डिग्री नहीं, नायक का दिल लेने व नींद उड़ाने के लिए कॉलेज जाती है नायिका**

Ludhiana News - इस हफ्ते का नॉनसेंस फोटो इस तस्वीर को देखकर आपके भी दिमाग में मजेदार कैप्शन आ रहे होंगे। तो भेज दीजिए [email protected]

Feb 15, 2020, 08:00 AM IST

इस हफ्ते का नॉनसेंस फोटो

इस तस्वीर को देखकर आपके भी दिमाग में मजेदार कैप्शन आ रहे होंगे। तो भेज दीजिए [email protected] पर...

{गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि दिल्ली चुनाव में "गोली मारो' और "भारत-पाक मैच' जैसे बयान नहीं दिए जाने चाहिए थे।

- और यह बात खुद उन्हें भी "करंट' वाला बयान देने के बाद ही समझ में आई होगी।

{दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष (अब पूर्व) सुभाष चोपड़ा ने कहा कि आम आदमी पार्टी विज्ञापनों के कारण चुनाव जीती।

- और जनता को उनके इस बयान के बाद पता चला कि दिल्ली कांग्रेस का कोई प्रदेश अध्यक्ष भी है।

{खुदरा महंगाई 6 साल के सबसे ऊंचे स्तर 7.59% पर पहुंची।

- अब भाजपा के प्रवक्ता पाकिस्तान की महंगाई का उदाहरण देकर देश की जनता को खुश कर सकते हैं।

{दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 66 सीटों पर चुनाव लड़ा और 63 सीटों पर जमानत जब्त हो गई।

- पार्टी को शेष तीन उम्मीदवारों को जमानत बचाने की खुशी में थ्री नाइट फोर डेज का सिंगापुर पैकेज तो देना ही चाहिए।

{विदेश मंत्री जयशंकर प्रसाद ने कहा है कि नेहरू, पटेल को अपनी कैबिनेट में नहीं रखना चाहते थे।

- अपने ऊपर लग रहे तमाम आरोपों का जवाब देने के लिए जवाहरलाल नेहरू को अब एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ही लेनी चाहिए।

{दिल्ली में भाजपा के 62 लाख सदस्य हैं, जबकि चुनाव में 35 लाख लोगों के ही वोट मिले।

- भाजपा कह सकती है कि पहले उसने बिना जीएसटी काटे आंकड़े बता दिए थे, जबकि वोटिंग जीएसटी काटकर हुई है।

{पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के अनुसार रसोई गैस के दामों का बढ़ना और घटना हमारे हाथ में नहीं है।

- जब भाजपा विपक्ष में होती है तो यूं ही सड़क पर सिलेंडर लेकर बैठ जाया करती है।

ह्यूमर ट्यूमर  सौरभ**

}जिन लड़कों के कहने पर घर में चाय तक नहीं बनती, उन्होंने भी कल वैलेंटाइन डे पर चांद तारे तोड़ लाने के वादे कर लिए!

}चाहे कितने ही महंगे हॉस्पिटल में चले जाओ, डॉक्टर को दिखाने के समय बैठना तो स्टूल पर ही पड़ता है!

}खुद को हमेशा स्पेशल समझो और बाकी सब को फ़ालतू, मन को बहुत शांति मिलेगी!

}जब से स्मार्टफोन आए हैं, बच्चे बस में खिड़की वाली सीट की जिद नहीं करते!

}बिस्तर पर चाय और प्यार में धोखा आंख खोलने में मदद करता है!

फनी लॉज़  प्रहलाह सिंह शक्तावत
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जो खुद गुलाब हो उसे मैं गुलाब क्या दूं, ये बोलकर वैलेंटाइन डे पर कई लड़कों ने 50 रुपए बचा लिए !
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लो कर लो शेयर **

हास्य बत्तीसी  लहरी**

जनरल नायिका: नायिकाओं में एक नायिका होती है जनरल नायिका, जैसे जनरल स्टोर। जिस तरह जनरल स्टोर में सब सामान मिलता है, वैसे ही जनरल नायिका में सब गुण मिलते हैं। चंचल वह, गंभीर वह, त्याग व मर्यादा की साक्षात मूर्ति वह, यौवन उसमें, रूप और गुण उसमें। जनरल नायिका की एक विशेषता यह होती है कि उसमें एक विशेषता नहीं होती, बल्कि सभी विशेषताएं होती हैं। निर्देशक अपनी सुविधानुसार, जब चाहे उसके त्याग और मर्यादा के गुण को भुना सकता है और जब चाहे उसके यौवन और नृत्य को कैश करा सकता है। आजकल जनरल नायिका कुछ ज्यादा ही जनरल हो गई है। उधर हर मोहल्ले में जनरल स्टोर खुल गया है, इधर हर फिल्म में जनरल नायिका पाई जाने लगी है।

पारिवारिक नायिका: पारिवारिक नायिका पारिवारिक फिल्मों में पाई जाती हैं। यह घरेलू किस्म की सती-सावित्री औरत होती है। जब पतिव्रता होने पर उतारू होती है तो इतनी पतिव्रता हो जाती है कि अपने पति को भी हाथ नहीं लगाने देती। इसमें अत्याचार सहने की गजब की शक्ति होती है। हिंदुस्तानी सास ऐसी बहू को पर्दे पर देखकर ठंडी आहें भरती है और अपनी बहू से उम्मीद करती है कि वह इस देवी से कुछ सीखें। पारिवारिक नायिका लोरी और आरती गाने में विशेषज्ञ होती है। उसने भक्ति में डूबी आरतियां गाकर कई भगवानों को प्रसन्न किया। ममता में डूबी लोरियां गाकर कई बच्चों को मीठी नींद सुलाया। अब वही बच्चे जागकर बड़े हुए तो डिस्को और पॉप म्यूजिक के रंग में रंग गए। वे आरती और लोरी के नाम से दूर भागने लगे। पारिवारिक नायिका का भूतकाल भले ही गौरवशाली रहा हो, लेकिन उसका भविष्य अंधकारमय लगता है, क्योंकि युवा वर्ग को चाहिए डिस्को और पॉप म्यूजिक। पारिवारिक नायिका को फिल्मों में बने रहना है तो उसे अपने आप को बदलना होगा। उसे डिस्को-आरती और पॉप-लोरी गानी होगी।

कॉलेज जाने वाली नायिका: इस तरह की नायिका में डिक्शनरी में बताई गई नायिका की तरह यौवन और रूप भरपूर मात्रा में पाया जाता है। जहां तक गुण संपन्न होने का सवाल है तो अभी उसमें समय लगेगा और हाल-फिलहाल उसको इसकी जरूरत भी नहीं है। कॉलेज जाने वाली नायिका कॉलेज की यूनिफॉर्म पहनने में विश्वास नहीं करती। वह वहां पढ़ने या पढ़ाने नहीं, बल्कि नायक की नींद और बाकी विद्यार्थियों के होश उड़ाने जाती है। वह वहां डिग्री नहीं, नायक का दिल लेने जाती है। कॉलेज जाने वाली नायिका स्क्रीन पर नई नहीं है। फिल्म ‘मेरे महबूब' में नायिका साधना और नायक राजेंद्र कुमार टकराए तो एक अमर गीत का जन्म हुआ - ‘मेरे महबूब, तुझे मेरी मोहब्बत की कसम...' और कॉलेज में टकराने की स्वस्थ परंपरा को भी जन्म दिया, जो कई सालों तक चली...। हाय! कहां गए वो लोग और कहां गया वह टकराना।

हैप्पीक्रेसी  आश करण अटल
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गुलाबो... ज़रा

पॉपकॉर्न खिला दो...

>नसीब अपना-अपना। -राजीव महेन्द्रू, जयपुर

>अभी तो पार्टी शुरू हुई है। -बृजेश मीणा, दौसा

>टीवी की गर्मागर्म बहस, पॉपकॉर्न के संग।
-राजेश नागर

>हर कुत्ते के दिन आते हैं, पर इसके कुछ ज्यादा ही आ गए। -श्याम मारोडीया/लक्ष्य ताम्रकर

>गुलाबो... ज़रा पॉपकॉर्न खिला दो...।
-जूही श्रीवास्तव

>तेनु काला चश्मा जंचता वे, जंचता वे गोरे मुखड़े पे। -श्रेया प्रियदर्शी

>कुत्ता क्या जानें पॉपकॉर्न का स्वाद।
-दिनेश सिंगारिया

>गोरे-गोरे मुखड़े पे काला-काला चश्मा।
-रश्मि शर्मा/संदीप ककोड़

>अगले बजट तक पॉपकॉर्न से ही काम चलाना पड़ेगा। -योगेश अकोदिया, उज्जैन

>अरे मैं तो साहब बन गया। -करुणा बिरमपुरी

>यहां के हम हैं बादशाह। -जगराजसिंह देऊ

>चला मुरारी हीरो बनने। -सूर्य प्रकाश

>लो आ गए नए जमाने के स्वान।
-प्रेम मीणा हरलोदा

>अच्छे दिन आ गए... कुत्तों के। -अनूप रोहिला

>इंसान की खाल में। -शंकर मीना, जयपुर

>वैंलेटाइन डे पर पॉपकॉर्न खाते हुए अपने साथी का इंतजार। -कविता राज

>खा लो, मुस्कुरा लो, महफिल सजा लो। न जाने कब मालकिन आ जाएं। -रदीप सिंह बट्‌टू

ये फोटो नॉनसेंस है **

पिछले सप्ताह हमने यह फनी फोटो देकर पाठकों से कैप्शन आमंत्रित किए थे। पेश हैं कुछ चुनिंदा नॉनसेंस कैप्शन :


जी हुजूर, बैठक में अपना पक्ष रखने के लिए न्यूज चैनल्स के एंकरों को भी बुलवा लें?


हमारी पार्टी ही इकलौती ऐसी पार्टी है जो अपने पिछले परिणाम को मेंटेन रख पाई है।**

नड्डा जी, हार की समीक्षा के लिए जल्दी से बैठक बुलवाइए।**

दिल्ली चुनाव में भाजपा की 5 सीटें बढ़ी हैं तो आम आदमी
पार्टी की 5 सीटें कम हुई हैं...हमारी पार्टी का क्या हुआ?**

सेंसिबल मीम सौरभ जैन**

कुर्सी की गर्मी

कुर्सी की गर्मी का
जलवा बड़ा
शीतलहर में भी
पारा चढ़ा।

मुद्रा

जब-जब दिखी
प|ी की प्रसन्न ‘मुद्रा'
तब-तब गई जेब से
कुछ न कुछ मुद्रा।

गले मिलना

वे रोज ही मिलते हैं
मुस्करा कर ‘गले'
बात तो तब है, जब मन का मैल भी ‘गले'।

वंदना

करना है तो करो
भारत वंदना
निजी स्वार्थों की खातिर
करो भारत ‘बंद -ना'।

कल कल कल

बहती हुई नदी
कल कल कल
बहती थी नदी
कल? कल?? कल???

जीना

मत चढ़ो

अलगाववाद का ‘जीना'

नामुमकिन है लगाव

के बिना ‘जीना'।

पोएटिक फन  घनश्याम मैथिल ‘अमृत'
**

पात्रों का पोस्टमार्टम

सिनेमाई


डिक्शनरी के हिसाब से नायिका के कई मतलब होते हैं, जैसे वह स्त्री जो यौवन तथा रूप-गुण से सम्पन्न हो, वह स्त्री जो नाटक, उपन्यास आदि की प्रधान पात्र हो, वह स्त्री जो नायक की प|ी या प्रेमिका हो, वह स्त्री जो राह दिखाने वाली या कहीं पहुंचाने वाली हो। आज डिक्शनरी में बताई गई नायिका से फिल्मों की नायिका की तुलना करेंगे। पाठकों की सुविधा के लिए हमने इन्हें कुछ भागों में बांटा है।

, लुधियाना, शनिवार, 15 फरवरी, 2020

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