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पीआईएस खिलाड़ियों की डाइट से दूध, पनीर व बादाम हुआ गायब, दाल रोटी के सहारे खिलाड़ी

एक वर्ष पहले
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सरकारंे जहां पर खिलाड़ियों को खेलने के लिए प्रमोट कर रही है कि अधिक से अधिक खेलों में भाग ले ओर देश का नाम रोशन करें। वहीं पर देश का नाम रोशन करने वाले खिलाडिय़ों की ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जा रहा। सीधे सीधे उनकी डाइट पर हला बोल दिया गया है। लुधियाना में पीआईएस खिलाडिय़ों को पिछले नौ महीने से डाइट नहीं दी गई। डाइट के पैसे न मिलने की वजह से ठेकेदार की ओर से खिलाडिय़ों की कुछ टाईट बंद कर दी है। जिसमें दूध, पनीर, दलिया, बादाम, चिकन आदि को बंद कर दिया गया है। जिस वजह से सिर्फ खिलाड़ी अब दाल रोटी के सहारे ही है और बिना एक्सट्रा डाइट खाए ही प्रैक्टिस कर रहे हैं। ऐसे में बेहतर नतीजा कहा से लेकर आएंगे खिलाड़ी। एक खिलाड़ी को रोजाना 200 रुपए डाइट का मिलता है। यहीं नहीं मालवा खालसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल कोचर मार्के में जहां खिलाड़ी रह रहे हैं, उसका किराया भी अभी तक नहीं दिया गया है। गौर हो कि लुधियाना में पीआईएस के अंडर-14, अंडर-17 और अंडर-19 के 70 के करीब खिलाड़ी है। जोकि हॉकी और एथलेटिक्स है। पिछले नौ महीने से मालवा खालसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल व सेंटर लुधियाना से स्पोट्र्स प्रमोटर की ओर से मेल के जरिए कितनी बार डायरेक्ट जनरल व डायरेक्टर एडमिन व सचिव से पैसे देने की मांग की गई। परंतु अभी तक कोई सुनवाई नहीं की गई।

डीएवी स्कूल में नशे के बचाव को करवाई खेल एक्टिविटी
खन्ना|डीएवी पब्लिक स्कूल में नशे से बचाव के लिए खेल एक्टिविटी करवाई गई, जिसमें छठी से लेकर 12वीं तक के स्टूडेंट्स ने भाग लिया। इस दौरान बच्चों ने डोज बाल, लाॅन्ग जंप, रेस, कसरतें अौर सहन शक्ति एक्टिविटी करवाई गई। प्रिंसिपल ने बताया कि खेलों को कराने का उद्देश्य बच्चों को नशे के खिलाफ जागरूक करते हुए ज्यादा ज्यादा खेलों में भाग लेने को प्रेरित करना था।

5 अगस्त से पीआईएस के ट्रायल, कम खिलाड़ी आएंगे ट्रायल देने
स्पोर्ट्स प्रमोटर जगबीर सिंह ग्रेवाल ने बताया कि पीआईएस के ट्रायल हर बार जनवरी या फरवरी में हो जाते है परंतु इस बार ट्रायल नहीं करवाए गए। 5 अगस्त से ट्रायल करवाए जाने की लिस्ट आई है जो कि जालंधर में करवाए जाएंगे। इस समय ट्रायल के लिए कम ही खिलाड़ी आएंगे। अगर खिलाड़ी ट्रायल देने के लिए आते भी है तो उन्हें एडमिशन करवाने में दिक्कत आएगी। क्योंकि कालेजस की एडमिशन हो चुकी है। डिपार्टमेंट खिलाडिय़ों के प्रति कोताही बरत रहा है।

इंटर बीसीएम टेबल टेनिस टूर्नामेंट
बीसीएम स्कूल, बसंत एवेन्यू बना विजेता
लुधियाना। बीसीएम स्कूल, बसंत एवेन्यू, दुगरी ने इंटर बीसीएम टेबल टेनिस टूर्नामेंट की मेजबानी की। 26 जुलाई को हुए इस टेनिस टूर्नामेंट में लगभग 30 विभिन्न बीसीएम संस्थानों के छात्रों ने भाग लिया। इस टूर्नामेंट में सभी प्रतिभागियों ने अच्छी खिलाड़ी भावना और टीम का काम पूरे उत्साह के साथ प्रदर्शित किया। बॉयज अंडर -15 में मेजबान स्कूल बीसीएम स्कूल, बसंत एवेन्यू विजेता बना। जबकि बीसीएम स्कूल, सेक्टर 32 और बीसीएम बसंत सिटी ने दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त किया। लड़कियों में बीसीएम, सेक्टर 32 के छात्रों ने बीसीएम बसंत एवेन्यू को मात दी। बीसीएम बसंत एवेन्यू दूसरे स्थान पर रहा। बीसीएम बसंत सिटी ने तीसरा स्थान लिया। सीनियर विंग सह-समन्वयक अंजन कालिया के साथ खेल प्रभारी बीआर नायक ने विजेताओं को पुरस्कृत किया।

मेेल बहुत की परंतु नहीं हुआ कोई हल : प्रिंसिपल कर्म सिंह ग्रेवाल : मालवा खालसा सीनियर सैकेंडरी स्कूल कोछड़ मार्किट के प्रिंसिपल ने बताया कि स्कूल में 70 के करीब खिलाड़ी रह रहे है। जोकि हॉकी और एथलेटिक्स के खिलाड़ी है। खिलाडिय़ों के हास्टल का खर्च एक महीने का 25 हजार के करीब है। 18 नवंबर 2018 से हास्टल का खर्च नहीं मिला है। इस संबंध में पीआईएस के अधिकारियों को कई बार मेल कर चुके है। परंतु अभी तक किसी न इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया है। इस तरह का पहले कभी नहीं हुआ है।

जालंधर, लुधियाना के खिलाड़ियों की डाइट का 35 लाख बकाया
स्पोट्र्स प्रमोटर जगबीर सिंह ग्रेवाल ने बताया कि जालंधर और लुधियाना के खिलाडिय़ों को मिलाकर कुल 170 के करीब खिलाड़ी है। जिनका डाइट का खर्च महीने का 8 से 10 लाख बनता है। परंतु खिलाडिय़ों को नहीं दिया जा रहा। अब तक खिलाडिय़ों की डाइट का 35 लाख रुपए बकाया है। ऐसे में ठेकेदार को मजबूरी में उनकी डाइट में कटौती करनी पड़ी। इस संबंध में पीआईएस के डायरेक्टर एडमिन से भी बात कर चुके है। उन्होंने कहा कि इसका हल जल्द कर दिया जाएगा।

रूल में बदलाव को लेकर प्रोसेस में है मामला: डायरेक्टर एडमिन
डायरेक्टर एडमिन आरके सोढी ने बताया कि खिलाड़ियों की डाइट और हाॅस्टल का मामला उनके ध्यान में है। इस संबंधी फाइल आगे भेजी गई है। मामला प्रोसेस में है और जल्द ही इसका हल हो जाएगा। उन्होंने बताया कि रुल में कुछ बदलाव किए गए है। पहले सीधे ही खिलाड़ियों का खर्च संबंधित को भेज दिया जाता था। परंतु अब डीएसओ के साइन के बाद ही प्रोसेस आगे शरू किया जाता है, इसलिए देरी हुई है।

जूडो टूर्नामेंट में निभा, निहारिका और यशिका ने जीते मेडल
लुधियाना। भारतीय विद्या मंदिर, उधम सिंह नगर के बच्चों ने पंजाब के खेल विभाग की तरफ से आयोजित अंडर 14 जिला स्तरीय जूडो टूर्नामेंट, तंदुरूस्त पंजाब में मेडल जीतकर स्कूल का नाम रोशन किया। सातवीं क्लास की निभा ने 23 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीता। क्लास पांचवीं की निहारिका ने 40 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीता। क्लास सातवीं की याशिका ने 44 किलोग्राम वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता।

उद्देश्य सही हो तो हर बिजनेस की स्वीकार्यता बढ़ सकती है!
रविवार की सुबह, बादलों से भरे आसमान के नीचे एक गरम चाय या कॉफी के साथ, हाथ में अखबार के बीच तर्क-वितर्क से भरी चर्चा, हमेशा से दिन की अच्छी शुरुआत मानी जा सकती है। और अगर उस जगह, जहां पर वह गरम पेय परोसा जा रही है, अगर बातचीत का विषय ही बन जाए तो वह पेय और भी मजेदार लगने लगता है। कुछ उदाहरणों से समझते हैं।

कहानी 1: त्रिवेंद्रम में टेक्नोपार्क के करीब ‘कैफे ग्रैन कासा’ चलाने वाले राजेश राजेंद्रन भारत से लेकर अमेरिका तक वॉट्सऐप पर एक चर्चा का विषय बन गए क्योंकि वे अपने एक ग्रीन इनिशिएटिव की स्वीकार्यता के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

उनके मुताबिक आपके ईटिंग-ऑउट को ईको-फ्रेंडली बनाने के कई तरीके हैं। लेकिन क्या आप कुछ भी ऑर्डर करने से पहले अपना कर्त्तव्य निभाते हैं? अपने यहां आने वाले ग्राहकों के बीच ‘हरित संस्कृति’ को बढ़ावा देने के लिए राजेंद्रन का कैफे आपको डिस्काउंट कूपन उपलब्ध कराता है, लेकिन शर्त यह है कि आपको वहां साइकिल से आना होगा।

ये कैफे सिर्फ दो महीने पहले ही शुरू हुआ है और हर एक दिन दोपहर के12 बजे से रात के 12 बजे तक खुला रहता है। कैफे की दीवारों पर हरी घास के कारपेट की मैटिंग के साथ दुनिया के नक्शे को दिखाने वाली कलाकारी की गई है, जो कि एक ऐसी दुनिया का सांकेतिक चित्र है जो हरियाली से भरपूर है। ‘ग्रैन कासा’ एक इटेलियन शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘बड़ा ड्रम’। उनकी खासियत जूस और शेक हैं, साथ ही वे खाने के लिए मोमोज़ जैसे हल्के व्यंजन परोसते हैं। वे करीब 20% तक डिस्काउंट भी देते हैं जो कि ऑर्डर पर निर्भर करता है। ये उनकी प|ी अश्वथी सिवन का आइडिया था कि साइकिल से आने वाले ग्राहकों को डिस्काउंट दिया जाए क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके यहां कुछ भी खाने के बाद साइकिल चलाना ग्राहकों की सेहत के लिए अच्छा है। ग्राहक कैफे के अंदर और उसके प्रवेश द्वार के आसपास मुफ्त में अपनी साइकिल पार्क कर सकते हैं, जबकि अन्य वाहनों के लिए अलग पार्किंग दी गई है।

कहानी 2: तमिलनाडु के मोहम्मद असलम, मैकेनिकल इंजीनियर से एक रेस्तरां मालिक बने हैं। इन्होंने त्रिची में एक ‘अरेबियन तंदूर चाय’ नाम का एक ऑउटलेट खोला है। इस शहर में खूब कॉफी पी जाती है, लेकिन उनके तंदूर में चाय परोसी जाती है और वह भी हल्के से दम की हुई होती है! उनका पूरा बिजनेस एक तरह से ‘शोमैनशिप’ जैसा है। गाढ़े धुएं वाली चाय को इलायची, दालचीनी, अदरक और पुदीना डालकर उसे हल्का सा मीठा जायका दिया जाता है और थोड़े भारी खाने को पचाने के लिए या व्यस्त दिन शुरू करने से पहले इसे पीना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। वर्तमान में वे सिर्फ एक ऑउटलेट से दिनभर में 1500 कप तंदूर चाय बेच लेते हैं जो मिट्टी के कुल्हड़ में परोसी जाती है।

आप सोच रहे होंगे कि इस काम में ऐसा क्या है कि वे इसकी स्वीकार्यता पर इतना जोर दे रहे हैं? तो जवाब में, मैं आपके साथ उनकी सोच साझा कर रहा हूं। उन्होंने दम वाली चाय का आइडिया पुणे से कॉपी किया था और वे चाहते थे कि उनके राज्य में हर बेरोजगार युवा कुछ नई आजीविका शुरू करे, भले ही उसके लिए उन्हें किसी की नकल करनी पड़े। यही कारण है कि अप्रैल 2019 में काम शुरू करने से लेकर अब तक पूरे तमिलनाडु से उन्हें 40 फ्रेंचाइजी खोलने के संदेश मिल चुके हैं।

कहानी 3: छत्तीसगढ़ की अंबिकापुर नगर निगम अपने शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए एक ‘कचरा कैफ’ खोलने की योजना बना रहा है जहां गरीब लोग और कचरा-पन्नी बीनने वाले लोग एक किलोग्राम प्लास्टिक के बदले खाना, आधा किलो के बदले नाश्ता कर सकेंगे। शर्त है कि उन्हें प्लास्टिक का कचरा कैफे में लेकर आना होाग। चूंकि ये हम जैसे लोगों के लिए नहीं है तो शुरुआत में स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया लेकिन ध्यान में रखना होगा कि वे ऐसा एक अच्छे उद्देश्य की पूर्ति के लिए कर रहे हैं।

मुनाफे के लिए कोई उत्पाद बेचना किसी बिजनेस के अस्तित्व के पीछे का मूल उद्देश्य होता है- लेकिन अगर उस काम से उसके ग्राहकों को कुछ बेहतर सबक मिले तो निश्चित रूप से बिजनेस लंबा चलता है और लोगों की चर्चा में बना रहता है। लेकिन इसे चलाने वाले को बदलते मौसम के साथ अपने उद्देश्य को सुनिश्चित करना चाहिए ताकि ग्राहकों को उससे बोरियत महसूस न हो।

फंडा ये है कि अगर किसी बिजनेस की स्वीकार्यता को बढ़ाना है, जैसे कि ऊपर के मामलों में है, तो आपको निश्चित रूप से युवा पीढ़ी के दिमाग में एक छाप छोड़नी होगी क्योंकि वह भी किसी न किसी उद्देश्य के साथ आगे बढ़ रही है।

मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए 9190000071 पर मिस्ड कॉल करें

एन. रघुरामन

मैनेजमेंट गुरु

raghu@dbcorp.in

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