एजेंट्स से सांठ-गांठ कर लीक हो रहा पर्सनल डाटा, 10 रुपए से 1 हजार में बिकती डिटेल

Ludhiana News - अगर आपके फोन पर पाॅलिसी, बैंक लोन और लाॅटरी निकलने के काॅल्स या लिंकस आ रहे है, तो ये एक साजिश है। साजिश आपको ठगने की।...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 08:10 AM IST
Ludhiana News - personal data being leaked by enticing agents selling details from rs 10 to 1 thousand
अगर आपके फोन पर पाॅलिसी, बैंक लोन और लाॅटरी निकलने के काॅल्स या लिंकस आ रहे है, तो ये एक साजिश है। साजिश आपको ठगने की। क्योंकि आपकी हर डिटेल ठगों के पास पहुंच रही है। जोकि आपके ही बैंक, पाॅलिसी कंपनी के एजेंट्स के जरिए दी गई है। उन्हें हर एक डिटेल शेयर करने के पैसे मिल रहे है। एेसे में ठगी के इस नए तरीके ने लोगों को परेशानी में डाल दिया है। वहीं, इसके विपरित पुलिस सिर्फ पर्चा दर्ज कर ठगी करने वालों को तो पकड़ रही है, लेकिन जो ये डाटा शेयर कर रहे है, उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं है। अगर पुलिस के पिछले दो साल के रिकॉर्ड की बात करें तो एक भी डाटा थैफ्ट का मामला पुलिस ने दर्ज नहीं किया। इसके अलावा लोगों को अवेयर करने के लिए भी कोई कदम नहीं उठाया, हालांकि पुलिस का दावा है कि सोशल मीडिया के जरिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि लोगों को पुलिस की इस अवेयरनेस सिस्टम का भी पता नहीं।

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शिकायतों के बाद भी पुलिस दर्ज नहीं करती डाटा थेफ्ट के मामलेे, इससे ही आरोपियों को मिल रही शह

एेसे लीक होता है डाटा: शातिर ठगों ने अपने फर्जी काॅल सेंटर खोल रखे हैं। इनके लिंक पाॅलिसी एजेंट्स और बैंकों के मुलाजिमों के साथ हंै। उनसे संपर्क करने के बाद ठगों को ये पता चलता है कि आपका किसी बैंक में अकाउंट है, आप कौन-सी इंश्योरेंस करवा रहे हंै और कितनी जगह आपने पैसे इन्वेस्ट किए हंै। इसके लिए ठग एजेंट को 10 रुपए से एक हजार तक सिर्फ डिटेल शेयर करने के लिए देते। फिर हर डिटेल पर काॅल कर ठग आपको लुभाते हैं या फिर ई-मेल पर लिंक भेजकर फंसा लेते हैं। ज्यादा पैसे मिलने की लालच में लोग ठगों से डिटेल शेयर कर रहे हैं और फिर उनका शिकार बन जाते हैं। यही नहीं ठगों की नजर इस पर भी होती है कि आप कंपनी की सर्विस से खुश है या नहीं। अगर नहीं तो वो आपको आॅफर देकर अपनी तरफ आकर्षित करते हैं।

बैंकों और कंपनियोंे को पता तक नहीं: पुलिस के पास डिजिटल फ्राॅड के कई मामले आते हंै, जिसमें पुलिस कार्रवाई कर देती है। आरोपी पकड़े जाने के बाद पता चलता है कि डाटा कंपनी के एजेंट से लिया गया है, लेकिन बावजूद इसके पुलिस डाटा थेफ्ट का मामला दर्ज नहीं करती। इसके चलते धोखाधड़ी का कारोबार चलता जाता है और एजेंट पैसों के चक्कर में डाटा आगे बेच देते हैं। कई बैंकों और पाॅलिसी कंपनियों में तो किसी को कानों-कान खबर नहीं होती और डाटा बिक जाता है।

केस स्टडी



ये बरतें सावधानियां




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