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50 मीटर रेस में शिवानी परूथी और शॉटपुट में शरणजीत को पहला स्थान

एक वर्ष पहले
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गुरु नानक देव इंजीनियरिंग कॉलेज ने आईकेजी पीटीयू की 23वीं वार्षिक एथलेटिक मीट के दौरान शानदार प्रदर्शन किया और लड़के लड़कियों दोनों क्षेत्र में चैम्पियनशिप ट्रॉफी अपने नाम की। यह एथलेटिक मीट पीटीयू कैंपस में 4-6 मार्च, 2020 के दौरान करवाई गई। इसमें लड़कों ने कुल 8 गोल्ड मेडल, 5 सिल्वर मेडल और 7 ब्रॉन्ज मेडल जीतकर, मेडलों की गिनती 20 तक पहुंचाई। लड़कियों ने भी यह प्रदर्शन जारी रखते हुए 9 गोल्ड मेडल, 3 सिल्वर मेडल और 7 ब्रॉन्ज मेडल सहित 19 मेडल जीते। ये सभी पदक जीएनई के छात्रों ने अलग-अलग ट्रैक और फील्ड स्पर्धाओं में जीते। इसके साथ ही जीएनई के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजी. के तीसरे वर्ष के छात्र जशनदीप सिंह भुल्लर को पीटीयू का बेस्ट फ्लीट घोषित किया गया। उसने हाई जंप इवेंट में रिकॉर्ड तोड़कर यह उपलब्धि हासिल की। डॉ. सहिजपाल सिंह, प्रिंसिपल, जीएनई ने इस अवसर पर बहुत खुशी ज़ाहिर की और पूरे पंजाब से आए 12 कॉलेजों को पीछे छोड़ कर यह उपलब्धि हासिल करने वाले छात्रों को बधाई दी। डॉ. गुंजन भारद्वाज और शामिंद्र सिंह, हरजिंदर सिंह, सदस्य जीएनई स्पोर्ट्स विंग, ने सभी छात्रों के प्रदर्शन पर गर्व होने की बात कही।

कागज रंगना पुराना हुआ, अब कोडिंग नया रंग

शा यद ही ऐसा कोई बच्चा हो जिसे ड्राइंग बुक रंगना या होली के त्योहार के दौरान रंग लगाना पसंद न हो। उन्हें चमकदार रंग बहुत अच्छे लगते हैं। लेकिन यहां छह साल के बच्चों की एक पूरी पीढ़ी कलरिंग की तरह कोडिंग में लगी हुई है, क्योंकि उन्हें इसमें गणित से ज्यादा मजा आ रहा है।

आमतौर पर 6 साल की उम्र में बच्चों को कुछ तरह के खेलों के अलावा संगीत, चित्रकला, यहां तक कि नाट्यकला आदि सिखाई जाती है। और वे इन क्लासेस को कोचिंग क्लास कहते हैं। लेकिन नई पीढ़ी अपनी क्लास को ‘कोडिंग क्लास’ कहती है, जहां वे एबीसी अल्फाबेट नहीं, बल्कि कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग की एबीसी सीखते हैं। ऐसी ही एक कोडिंग क्लास के मालिक अशोक अनंतरमैया को लगता है कि कोडिंग बच्चों की मदद करने का एक तरीका है, जैसे समस्या को पहचानना, उसे छोटे-छोटे चरणों में बांटना और उसे समाधान के लायक बनाना, जो कि कम्प्यूटिंग की आधारभूत प्रक्रिया है। यह बच्चों के लिए आसान और संभव इसलिए भी हो पाया क्योंकि वे टेक्नोलॉजी से पहले से ही परिचित हैं।

वे यह भी मानते हैं कि कोडिंग दरअसल पाठ्य पुस्तकों की तुलना में गणित सीखने का ज्यादा बेहतर तरीका है क्योंकि इसमें बच्चे सहज रूप से खुद की सीखने की इच्छा रखते हैं। इसलिए छह वर्ष की उम्र में कोडिंग अब नई गणित बन चुकी है। कोटा या हिसार या किसी भी टीयर-टू और थ्री शहर की कोचिंग क्लासेस की तरह बेंगलुरु में कई दर्जन कोडिंग क्लास खुल गई हैं। कैम्पके12, स्माउल और मूव फॉर्वर्ड कुछ ऑनलाइन और एजुकेशन टेक स्टार्टअप हैं, जो बच्चों को कम से कम उम्र में कोडिंग सिखाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

अगर आपका तर्क है कि कोडिंग से दिमाग का केवल बायां भाग विकसित होगा और बच्चों में कलात्मकता विकसित नहीं हो पाएगी तो कैम्पके12 के अंशुल भागी के पास इसका जवाब है। वे कहते हैं कि कोडिंग, हिन्दी, अंग्रेजी या फ्रेंच की तरह ही एक भाषा है। अंशुल के मुताबिक, जैसे भाषा से हम अभिव्यक्ति और कविता जैसे रचनात्मक स्वरूप, इन दोनों तरह के संवाद कर पाते हैं, कोडिंग में भी उसी तरह कलात्मकता और अभिव्यक्ति की बहुत संभावनाएं हैं।

आईआईटी दिल्ली से पढ़े, स्माउल के सह-संस्थापक शैलेंद्र धाकड़ मानते हैं कि 12 से 14 साल स्कूल की पढ़ाई उन नए बच्चों को बहुत परफेक्ट बना सकती है और कम्प्यूटर की बेसिक समझ दे सकती है, जो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र कॅरिअर बनाना चाहते हैं। और उन्हें लगता है कि स्कूलों को इस नई जरूरत के मुताबिक खुद को ढालना होगा। शैलेंद्र यह भी मानते हैं कि कोडिंग केवल एक अलग माध्यम है, जो युवा मनों को कुछ बनाने का एक मंच प्रदान करती है। शैलेंद्र कहते हैं, ‘जैसे बच्चे क्रेयॉन्स से कागज पर चित्र बनाते हैं, वैसे ही कोडिंग ड्रॉइंग की तरह कुछ खूबसूरत और रचनात्मक बनाने के लिए प्रोग्रामिंग का इस्तेमाल करती है।’

वहीं माता-पिता भी कोडिंग की इन ऑनलाइन या फिजिकल कोचिंग क्लासेस का साथ दे रहे हैं, मुख्यत: इसलिए क्योंकि उन्हें लगता है कि किसी भी बच्चे के लिए डिग्री के सर्टिफिकेट्स के साथ कौशल होना भी जरूरी है। इन मॉड्यूल्स के खत्म होने के बाद ये बच्चे मोबाइल एप्स, छोटे गेम्स और यहां तक कि अपने पैरेंट्स के बिजनेस के लिए जानकारी वाली वेबसाइट्स तक बना पा रहे हैं। वे दिन गए जब मेहमानों के आने पर बच्चों का परिचय यह कहकर करवाते थे कि ‘यह पिआनो या तबला बजा सकता है’। बच्चों का परिचय करवाने का नया तरीका है, ‘यह रंग-बिरंगी वेबसाइट्स और मोबाइल एप इसने बनाया है।’हालांकि कोडिंग भविष्य है, लेकिन इसका सबसे बड़ा नुकसान है बच्चों द्वारा स्क्रीन के सामने बिताने वाले समय का बढ़ना। खासतौर पर तब, जब आधुनिक समय में पैरेंटिंग की सबसे बड़ी चुनौती बच्चों के लिए गैजेट्स की उपलब्धता है। शायद माता-पिता को भी बच्चों की जिंदगी रंग-बिरंगी बनाने के लिए संतुलन और निगरानी का नया कोर्स करना पड़ेगा।

फंडा यह है कि रंगों के त्योहार होली पर यह समझें कि बच्चों के युवा मन को कौन-से विषय रंगों से भरते हैं। फिलहाल कोडिंग उनके लिए सबसे रंगीन विषय लग रहा है। इनका भविष्य परफेक्ट बनाने के लिए आने वाले शैक्षणिक सत्र में कोडिंग का ये रंग जोड़ सकते हैं।

पीसीटीई में रंगिस्तान-द डिस्को होली की मस्ती

लुधियाना। पीसीटीई ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स के बी फार्मेसी थर्ड ईयर के स्टूडेंट्स ने रंगों का त्योहार मनाने के लिए रंगिस्तान-द डिस्को होली का आयोजन किया, जिसमें कैंपस होली के गीतों, रंगों और स्टाॅलों से रंग गया था। पीसीटीई ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट की सह-आचार्य सीमा ठाकुर ने कहा कि यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि स्टूडेंट्स इस तरह के आयोजन कर रहे हैं जो उन्हें अपनी संस्कृति के साथ बने रहने में मदद करें और दूसरे देशों के स्टूडेंट्स को भी हमारी संस्कृति उत्सव का आनंद लेने में मदद करें। पीसीटीई के महानिदेशक डॉ केएनएस कंग ने कहा कि समृद्ध संस्कृति के पीछे के इतिहास को जानने के लिए स्टूडेंट्स के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि ऐसे त्योहारों को मनाएं।

सोनजीत ने लॉन्ग-ट्रिपल
जंप में जीता गोल्ड मेडल


गुरु नानक देव इंजीनियरिंग कॉलेज ने पीटीयू की वार्षिक एथलेटिक मीट में किया शानदार प्रदर्शन

मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए
9190000071 पर मिस्ड कॉल करें


स्पोर्ट्स रिपोर्टर | लुधियाना

डीडी जैन कॉलेज ऑफ एजुकेशन की ओर से अपने खेल मैदान में सालाना एथलेटिक मीट कराई गई। इसका उद्देश्य स्टूडेंट्स में खेल के प्रति जागरुकता पैदा करना है। पूरे परिसर को रंगीन झंडों और गुब्बारों से सजाया गया। कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. विजय लक्ष्मी ने झंडा फहराया और एथलेटिक मीट की घोषणा की। रेस (फास्ट वॉक), 50 मीटर बैक रेस, बाधा दौड़, डिस्कस थ्रो, चाट्टी रेस, थ्री-लेग्ड रेस, जैवलिन थ्रो, शॉटपुट, सैक रेस और स्पून-लेमन रेस में खिलाड़ियों ने भाग लिया। अंत में डॉ. विजय लक्ष्मी ने खिलाड़ियों को जीवन में खेल महत्ता के बारे में बताया और विजेताओं को मेडल देकर सम्मानित किया।

एक्टर युवराज हंस, विक्की शर्मा, निकीत ढिल्लों और हरीश वर्मा


खन्ना| आईकेजी पीटीयू में वार्षिक एथलेटिक मीट 2020 के टूर्नामेंट के दौरान एएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की छात्रा ने लॉन्ग और ट्रिपल जंप में गोल्ड मेडल जीतकर अपने अभिभावकों का नाम रोशन किया। डायरेक्टर डॉ. हरप्रीत सिंह ने बताया कि सोनजीत कौर बीबीए-6 ने टूर्नामेंट में अपने खेल का उम्दा प्रदर्शन कर लॉन्ग जंप और ट्रिपल जंप में गोल्ड जीतकर राज्य स्तर पर प्रथम स्थान हासिल किया। इंस्टीट्यूशन पहुंचने पर सोनजीत कौर का विशेष सम्मान किया गया। पदाधिकारियों ने स्पोर्ट्स कोऑर्डिनेटर हितेश जैरथ को भी बधाई देकर उनके प्रशंसा की।

ये रहे रिजल्ट

50 मीटर रेस में शिवानी परूथी पहले, प्रभजोत दूसरे और रिचा तीसरे, फास्ट वॉक 50 मीटर में शरणजोत कौर पहले, प्रभजोत दूसरे और सिमरनजीत तीसरे, बाधा दौड़ में शिवानी शर्मा पहले, मीनाक्षी दूसरे और प्रभजोत तीसरे, जैवलीन थ्रो में शरणजीत कौर पहले, शिवानी दूसरे और जसकरण कौर तीसरे, डिस्कस थ्रो में शरणजीत कौर पहले, जसकरण कौर दूसरे और नेहा गर्ग तीसरे, शॉटपुट में शरणजीत कौर पहले, रश्मि दूसरे और नेहा तीसरे, चम्मच नींबू रेस में नेहा, निकिता दूसरे और कोमल तीसरे, सैक रेस में जसकरण कौर पहले, रश्मि दूसरे और तवलीन तीसरे स्थान पर रही।

 

जेम्स

सिटी लाइफ रिपोर्टर। लुधियाना। बलम पिचकारी, डू मी अ फेवर लेट्स प्ले होली, रंग बरसे भीगे चुनर वाली, हाेलिया में उड़े रे गुलाल जैसे सुपरहिट गानाें के साथ जन्नत लेडीज क्लब का मंगलवार काे हाेली सेलिब्रेशन हुअा। व्हाइट सूट अाैर रंग बिरंगे दुपट्टाें की थीम के साथ क्लब मेंबर्स तैयार होकर पहुंची। कई तरह के मजेदार प्रॉप्स के साथ फोटोशूट करवाया। क्लब की चेयरपर्सन मनीषा शर्मा और प्रेसिडेंट जन्नत ने होली की विशेज दी। इस दौरान फिल्म ‘यार अनमुल्ले रिटर्न्स’ की स्टार कास्ट हरीश वर्मा, युवराज हंस, राना जंग बहादुर भी पहुंचे। उन्हाेंने होली की विशेज देते हुए सेफ होली खेलने का मैसेज दिया।

नीरू, सिम्मी और रिंपी

अनीता बेदी और आरती शारदा

कविता, गीता धीर और सुषमा

राधिका

प्रीति

निर्मल

रूबी और चाहत

सरिता और शिवानी

दलजीत

मोनिका

मनीषा शर्मा और जन्नत शर्मा

संदीप कौर और रुपाली

चारु, रोशनी और चीनू

महक और रायना

कोमल और मुस्कान

डेंबा और कैथरीन

सोनी

एला

सलोनी

डियाडे

07

, लुधियाना, मंगलवार 10 मार्च, 2020

एन. रघुरामन

मैनेजमेंट गुरु

raghu@dbcorp.in
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