कोचिंग सेंटर को हराकर महाजन क्लब ने जीती ट्रॉफी

Ludhiana News - स्पोर्ट्स रिपोर्टर | लुधियाना जीआरडी अकादमी में लुधियाना डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट अकादमी(एलडीसीए) की ओर से महाजन...

Nov 11, 2019, 08:07 AM IST
स्पोर्ट्स रिपोर्टर | लुधियाना

जीआरडी अकादमी में लुधियाना डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट अकादमी(एलडीसीए) की ओर से महाजन ट्रॉफी करवाई गई। रविवार को अंडर-14 लड़कों में महाजन क्लब और कोचिंग सेंटर के बीच फाइनल मुकाबले करवाए गए। जिसमें महाजन क्लब 72 रन से विजेता रहा। मुकाबले के अंतिम दिन सेशन जज बीके मेहता, एडिशनल सेशन जज हरवीन भारद्वाज और एसडीएम वेस्ट अमरिंदर सिंह मल्ली मुख्यातिथि मौजूद रहे और एलडीसीए के मेंबरों ने मुख्यातिथियों को सम्मानित कर उनका स्वागत किया। महाजन क्लब ने बल्लेबाजी करते हुए 40 ओवर में 6 विकेट गंवा कर 148 रन बनाए। जिसमें करनवीर राणा ने 44, रोहन गखर ने 12, सुखसेहज ने 25 और पंडित ने 16 रन बनाए। कोचिंग सेंटर ने गेंदबाजी करते हुए सिद्धार्थ ने 26 रन देकर 2 विकेट, शिवांश राणा ने 20 रन देकर 2 विकेट, वंश गोयल ने 8 रन देकर 1 विकेट, जुगराज ने 13 रन देकर 1 विकेट हासिल की। रनों का पीछा करने मैदान में उतरी कोचिंग सेंटर की टीम 23.1 ओवर में 76 रन बनाकर आल आउट हो गई। जिसमें सिद्धार्थ शर्मा ने 17, दिलकश अंसारी ने 23, ध्रुव ने 9, वंश गोयल ने 4 रन बनाए। महाजन क्लब ने गेंदबाजी करते हुए युवराज ने बिना रन दिए 1 विकेट, अनमोलजीत सिंह ने 17 रन देकर 5 विकेट, करनवीर ने 13 रन देकर 1 विकेट, मनकरनवीर ने 2 रन देकर 1 विकेट हासिल की।

दो दिवसीय जीतो गेम 2019 संपन्न

बैडमिंटन : निरमन पहले, गोयम दूसरे स्थान पर रहा

लुधियाना|जैन इंटरनेशनल ट्रेड आर्गेनाइजेशन लुधियाना चैप्टर(जीतो) के यूथ विंग की तरफ से दो दिवसीय जीतो गेम 2019 रविवार को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय स्थित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स जिम्नेजियम में संपन्न हुई। गेम की शुरुआत जीतो लुधियाना चैप्टर के चेयरमैन भूषण कुमार जैन, प्रमुख सचिव राजीव जैन चमन, उप चेयरमैन नॉर्थ जोन अमित जैन, मनीष जैन, मंजू ओसवाल की मौजूदगी में सामूहिक महामंत्र नवकार के उच्चारण के साथ हुआ। प्रतियोगिता में दिल्ली, जम्मू, जालंधर, बटाला, होशियारपुर से खिलाड़ी शामिल रहे।

जैन इंटरनेशनल ट्रेड आर्गेनाइजेशन लुधियाना चैप्टर की तरफ से करवाई जीतो गेम 2019 में विजेता खिलाड़ी मेडल के साथ।

रिजल्ट : बैडमिंटन मुकाबले में अंडर-15 सिंगल में निरमन जैन पहले और गोयम जैन दूसरे स्थान पर, अंडर-17 सिंगल में अभिनव जैन पहले और दीपक जैन दूसरे, अंड़र-17 डबल्स में सतावन व अक्षय पहले और हर्षल व निर्माण दूसरे, अंडर-19 सिंगल में प्रणव जैन पहले और विश्रुत जैन दूसरे स्थान पर रहे। अंडर-19 से अधिक वर्ग में सिद्धार्थ जैन पहले और नमन जैन दूसरे, अंडर-19 से अधिक डबल्स में विशाल व सिद्धार्थ पहले और सनील व सचिन दूसरे स्थान पर रहा।

लॉन टेनिस अंडर-14 सिंगल में राहिल पहले और नमन दूसरे, अंडर-16 में सम्यक पहले और शौर्या दूसरे स्थान पर, अंडर-18 से अधिक वर्ग में सिंगल में सार्थक पहले और भरतराज दूसरे स्थान पर रहा।

लड़कियों के टेबल टेनिस मुकाबले अंडर-15 में रजवी जैन पहले और भाविका जैन दूसरे स्थान पर, जबकि लड़कों में मनीत जैन पहले और लवन्य जैन दूसरे स्थान पर रहा। अंडर-21 से अधिक वर्ग में श्वेता जैन पहले और किन्नरी जैन दूसरे, जबकि लड़कों में नंदन जैन पहले और पंकज जैन दूसरे स्थान पर रहा।

जीतो यूथ विंग में हुए चैस मुकाबले अंडर-14 लड़कों में तन्मय जैन पहले और विदित जैन दूसरे, जबकि लड़कियों में नेहल जैन पहले और हिराशी जैन दूसरे स्थान पर, अंडर-19 में लड़कों में आदित्य जैन पहले और समर्थ जैन दूसरे स्थान पर रहा। अंडर-19 से अधिक वर्ग लड़कों के मुकाबले में पीयूष जैन पहले और वरुण जैन दूसरे स्थान पर, जबकि लड़कियों के मुकाबले में श्रेष्ठा जैन पहले और श्रेया जैन दूसरे स्थान पर रही।

महाजन ट्राफी की विजेता टीम महाजन क्लब के खिलाड़ी ट्रॉफी के साथ। महाजन क्लब ने कोचिंग सेंटर को 72 रनों से हराया।

पटियाला पहले, तरनतारन दूसरे और लुधियाना की टीम तीसरे स्थान पर रही

चैंपियनशिप की विजेता पटियाला टीम के खिलाड़ी व अन्य।

लुधियाना। पंजाब राज्य अंतर जिला स्कूल हाकी चैंपियनशिप अंडर-19 लड़कों के मुकाबले पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के हाकी मैदान में करवाए गए। जिसमें करीब 27 टीमों ने भाग लिया। रविवार को फाइनल मुकाबला साई सेंटर पटियाला और खडूर साहिब तरनतारन के बीच खेला गया। जिसमें साई सेंटर पटियाला 1-0 से विजेता रहा। तीसरे स्थान के लिए मालवा अकादमी लुधियाना और एसजीपीसी के बीच मुकाबला हुआ। मालवा अकादमी लुधियाना 3-1 से तीसरे स्थान पर रहा। स्टेट आर्गेनाइजर रुपिंदर रवि, जिला शिक्षा आफिसर स्वर्णजीत कौर, सरबजीत कौर मुख्यातिथि मौजूद रहे और विजेताओं को सम्मानित किया। इसके अलावा एईओ अजीत पाल, अमरीक सिंह, गुरप्रीत सिंह, गुरविंदर सिंह, अमरीक सिंह, जगरूप सिंह जरखड़, मनप्रीत सिंह, सुखवीर सिंह, जगदेव सिंह, अनिल, अशोक, रछपाल सिंह, रकेश सूद, साजन बतरा, तेजिंदर सिंह, सतिंदर आदि मौजूद रहे।

पंजाब राज्य अंतर जिला स्कूल हॉकी चैंपियनशिप

इनको मिले अवॉर्ड

मैन ऑफ द मैच अनमोलजीत सिंह

बेस्ट बेस्ट्समैन सिद्धार्थ शर्मा

बेस्ट ऑल राउंडर रोहन गखर

बेस्ट बॉलर वंश गोयल

बेस्ट विकेट कीपर संदीप

बेस्ट फिल्डर विवेक पंडित

 

हर काम के दो पहलू होते हैं - “भीष्म’ या “जटायु’

उ नके यहां अच्छे अस्पताल, सड़कें या पेट्रोल पम्प नहीं है। स्कूल भी सरकारी हैं जहां मराठी माध्यम से पढ़ाई होती है, लेकिन उनमें शौचालय नहीं हैं। महाराष्ट्र के सीमावर्ती तालुका डूडामार्ग - जहां 55 गांव हैं और करीब 80,000 की बड़ी आबादी है। यहां के हताश और परेशान युवाओं की उम्मीद भरी नजरें गोवा की ओर लगी हैं, जहां उनमें से अधिकांश काम करते हैं या उनके परिवार वहां पर बस चुके हैं, और अब ये लोग अपने इलाके को गोवा के साथ मिलाने की मुहिम के लिए समर्थन जुटा रहे हैं। इलाके के अधिकांश युवा काम के लिए रोज गोवा के वास्को और वरना जाते हैं और हर तीन महीने में वहां से 100 किमी दूर गोवा के अस्पताल तक ले जाने में एक न एक मरीज हो जाती है।

हालांकि मुझे इस काम ने अपने एक परिचित, एडवोकेट दीपक शेषराव मापरी की याद दिला दी जो अब महाराष्ट्र के बुलढाणा के जिला एवं सत्र न्यायालय में प्रैक्टिस कर रहे हैं। जब 1985-86 में वह बुलढाणा के लोणार तालुका के मातमल में कक्षा पांचवीं के छात्र थे, तब उनकी उम्र के कई बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी थी क्योंकि लोणार स्थित उनका शिवाजी हाईस्कूल उनके गांव मातमल से 7 किमी दूर था, और सड़क की हालत इतनी खराब थी कि उस पर बैलगाड़ी चलाना भी दूभर था। आप कह सकते हैं कि वहां सड़क का कोई नामोनिशान नहीं बचा था। हर एक छात्र को हर रोज आने-जाने में कुल 14 किमी पैदल यात्रा दोनों दिशाओं में करनी पड़ती थी और स्कूल का समय सुबह 11 बजे और शाम 5 बजे के बीच था। चूंकि सर्दियों में दिन छोटे होते थे, तो ऐसे में बच्चों को अंधेरा होने की वजह से घर जल्दी लौटना पड़ता था क्योंकि रास्ते में तीन नदियां पड़ती थीं।

दीपक आसानी से हार मानने वाले बच्चों में से नहीं था। उसमें और उसके कुछ दोस्तों में पढ़ने की बहुत ज्यादा ललक थी। वे हर दिन अपने स्कूल की डगर पर निकल पढ़ते थे, जबकि कई बार ऐसा होता था कि भारी बारिश के कारण आई बाढ़ के कारण उन्हें नदी पार नहीं करने दी जाती थी। ऐसे में उन्हें पानी उतरने तक पास के गांव सरस्वती में ठहरना पड़ता था और वे देर रात को घर लौटते थे।

अब सीधे 1999 में चलते हैं। कानून की डिग्री लेने के बाद उसने बुलढाणा में वकालत की प्रैक्टिस करना शुरू किया। नवंबर 2000 में, उसने सबसे पहले डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पास एसटी बस सेवा के लिए एक अपील की और इस सेवा को शुरू करने के लिए राज्य परिवहन दफ्तर को एक पत्र लिखा। इस पर विभाग ने एक रिपोर्ट यह कहते हुए दी कि सड़क की स्थिति बस चलाने लायक नहीं है। इसके बाद दीपक ने भवन एवं निर्माण विभाग से सम्पर्क किया और बस के लिए रोड बनाने की मांग की। मांग सुनी गई, लेकिन उन्होंने एक “काम चलाऊ’ रोड बना दिया और बस सेवा शुरू हो गई। इससे उस गांव की सूरत पूरी तरह से बदल गई। बच्चे स्कूल जाने लगे और गांव के कृषि उत्पाद तेजी से बिकने लगे, जिसने पूरी लाइफस्टाइल को बदल कर रख दिया। समय के साथ एक सामाजिक जागरुकता आई और सबका ध्यान एक अच्छी कोलतार की सड़क बनाने की ओर गया। हालांकि गांव वालों को यह समझाना मुश्किल हो रहा था कि एक साधारण नागरिक भी ऐसे बड़े सार्वजनिक काम करवा सकता है, क्योंकि वे मानते थे कि सिर्फ नेता ही ये सब करा सकते हैं।

जैसा कि हर जगह होता है, यहां भी हुआ कि इस लोणार-मातमल-बीबी मार्ग के लिए सत्ता में बैठे नेता अपना श्रेय लेने में पीछे नहीं रहे, जबकि इसके लिए जी-जान लगा देने वाले दीपक को लगभग सभी भूल गए।

इस वाकये से मुझे महाभारत की कथा से भीष्म और रामायण से जटायु याद आते हैं। भीष्म बहुत शक्तिशाली थे लेकिन फिर भी वे द्रौपदी की सहायता नहीं कर पाए, जटायु बूढ़े और दुर्बल थे, लेकिन फिर भी उन्होंने सीता की मदद करने की कोशिश की। भीष्म बड़े संस्कारी और सुशिक्षित थे लेकिन फिर भी एक नारी की मदद के लिए उन्होंने अपनी असंवेदनशीलता दिखाई, जबकि जंगल में रहने वाले गिद्ध स्वरूप जटायु ने ऐसे काम में अति संवेदनशीलता दिखाई। दिलचस्प है कि द्रौपदी ने तो भीष्म से मदद मांगी थी जबकि सीता ने जटायु से नहीं मांगी। इसका परिणाम क्या हुआ; भीष्म जीवित रहे, लेकिन अपनी अंतरात्मा में रोज मरते रहे, जबकि जटायु मृत्यु को प्राप्त हो गए लेकिन अपनी अंतरात्मा के लिए अनंत काल तक जीवित रहे।

फंडा ये है कि, जैसे सिक्के के दो पहलु होते हैं, हमारे किए हर काम के भी होते हैं, और उनका दोनों ही ओर से मूल्यांकन किया जाता है- यह आप पर है कि आप किसी काम को “भीष्म’ के तरीके से या फिर “जटायु’ वाले तरीके से करते हैं।

मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए 9190000071 पर मिस्ड कॉल करें

एन. रघुरामन

मैनेजमेंट गुरु

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