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डाउनलोड करेंरोपड़/ श्री आनंदपुर साहिब. आनंदपुर साहिब में मंगलवार को होला-महल्ला के तीसरे दिन भी श्री आनंदपुर साहिब की धरती पर रौनकें लगी रही। इस तीन दिनों के त्योहार में खालसे का जोश देखने वाला होता है। खालसे की इस जन्मभूमि पर चल रहे जोड़ मेला होला-महल्ला के दौरान गुरु नगरी केसरी रंग में रंग गई। सुबह से ही देश-विदेश से बड़ी गिनती में संगतें तख्त श्री केसगढ़ साहिब, गुरुद्वारा शीश गंज साहिब, गुरुद्वारा भोरा साहिब, किला आनंदगढ़ साहिब, किला लोहगढ़ साहिब, किला होलगढ़ साहिब सहित ओर गुरु घरों में नतमस्तक हुई।
बीते दिन भी अलग-अलग जत्थेबंदियां होले-मोहल्ले पर आनंदपुर साहिब पहुंची हुई हैं। तख्त श्री केसगढ़ साहिब में सुबह से ही संगतें नतमस्तक हो रही हैं। इस मौके ज्ञानी रघबीर सिंह जत्थेदार तख्त श्री केसगढ़ साहिब, एसजीपीसी मैंबर भाई अमरजीत सिंह चावला ने होला महल्ला का इतिहास बताया। वहीं शिरोमणि अकाली दल के पूर्व सांसद व सीनियर नेता प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने गुरु वाले बनने के लिए कहा। इन 6 दिनों में 12 लाख संगत माथा टेक चुकी है।
जांबाजों ने किया साहस और उल्लास का हैरतअंगेज प्रदर्शन
खालसायी नारों की गूंज के साथ होली पर सिखों का प्रमुख त्योहार होला महल्ला संपन्न हो गया। इस दौरान चरणगंगा स्टेडियम में घोड़ों पर सवार जांबाजोंं (निहंग) ने हाथ में निशान साहब उठाए और तलवारों के करतब दिखाकर साहस, पौरुष और उल्लास का हैरतअंगेज प्रदर्शन किया। निहंगों द्वारा घुड़दौड़ में दिखाए करतबों से संगत हतप्रभ रह गई। निहंग सिंह जवान एक, दो नहीं बल्कि तीन-घोड़ों पर सवार होकर करतब दिखाते दिखे। तीरंदाजी में भी निहंगों ने शानदार प्रदर्शन किया।
श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने की थी परंपरा शुरू
सिख पंथ में होली को होला महल्ला के रूप में मनाने की परंपरा श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने शुरू की थी। श्री गुरुग्रंथ साहब में होली का उल्लेख करते हुए प्रभु के संग रंग खेलने की कल्पना की गई है। गुरुवाणी के अनुसार, परमात्मा के अनंत गुणों का गायन करते हुए प्रफुल्लता उत्पन्न होती है और मन महा आनंद से भर उठता है। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने होली को आध्यात्मिकता के रंग में रंग दिया। उन्होंने इसे होला महल्ला का नाम दिया।
क्या है होला महल्ला का अर्थ
होला शब्द होली की सकारात्मकता का प्रतीक और महल्ला का अर्थ उसे प्राप्त करने का पराक्रम है। रंगों के त्योहार के आनंद को मुखर करने के लिए गुरु जी ने इसमें व्याप्त हो गई कई बुराइयों जैसे कीचड़ फेंकने, पानी डालने आदि का निषेध किया।
मेले में कई लोगों की जेबें भी कटीं
जिला प्रशासन की तरफ से संगत की सहूलियत के लिए लागू की गई पाबंदियां पुलिस की सख्ती के कारण काफी हद तक असरदार दिखीं, लेकिन इसके बावजूद मेले में भिखारी तख्त श्री केसगढ़ साहिब के इर्द-गिर्द संगत को परेशान करते दिखे। तख्त श्री केसगढ़ साहिब में पुलिस की सख्ती के बावजूद लोगों के पर्स, मोबाइल, एटीएम आदि माथा टेकने के समय चोरी हो गए। किरपाल सिंह पुत्र निरवैर सिंह निवासी जालंधर का पर्स चोरी हो गया। इसमें एटीएम कार्ड व अन्य जरूरी कागजात थे।
इसी तरह जसविंदर सिंह पुत्र सेवा सिंह का पर्स चोरी हो गया। परमजीत सिंह पुत्र अजमेर सिंह निवासी गांव फूल रोपड़ का भगत पूर्ण सिंह सेहत बीमा का कार्ड। इसी तरह गुरमीत सिंह पुत्र सुखदेव सिंह निवासी रोपड़, बीबी राजविंदर कौर पत्नी करनैल सिंह का आधार, पैन कार्ड व अन्य सामान चोरी हो गया।
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