मानसून / सूखी नदी में अचानक आया उफान, 8 घंटे में बड़ी मुश्किल से बची 7 लोगों की जान



रोपड़ जिले से गुजरती सरसा नदी की बाढ़ में फंसे धान लगाने अए मजदूर। रोपड़ जिले से गुजरती सरसा नदी की बाढ़ में फंसे धान लगाने अए मजदूर।
several laborer rescued with the help of divers after 8 hours from River Flood
several laborer rescued with the help of divers after 8 hours from River Flood
several laborer rescued with the help of divers after 8 hours from River Flood
X
रोपड़ जिले से गुजरती सरसा नदी की बाढ़ में फंसे धान लगाने अए मजदूर।रोपड़ जिले से गुजरती सरसा नदी की बाढ़ में फंसे धान लगाने अए मजदूर।
several laborer rescued with the help of divers after 8 hours from River Flood
several laborer rescued with the help of divers after 8 hours from River Flood
several laborer rescued with the help of divers after 8 hours from River Flood

  • रोपड़ के आसपुर कोटां के पास आए थे धान लगाने आए थे बिहार के अररिया के नरपतगंज के रहने वाले मजदूर
  • शुक्रवार को खेत में छोड़कर गया था हिमाचल प्रदेश के गांव मगनपुर का बलविंदर सिंह
  • तड़के करीब 3 बजे बलविंदर सिंह को मोबाइल फोन से कॉल करके सूचना दी मजदूरों ने

Dainik Bhaskar

Jul 13, 2019, 06:29 PM IST

रोपड़. पंजाब में मानसून की दस्तक के बाद पिछले तीन दिन से हो रही बारिश के तरह-तरह की परेशानियों से लोगों को दो-चार होना पड़ रहा है। शहरों में जहां सड़कों पर जलभराव से वाहन चालकों को परेशानी हो रही है, वहीं ग्रामीण खासकर नदी-नालों से सटे इलाकों में भी लोगों की जान सांसत में आई हुई है। शनिवार को रोपड़ जिले से गुजरती सरसा नदी (मौसमी नदी) में उफान आने के चलते यहां सात मजदूर पानी के बहाव में फंस गए। इन्हें गोताखाेरों की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद निकाला गया। हालांकि रात तक नहर एकदम सूखी थी, लेकिन अचानक पानी आ जाने के चलते खेत में सो रहे धान की रोपाई का काम कर रहे मजदूर इसमें लगभग 8 घंटे तक फंसे रहे।

 

मिली जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के नालागढ़ क्षेत्र के गांव मगनपुर के बलविंदर सिंह की करीब 12 एकड़ जमीन पंजाब के रूपनगर जिले के आसपुर कोटां के पास है। यह जमीन सरसा नदी के ठीक किनारे है। बलविंदर सिंह दस दिन से अपने खेतों में धान की रोपाई करवा रहा था। शुक्रवार को भी वह मजदूरों को खेतों में छोड़कर गया था। रात जब मजदूर खेत के पास सो रहे थे तो हिमाचल प्रदेश में पहाड़ों पर बारिश के बाद सरसा नदी उफान पर आ गई और बलविंदर सिंह के खेत नदी के पानी में डूब गए। खेत के पास सो र‍हे सात मजदूर नदी के पानी के तेज बहाव के बीच घिर गए। तड़के करीब 3 बजे मजदूरों ने बलविंदर सिंह को मोबाइल फोन से कॉल करके इस बारे में सूचना दी। फिर बलविंदर सिंह ने प्रशासन तक ये सूचना पहुंचाई।

 

सिंचाई विभाग की टीम मौके पर भेजी, लेकिन उनके पास मजदूरों को बचाने का कोई प्रबंध नहीं था। पहले पटवारी निशांत अग्रवाल और पटवारी गुरदीप सिंह, कानूनगो हरमेश सिंह मौके पर पहुंच गए। प्रशासन की टीम मौके पर इस उम्‍मीद में इंतजार करती रही कि नदी का पानी कम हो जाएगा। प्रशासन को कुछ करता नहीं देख किसान बलविंदर सिंह ने कहा कि अगर प्रशासन कुछ नहीं कर सकता तो वह खुद ही पानी में जाकर उन्हें बचाने का प्रयास करेगा। इसके बाद भरतगढ़ पुलिस ने गोताखोर बुलाए। मौके पर पुलिस भी पहुंच गई। कीरतपुर साहिब के एसएचओ सन्नी खन्ना और भरतगढ़ चौकी इंचार्ज सरताज सिंह की टीम पहुंच गई।

 

मौके पर जब प्रशासन की टीम में से शामिल एक अधिकारी ने किसान को कहा कि जब आपको पता है कि नदी उफान पर आ सकती है तो आप मजदूरों को क्यों खेतों में काम पर लगाकर गए। इस पर किसान बलविंदर सिंह ने बताया कि पिछले दो सीजनों में पहले धान फिर गेहूं की फसल नदी की बाढ़ की चपेट में आकर खराब हो गई थी। इस बार भी फसल खराब हो गई है। उन्होंने कहा कि उन्हें सरकार पांच हजार रुपए महीने की नौकरी ही दिला दे वह घाटे का सौदा खेती करना छोड़ देगा। आखिर गोताखोर भी आ गए, लेकिन उनका भी खेतों तक पहुंचाना आसान नहीं था। किसान बलविंदर सिंह गोताखोर सुरेश व मालटा के साथ वहां तक गया, जहां तक वह पानी में घुस पाया। उसने खेतों का रास्ता गोताखोरों को बताया। इसके बाद गोताखोरों ने एक-एक कर फंसे मजदूरों को निकाला।

 

ये लोग फंसे थे पानी में

बचाए गए मजदूरों में मनजीत सिंह पुत्र भूमि सिंह, मुन्ना सिंह पुत्र राम जी सिंह, संतू सिंह पुत्र विजय सिंह, रमेश सिंह पुत्र उड़ैत नारायण, किशोरी पुत्र देवू, अरविंद सिंह पुत्र मन्ना सिंह, अशोक सिंह पुत्र मनक सिंह शामिल हैं। ये सभी बिहार के अररिया के नरपतगंज के रहने वाले हैं। मनजीत सिंह व अन्य मजदूरों ने कहा कि हमें बचने की उम्‍मीद नहीं थी।

COMMENT