंचाई | 15 मीटर तक की इमारत ही रेगुलर होगी। कई इमारतें 20 मीटर ऊंची हैं। फालतू ऊंचाई वाला हिस्सा तोड़ना होगा।

6. 35% एरिया यूटिलाइजेशन | कालोनी में पब्लिक बिल्डिंग, रोड्स, पार्क, वाटर पंप की रिजर्व स्पेस आदि का एरिया 35 परसेंट से कम न हो। हकीकत में अधिकतर कालोनियों में ये बहुत कम है। कई जगह गैरहाजिर।

पंजाब इकाेनॉमी पर बड़ा घाटा

इंडस्ट्री/रीयल एस्टेट |
घरों के लिए तमाम सामान बना रही इंडस्ट्री बार-बार जमीनों की रजिस्ट्री पर रोक लगने से मंदी में है और रीयल एस्टेट भी मंदी में है।

बैंकिंग | पिछले 6 महीने में पूरे पंजाब में केवल 8226 होम लोन ही नए रिलीज हुए हैं। वजह प्लाॅटों की रेगुलेराइजेशन पर रोक थी। ये लोन या तो पिछली पाॅलिसियों में पास प्लाटों पर हैं या फिर पुराने शहर में।

सीधी बात

शहरी विकास मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा से

आप ने सिर्फ चार महीने का समय दिया, लोग परेशान हैं

भास्कर- इस पॉलिसी से प्लॉट होल्डर्स कॉलोनाइजर्स सब परेशान हैं।

मंत्री- मुझसे अाकर मिले, मुझे अॉब्जेक्शंस दें, मैं वायदा करता हूं कि सब अॉब्जेक्शंस दूर होंगे।

भास्कर- पंजाब सरकार ने तो 4 महीने की डेडलाइन दे दी, लोगों को तो अापके पास अाने का समय ही नहीं दिया गया?

मंत्री- अगर सरकार ने 4 महीने की डेडलाइन बढ़ाई है तो अब सरकार ही तो अापसे कह रही है कि डेडलाइन अागे भी बढ़ सकती है। लोग हौव्वा न बनाएं।

भास्कर- पॉलिसी में कॉलोनी की सड़कें 30-35 फुट करने के लिए क्या लोगों को मकान ढहाएगी सरकार?

मंत्री- नहीं, हम लोगों के लिए ही काम कर रहे हैं, एेसा कुछ नहीं होगा। अगर कोई सही अॉब्जेक्शन होगा तो हम उस मद को पॉलिसी से दूर करेंगे।

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Web Title: कॉलोनाइजरों ने किसानों से जमीन लेकर रजिस्ट्री कराई नहीं, पावर ऑफ अटॉर्नी से बेची, रेगुलराइजेशन का सारा भार प्लाट होल्डर्स पर
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