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ऑटोमेटिड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक सेक्टर-32 पर इंचार्ज न होने से 700 हुई डीएल की पेंडेंसी

एक वर्ष पहले
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एसडीएम के अंतर्गत आते चंडीगढ़ रोड सेक्टर-32 स्थित ऑटोमेटिड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर में इंचार्ज के न होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है और बिना काम किए ही जाने को मजबूर हैं। जिसका सबसे बड़ा कारण इंचार्ज का न होना है। ये समस्या पिछले एक या दो दिन से नहीं बल्कि 25 फरवरी से आ रही है। नव नियुक्त इंचार्ज रजिंदरपाल कौर ने 3 मार्च को पदभार संभाला। उस दिन उन्होंने कुछ देर काम किया। परंतु उसके बाद से वे ऑफिस नहीं आई। ट्रैक पर काम करने वाले कर्मचारी रोज आकर अपनी सीटों पर काम करने के लिए बैठते हैं। परंतु इंचार्ज ही सीट पर नहीं तो कर्मचारी भी क्या करें। जितने दिन इंचार्ज छुट्टी पर रहेंगी लाइसेंस की पेंडेंसी बढ़ती ही जाएगी। ड्राइविंग टेस्ट सेंटर सेक्टर-32 में रोजाना 80 से 90 के करीब आवेदक लाइसेंस के काम संबंधी आते हैं। जिसमें से 35 के करीब लर्निंग लाइसेंस, 20 के करीब रिन्युवल, डुप्लीकेट, रिप्लेस के आवेदक और 25 पक्के लाइसेंस के आवेदक आते हैं। इसके मुताबिक 700 के करीब की पेंडेंसी बनती है।

आवेदक बोला-जब आता हूं तो यही कहा जाता अप्रूवल पेंडिंग है


ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक सेक्टर-32 पर काम करवाने के लिए लोगों को बार बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, परंतु काम फिर भी नहीं हो पा रहा है। कैलाश चौक के रहने वाले विक्रमजीत ने बताया कि वह स्टूडेंट है और लर्निंग लाइसेंस के लिए अप्लाई किया हुआ है। 16 फरवरी को फोटो हुई थी। दस दिन के अंदर लाइसेंस मिलने का प्रावधान है परंतु उसे अभी तक नहीं मिला। जब आता हूं तो यही कहा जाता है कि अप्रूवल पेंडिंग है।


पहली इंचार्ज नीलम ने 3 मार्च से छुट्टी पर जाना था परंतु वह किसी कारण वश 10 दिन पहले ही छुट्टी पर चली गई। रजिंदरपाल कौर जोकि एसडीएम ऑफिस का काम भी संभालती है उन्हें ट्रैक का चार्ज दिया गया है। परंतु एसडीएम ऑफिस का काम ही इतना होता है कि उन्हें समय नहीं मिल पा रहा है। वह यहीं से ऑनलाइन जितना हो सकता है काम कर रही हैं। इंचार्ज संबंधी एसटीसी को दोबारा रिमाइंडर डाला जाएगा। -अमरजीत सिंह बैंस, एसडीएम

वहीं, नूरवाला रोड के लखविंदर सिंह ने बताया कि उसने भी लर्निंग के लिए अप्लाई किया हुआ है। 6 फरवरी को फोटो हुई थी। 6 से अधिक चक्कर लगा चुका है अभी तक लाइसेंस नहीं मिला है।

फील्डगंज के तरुणदीप सिंह ने बताया कि पक्के लाइसेंस के लिए अप्लाई किया हुआ है। 29 जनवरी को फोटो भी हो चुकी है, चक्कर पे चक्कर लगाने पर भी लाइसेंस नहीं मिल रहा है। इंचार्ज के ना होने का कह कर वापस भेज दिया जाता है। वहीं ताजपुर रोड के सागर ढींढसा ने बताया कि डेढ़ महीने पहले पक्के लाइसेंस के लिए फोटो करवाई थी। टेस्ट भी सब क्लियर है, उसके बाद भी लाइसेंस लेने को इतना समय लग रहा है।
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