सिर्फ एक मकसद के लिए ढाई साल से नंगे पैर पैदल घूम रहे है यह युवा, अब तक 12 हजार KM से ज्यादा की कर चुका है यात्रा / सिर्फ एक मकसद के लिए ढाई साल से नंगे पैर पैदल घूम रहे है यह युवा, अब तक 12 हजार KM से ज्यादा की कर चुका है यात्रा

Bhaskar News

Jan 10, 2019, 05:09 PM IST

अजय ने कहा- अगर सारे पैरेंट्स ऐसा करेंगे तो बच्चे कोई क्राइम नहीं करेंगे

Ludhiana News story of  26 year-old ajay oli of motivational counselor

लुधियानासिर्फ अपनी खुशी के लिए हर कोई जिता है, लेकिन दूसरों की खुशी के लिए कोई ही ऐसा कर पाता है। इस कहावत को ही अपने जीवन में सर्वोपरि रख देश को चाइल्ड लेबर और चाइल्ड बैगिंग से फ्री करना चाहता हूं। 29 सितंबर 2015 नंगे पैर पैदल यात्रा के साथ इस मुहिम की शुरुआत की। पैदल 12,500 किलोमीटर की यात्रा कर चुका हूं और लोकल कन्वेंस और पैदल मिला अब तक 81,000 किलोमीटर का सफर तय कर लिया है। इसके लिए सबसे पहले अपने शहर से शुरुआत की और इसमें कामयाब रहा। इससे हौसला बढ़ा। इसके बाद यूपी, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और बिहार गया।

पंजाब के लिए 6 जनवरी को पटियाला से शुरुआत की। पटियाला, चंडीगढ़ के बाद बुधवार को लुधियाना पहुंचा हूं। यह कहना है उत्तराखंड पिथौरागढ़ के रहने वाले 26 साल के अजय ओली का। फिलहाल वह मोटिवेशनल काउंसलर हैं। साथ ही सोशल वेल्फेयर में अपनी पीएचडी कंप्लीट कर रहे हैं, लेकिन 2015 तक वह इवेंट मैनेजमेंट का बिजनेस कर रहे थे। इस दौरान ही बच्चों को लेकर चिंता बढ़ी और समाजसेवा करने की ठान ली। उनका कहना है कि यह सरकार नहीं, समाज का काम है। हम लोगों को अवेयर होने की जरूरत है।

एक दिन में 40 किलोमीटर चलते हैं पैदल

जय ने बताया कि वह एक दिन में 40 किलोमीटर का एवरेज रखते हैं। इस पैदल यात्रा के दौरान पब्लिक डीलिंग करते हैं और चाइल्ड लेबर और चाइल्ड बैगिंग को खत्म करने के लिए प्रेरित करते हैं। एक दिन में करीब 700 लोगों से बातचीत करने का टारगेट रखते हैं। इसके लिए स्कूल और कॉलेजों में भी जाते थे। बच्चों और लोगों को भीख नहीं देंगे की शपथ दिलाते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि हम लोग बच्चा समझ भीख तो दे देते हैं, लेकिन वहीं, बच्चा जब बड़ा हो जाता है तब तक उसे भीख मांगने की आदत हो जाती है और जब भीख नहीं मिलती तो वह क्राइम की राह पर निकल पड़ता है। इससे अच्छा है कि भीख देने की बजाय बच्चों को एजुकेशन दें और उसे एक अच्छा नागरिक बनने में मदद करें। वह अब तक 14500 बच्चों को एजुकेशन दे चुके हैं।


लेक्चर और सेमिनार से जुटाते हैं फंड

अजय ने बताया कि उनके दादा के नाम पर घनश्याम ओली चाइल्ड वेलफेयर संस्था है जो नॉन फंडेबल है। इसके तहत शेल्टर हाउस भी बनाया हुआ है। वह चाइल्ड लेबर और चाइल्ड बैगिंग पर लेक्चर और सेमिनार देकर फंड जुटाते हैं। देश को चाइल्ड लेबर फ्री करना सपना है। वह राइटर भी हैं और अब तक 120 आर्टिकल लिख चुके हैं। इसके अलावा इस जर्नी को लेकर एक बुक लिखने की ख्वाहिश है।

वह अर्निंग विद लर्निंग कॉन्सेप्ट से बच्चों के पेरेंट्स का जीत लेते हैं दिल
अर्निंग विद लर्निंग कॉन्सेप्ट से जीता दिल वह अर्निंग विद लर्निंग कॉन्सेप्ट से बच्चों के पेरेंट्स का दिल जीत लेते हैं। वह बच्चों को हैंडमेड नई नई चीजें बनाना सिखाते हैं। इससे बच्चे बिजी रहते हैं और उनको कमाई का जरिया मिल जाता है। इसके साथ ही वह बच्चों को फ्री एजुकेशन भी देते हैं, ताकि बच्चों का भविष्य सुधार सकें।

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