नाइट डोमिनेशन: जहां क्राइम ज्यादा, वहां एडीसीपी की अगुवाई में घूमेगी पीसीआर
सालों से चली आ रही पुलिस की नाइट डोमिनेशन का ट्रेंड सीपी ने बदल दिया है। जिसमें जिन इलाकों में क्राइम की रेशो ज्यादा है, उनका चयन कर एडीसीपी की अगुवाई में पीसीआर की पेट्रोलिंग करवाई जाएगी। जबकि बाकी के इलाकों में एसएचओ नाकाबंदी करेंगे। इस प्लानिंग का ट्रायल करवाया जा रहा है, जोकि काफी फायदेमंद साबित होगा। आकंड़ों की बात करें तो महीने में 50 के करीब लूट, झपटमारी, मारपीट, फायरिंग और हत्या के मामले दर्ज किए जाते है। इन सभी जगहों का पुलिस द्वारा जब मुआयना किया गया तो पता ये चला कि पुलिस गश्त कम है और किसी अधिकारी का खौफ नहीं है। जिसे देखकर नाइट डोमिनेशन को पूरी तरह से बदलकर पेश करने की तैयारी है। जोकि पूरा तो नहीं 50 फीसदी क्राइम को कम करने में मदद करेगा। सीपी राकेश अग्रवाल ने सभी अधिकारियों को नाइट डोमिनेशन के लिए स्पेशल इंस्ट्रक्शन्स भी दी है। उन्होंने कहा कि इसका मकसद शहरियों को सेफ फील करवाना और क्राइम पर नकेल कसना है।
बदलेगा ट्रेंड : अब रात 11 से सुबह 6 बजे तक होगी नाइट डोमिनेशन
पहले सभी एसएचओ अपने-अपने इलाकों में नाकाबंदी करते थे और रात को मूवमेंट कर घर चले जाते थे। लेकिन अब ट्रेंड बदल दिया गया है। जिसमें हर एडीसीपी और एसीपी की नाइट तय की गई है। जोकि रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक शहर के अलग-अलग इलाकों में मूव करेंगे। इनके पीछे पांच पीसीआर की गाड़ियां होंगी, जोकि पेट्रोलिंग करती रहेंगी। जिन इलाकों में गश्त करनी है वो भी एेसी ही तय नहीं किए जाएंगे। इसके लिए सभी थानों को अपने अपने थानों के क्राइम रिकॉर्ड की डिटेल निकलवाकर देने के िलए कहा गया है, ताकि अधिकारी सिर्फ उन्हीं इलाकों में जाएंगे और चेकिंग करेंगे, जहां क्राइम ज्यादा है। इनकी रोज की डिटेल सीपी खुद चेक करेंगे।
सोते मिले तो होगी कार्रवाई
वहीं, इस फेरबदल का एक मकसद मुलाजिमों की ड्यूटी को चैक करना भी है। क्योंकि अकसर शिकायतें आती है कि नाइट ड्यूटी करने वाले मुलाजिम ड्यूटी पर कम और कहीं एटीएम तो कभी घरों में सोते मिलते है। लिहाजा अब इसके साथ ही अधिकारी मुलाजिमों पर भी नजर रखेंगे कि किन इलाकों में मुलाजिम ड्यूटी कितनी शिद्दत से दे रहे है। अगर कोई ड्यूटी पर होने के बावजूद नजर नहीं आया तो उसके खिलाफ विभाग कार्रवाई करेगा।
नाकों से ज्यादा फुट मूविंग
नाइट डोमिनेशन के बदले ट्रेंड में नाकों से ज्यादा फुट मूविंग पर जोर दिया गया है। क्योंकि अकसर नाके लगे होने के बावजूद भी आसपास वारदातें हो जाती है। इसलिए सिस्टम को एेसे तैयार किया गया है कि अगर किसी अपराधी को पकड़ना भी तो उसमें देरी न हो। इसके अलावा बाजारों में यहां चोरी की वारदातें ज्यादा होती है, वहां अपराधियों को डर लगा रहे कि कहीं पुलिस पेट्रोलिंग न कर रही हो।