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रोजगार को बांस की हो प्रोसेसिंग: डॉ. कृष्णा

एक वर्ष पहले
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पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के जंगलात और कुदरती स्रोत विभाग और मिट्टी विज्ञान विभाग की ओर से इंडस्ट्रियल एग्रोफोरेस्ट्री पर वर्कशॉप हुई। 200 से ज्यादा प्रतिभागियों ने इसमें हिस्सा लिया। इंडस्ट्री से आए प्रतिभागियों, स्टेट फॉरेस्ट डिपार्टमेंट, एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट हॉर्टिकल्चर अफसरों, यूएचएफ सोलन, सीएसएसआरआई करनाल, ट्री ग्रोअर एसोसिएशन के सदस्यों, किसानों और स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया। आईएफएस कंजर्वेटर अॉफ फॉरेस्ट विशाल चौहान मुख्य मेहमान रहे। अटारी के डायरेक्टर डॉ.राजबीर सिंह, सोइल साइंस विभाग के हेड डॉ. ओपी चौधरी गेस्ट अॉफ अॉनर रहे। जंगलात और कुदरती स्रोत विभाग के हेड डॉ. संजीव चौहान ने सभी मेहमानों का स्वागत किया। विशाल चौहान ने वर्कशॉप के महत्व के बारे में जानकारी दी। डॉ. राजबीर सिंह ने प्राकृतिक स्रोतों और पर्यावरण के संरक्षण में पेड़ों की अहमियत के बारे में बात की।

उन्होंने कार्बन फुट प्रिंट और इसे कम करन में पेड़ों की अहमियत के बारे में बात की। टेक्नीकल सेशन की अध्यक्षता डॉ. आरसी धीमान ने की। उन्होंने किसानों, इंडस्ट्री और अन्य हितधारकों की भूमिका के बारे में बात की। उन्होंने मूल्य संवर्धन और एफपीओ का विकास करने के लिए प्रेरित किया। डॉ. एके दीक्षित ने पराली से पेपर बनाने के बारे में जानकारी दी। नेक्टर से आए डॉ. कृष्णा कुमार ने रोजगार के लिए बांस की प्रोसेसिंग और बांस को पेड़ के बजाए घास घोषित करने की बात कही। इससे कि ज्यादा लोग इसे बीजें। महिंदर सिंह और जुनेजा ने लकड़ी की इंडस्ट्री के विकास, इस इंडस्ट्री की एग्रोबेस्ड इंडस्ट्री घोषित करने के लिए कहा। नरेश तिवारी और आईएस सोहल ने कहा कि सरकार को इस इंडस्ट्री का सहयोग करने के लिए बोर्ड बनाने के लिए कहा। जोकि इंडस्ट्री और किसानों का सहयोग कर सके। लकड़ी की इंडस्ट्री और किसानों ने एक दूसरे को सहयोग देने की बात कही। साथ ही तमिलनाडु के क्वाड पैटराइट मॉडल को अपनाने के लिए भी हामी भरी।

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