इंडस्ट्रियल सिटी के बाहरी इलाकों में लाखों मजदूरों को नहीं मिल रही मदद

Ludhiana News - किसानों को रोजमर्रा के काम करने की छूट दी जाए : भाकियू लुधियाना| कोरोना के प्रकोप के दौरान खेतीबाड़ी भी...

Mar 27, 2020, 07:47 AM IST

किसानों को रोजमर्रा के काम करने की छूट दी जाए : भाकियू

लुधियाना| कोरोना के प्रकोप के दौरान खेतीबाड़ी भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में भारतीय किसान यूनियन-एकता (डकौदा ग्रुप) ने किसानों को खेतों में जाकर रोजमर्रा के कामों को निपटाने के लिए छूट देने की मांग की। इस मामले में यूनियन के जिला प्रधान हरदीप सिंह गालिब, कमेटी मेंबर महिंदर सिंह कमालपुरा, इंदरजीत सिंह धालीवाल, सुखविंदर सिंह हंबड़ां, परवार सिंह ने संयुक्त तौर पर प्रस्ताव पारित कर डीसी को भेजा है। उन्होंने कहा कि मौसमी फसलों, सब्जियों और फलों की देखभाल, उनको कोल्ड स्टोर तक पहुंचाने जैसे कामों के लिए किसानों को छूट मिलनी चाहिए। साथ ही कहा कि ऐसे में कोरोना के प्रकोप को देखते हुए किसान जत्थेबंदियों को किसानों, खेत मजदूरों को जागरूक करने की मुहिम चलाने की मंजूरी भी दी जाए। इस मुहिम में गांवों के स्पोर्ट्स क्लब भी मदद कर सकते हैं।

राशन, दवा की होम डिलीवरी के साथ डिजिटल भुगतान व्यवस्था करें

लुधियाना| कोरोना के प्रकोप के मद्देनजर कर्फ्यू के दौरान शहरी पूरी तरह सहयोग करना चाहते हैं, लेकिन उनको कई किस्म की दिक्कतें भी आ रही हैं। गली गुलचमन, नीमवाला चौक, इस्लामगंज समेत कई इलाके के निवासियों के साथ ही पूर्व कौंसलर और कांग्रेसी नेता परमिंदर ने रोष जताया कि तमाम लोग आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। बैंक और एटीएम उनके घरों से दूर हैं। दिहाड़ीदार ही नहीं, नौकरीपेशा लोगों के एटीएम में भी महीने का अंतिम सप्ताह होने के कारण पैसे नहीं हैं। ऐसे में राशन, दवा की होम डिलीवरी और सब्जियों की गलियों में बिक्री के दौरान भी मजबूर लोग खरीदारी नहीं कर सकते हैं। यदि डिलीवरी मैन डिजिटल भुगतान लें तो कुछ ंलोग ज्यादा राशन, सब्जी आदि खरीद मजबूर पड़ोसियों की मदद कर सकते हैं। लिहाजा प्रशासन को डिजिटल भुगतान का प्रबंध करना चाहिए।

ट्रेड यूनियनों की मांग, प्रशासन जल्द मदद को ठोस कदम उठाए

लुधियाना| कोरोना के प्रकोप के चलते कर्फ्यू के दौरान इंडस्ट्रियल सिटी के आउटर इलाकों में वेहड़ों-घरों में कैद लाखों मजदूर और कामगार परिवारों के साथ बेहाल हैं। पुलिस-प्रशासन की सख्ती के चलते इंडस्ट्रियल यूनिटों के मालिक तक उनको मदद नहीं पहुंचा पा रहे हैं। टेक्सटाइल होजरी कामगार यूनियन और कारखाना मजदूर यूनियन के नेताओं राजविंदर और लखविंदर ने संयुक्त बयान में इस स्थिति को लेकर तीखा रोष जताया। ऐसे में प्रशासन को आम लोगों के साथ मजदूरों की मदद को ठोस पहल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों ने कोरोना बीमारी की आफत में जनता की मदद के पुख्ता प्रबंधों की कोई ठोस योजना तैयार नहीं की। खासकर यहां किराए पर रहने वाले लाखों मजदूरों के बारे में नहीं सोचा। हद यह कि इलाज, राशन आदि के प्रबंध को मजबूरन सड़कों पर उतरे मजदूरों को भी मारपीट कर केस डाल दिए। जन-संगठनों को लोगों को जागरूक और मदद करने की इजाजत भी नहीं दी जा रही। ऐसे में गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी से बेहाल मजदूर पलायन कर गए तो इंडस्ट्रियल यूनिटों के सामने भी बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।

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