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बेस्ट कोरोना वारियर्स / पटियाला के अगेता गांव ने खुद को किया क्वारंटाइन; मोदी के ऐलान से पहले ही कर दिया था लॉक डाउन

पटियाला जिले के गांव अगेता में खुद को क्वारंटाइन करने वाले ग्रामीण, जिनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है। पटियाला जिले के गांव अगेता में खुद को क्वारंटाइन करने वाले ग्रामीण, जिनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है।
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पटियाला जिले के गांव अगेता में खुद को क्वारंटाइन करने वाले ग्रामीण, जिनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है।पटियाला जिले के गांव अगेता में खुद को क्वारंटाइन करने वाले ग्रामीण, जिनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है।

  • पीएम मोदी के 21 दिन लॉक डाउन के ऐलान के पहले जनता कर्फ्यू के दौरान ही ठान लिया था कि गांव को बचाना है
  • किसान यूनियन ब्लॉक प्रधान हरविंदर सिंह अगेता, गांव की महिला सरपंच हरप्रीत कौर ने सबको सहमत किया
  • रोज सैनिटाइज किया जाता है पूरे गांव को, हर जरूरत अंदर ही पूरी करने के वादे के साथ न कोई बाहर जाएगा और न कोई आएगा

दैनिक भास्कर

Mar 24, 2020, 09:22 PM IST

नाभा (राकेश कुमार). कोरोना के खिलाफ जंग छेड़ने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में 21 दिन के लॉक डाउन का ऐलान किया है। लेकिन, पंजाब के पटियाला जिले के अगेता गांव के लोगों ने खुद को 21 दिन के लिए क्वारंटाइन करने का निर्णय जनता कर्फ्यू के दौरान ही ले लिया था। गांव के एक किसान नेता और महिला प्रधान ने इसके लिए गांव को तैयार किया और यह भी यकीन दिलाया कि उन्हें कोई परेशानी नहीं आने देंगे।

गांव को रोज किया जाता है सैनेटाइज। हर आने-जाने वाला गुजरता है प्रक्रिया से।

गांव में 750 लोग रहते हैं

नाभा में स्थित पंजाब की सबसे हाई सिक्युरिटी जेल की तरफ से जाते रास्ते पर अगेता गांव पड़ता है, इसमें सिर्फ 750 लोग रहते हैं। इस गांव में दो रिटायर्ड फौजी, तीन हालिया भर्ती जवान और एक सरकारी शिक्षक हैं। गांव के लोग भी ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं, सिर्फ 10 प्रतिशत ही यहां शिक्षित हैं। इस गांव को तीन सड़कें (वाया अगेती, कलामाजरा और मेहस से होकर निकलने वाली) नाभा से जोड़ती हैं।

इन्होंने बनाई आम सहमति

किसान यूनियन ब्लॉक प्रधान हरविंदर सिंह अगेता, गांव की महिला सरपंच हरप्रीत कौर, गांव निवासी बहादर सिंह, हरजीत सिंह नंबरदार, सतगुर सिंह, बिंदर सिंह, परगट सिंह, दलजीत सिंह, बलजिंदर सिंह और बलवंत सिंह के मुताबिक पूरे गांव की आम सहमति के बाद सभी ने अपने आप को गांव में लॉक करने का फैसला किया है। ग्रामीणों की मानें तो इन्होंने जनता कर्फ्यू में ही अपने गांव को बचाने की ठान ली थी। तय किया गया कि न कोई गांव से बाहर जाएगा और न ही कोई गांव के अंदर घुसने दिया जाएगा।

गांव को सील और सैनिटाइज किया

सबसे पहले बाजार से छिड़काव को दवाओं से भरी केन लाई गई और पूरी तरह खुद की बैरिकेड्स लगाकर हालात बदलने की शुरुआत की। गांव की हर गली, मंदिर, गुरुद्वारा चौक-चौराहे व तमाम रास्तों पर संक्रमण से बचाव को दवा का छिड़काव इंजन पंप से किया। यह हालात ठीक होने तक रोज किया जाया करेगा।

गांव में ठीकरी पहरा देते ग्रामीण और लक्कड़ अड़ाकर बनाया गया बैरिकेड।

हर जरूरत गांव में होगी पूरी, निकलना भी पड़े तो पहले एंट्री करें

अगर किसी भी इमरजेंसी में कोई गांव से जाएगा तो जाने और वापसी के वक्त सैनिटाइजेशन प्रक्रिया से गुजरना होगा, जाने से पहले से और वापसी की रजिस्टर में एंट्री करनी होगी। तीन पब्लिक नाकों पर ग्रामीण शिफ्ट के हिसाब से पहरा देंगे। इन सभी के अलग शिफ्ट में काम कर रहे सेवादार लंगर मुहैया कराएंगे। गांव के बाहर मजदूरी को जाने वाले परिवारों के मवेशियों के लिए हरा चारा जरूरतमंद परिवारों को खाना और दवाएं गांव में ही मुहैया कराई जाएंगी। गांव के किसी भी परिवार को कोई भी जरूरी सामान, नकदी या दूसरी सेवा चाहिए तो वह भी गांव की सीमा के अंदर ही मुहैया कराई जाएगी।

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