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पीएचडी से फंड कलेक्ट करने के लिए शूटर शेरा का चचेरा भाई बनता था बिचौलिया

टारगेट किलिंग मामले में कोर्ट में दाखिल एनआईए की चार्ज शीट के अनुसार शेरा और रमन को यूके, इटली और आस्ट्रेलिया से...

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 04:30 AM IST
पीएचडी से फंड कलेक्ट करने के लिए शूटर शेरा का चचेरा भाई बनता था बिचौलिया
टारगेट किलिंग मामले में कोर्ट में दाखिल एनआईए की चार्ज शीट के अनुसार शेरा और रमन को यूके, इटली और आस्ट्रेलिया से फंडिंग होती थी। ये फंड केएलएफ के स्वंयभू प्रमुख हरमीत सिंह उर्फ पीएचडी उपलब्ध कराता था। शेरा को विदेशों से 19 किश्तों में 23 लाख 14 हजार 366 रुपए की राशि मिली। इटली से अलग-अलग लोग राशि भेजते थे। शेरा ने पीएचडी से फंड रसीव करने के लिए अपने चचेरे भाई अमरेंदर सिंह को आगे किया हुआ था। ताकि उस पर किसी को शक न हो। जबकि रमन को इंडिया से ही फंडिंग हो रही थी। फंडिंग से मिली वाली राशि से शेरा हथियार और महंगे गैजेट्स खरीदता था और रमनदीप लाइफ अपनी स्टाइल पर खर्च करता था। शुरुआत में शेरा इटली में रहते हुए इलेक्ट्रीशियन का काम और रमनदीप इडिंया में रहते हुए इम्पोर्टेड सिलाई मशीनों की मरम्मत का काम करता था। साजिश में शामिल होने के बाद शेरा व रमन ने काम छोड़ दिया और वह फंडिंग से ही स्टैंडर्ड मेंटेंन करते थे। शेरा 2013 और रमनदीप 2014 में पीएचडी के संपर्क में आया था। पहली वारदात को 18 जनवरी 2016 में अंजाम दिया गया। इस साजिश में कोई भी काम जल्दबाजी में नहीं किया गया। दोनों को ढूंढने, भर्ती व ट्रेनिंग के दौरान कई पहलू को ध्यान में रखा गया और उन्हें आपस में संपर्क रखने के लिए साधनों की जानकारी दी गई और फंडिंग भी उपलब्ध करवाई गई थी। राशि का भुगतान बिचौलिए के जरिए किया जाता था। वारदात के दौरान व रविंदर गोसाईं के मर्डर से पहले व बाद में कई ट्रांजेक्शन हुए। कई ट्रांजेक्शन वारदात के बाद उन्हें इनाम के तौर पर भी भेजी गई। शेरा को 2016-17 में इटली से वेस्टर्न व मनीग्राम के जरिए 8 बार, 2017 में आस्ट्रेलिया व यूके से 4 बार बैंक ट्रांसफर व 2017 में ही इटली व आस्ट्रेलिया से 7 बार हवाला के जरिए राशि पहुंची। जब कि इटली में रहते हुए भी उसे फंडिंग उपलब्ध करवाई जा रही थी। हरदीप सिंह उर्फ पीएचडी पहले वेस्टर्न यूनियन या मनीग्राम के जरिए फंड भेजता था जो कि वह गुरजिंदर सिंह उर्फ शास्त्री के जरिए इटली से भेजता था।


होटल में ठहरने को चुराए आईडी प्रूफ यूज करता था शेरा

दो ट्रांजेक्शन के दौरान शेरा ने फर्जी आईडी प्रूफ इस्तेमाल किया। होटल में ठहरने के लिए शेरा चुराए गए आईडी प्रूफ का इस्तेमाल करता था। तरनमनप्रीत नाम के युवक ने शेरा के चचेरे भाई को कई बार पैसे भेजे। ट्रांजेक्शन करते समय उसकी रसीद भी शेरा या अमरेन्द्र को व्हाट्सएप के जरिए भेजी जाती थी। इसे दिखा कर वह राशि लेता था। 50 हजार से अधिक की राशि अमरेन्द्र के बैंक अकाउंट में आती थी, जिसका वह सेल्फ चेक काट कर वह शेरा को देता था। आस्ट्रेलिया से होने वाली ट्रांजेक्शन शेरा की मां सुरेन्द्र कौर के अकाउंट के जरिए फरवरी से अप्रैल 2017 तक भेजी गई, जो बाद में शेरा ने निकलवाई।

शेरा व रमन का ब्रेन वाश कर साजिश का हिस्सा बनाया

रमनदीप मकैनिक का काम करते हुए 20 से 25 हजार रुपए महीना कमाता था। फंडिंग के बाद उसने मई 2017 में सेकेंड हैंड इनोवा 5 लाख 20 हजार रुपए में खरीदी। इसके लिए 3 लाख रुपए का लोन लिया। इसे पुलिस ने बाद में कब्जे में लिया था। रमनदीप के दरेसी ब्रांच में स्थित सेंट्रल बैंक के खाते मे केवल 53 हजार रुपए ही थे। वह अपने खाते से इनोवा की 16 हजार 183 रुपए की किश्त भी अदा करता था। रमनदीप 2016 व 2017 के दौरान लोगों को ब्याज पर भी पैसा देता था। जांच के दौरान पता चला कि वह लाइफ स्टाइल पर अधिक खर्च करता था। उसे भारी मात्रा में फंड दूसरे सूत्रों से उपलब्ध करवाए जाते थे। चार्ज शीट के अनुसार इस भारी फंडिंग का मुख्य उद्देश्य शेरा व रमन का ब्रेन वाश करना व सुख सुविधाएं देकर इस साजिश के साथ जोड़ कर रखना था।

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